बिहार MLC चुनाव में महागठबंधन में घमासान, 7 सीटों पर साथी आमने-सामने
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले बिहार MLC चुनाव में महागठबंधन के भीतर सीटों को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। बिहार MLC चुनाव में RJD, कांग्रेस और वाम दलों के उम्मीदवार कई सीटों पर एक-दूसरे के सामने हैं। सबसे ज्यादा चर्चा दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की है, जहां कांग्रेस, RJD और वाम दल के उम्मीदवार मैदान में हैं।
इस घटनाक्रम ने विपक्षी गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आठ सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को प्रस्तावित है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।
दरभंगा शिक्षक सीट पर सबसे दिलचस्प मुकाबला
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला बनता जा रहा है। कांग्रेस ने अपने मौजूदा एमएलसी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को फिर मैदान में उतारा है।
इसके बाद RJD ने इसी सीट से कुंवर राय को प्रत्याशी बना दिया। वहीं, वाम दल की ओर से रामदेव राय भी चुनाव मैदान में हैं। इस तरह एक ही विपक्षी गठबंधन से जुड़े दलों के उम्मीदवार यहां सीधे मुकाबले में दिखाई दे रहे हैं।
दरभंगा सीट पर मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मदन मोहन झा इस क्षेत्र से मौजूदा एमएलसी हैं। RJD के प्रत्याशी उतारने के बाद कांग्रेस और RJD के बीच सीट को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो गया है।
यहां एक तथ्य ध्यान रखना जरूरी है कि दरभंगा का यह मुकाबला शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में है, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में नहीं। दरभंगा स्नातक सीट पर RJD के अनिल कुमार झा और कांग्रेस के रजनीकांत पाठक अलग-अलग उम्मीदवार हैं।
पटना और कोसी स्नातक सीट पर भी RJD-कांग्रेस आमने-सामने
महागठबंधन के भीतर टकराव सिर्फ दरभंगा तक सीमित नहीं है। पटना स्नातक सीट पर RJD ने दिलीप कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने डॉ. असदुल्लाह खान को मैदान में उतारा है।
इसी तरह कोसी स्नातक सीट पर RJD के नितेश कुमार और कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल के बीच मुकाबला है। दरभंगा स्नातक सीट पर भी RJD के अनिल कुमार झा और कांग्रेस के रजनीकांत पाठक आमने-सामने हैं।
पटना शिक्षक सीट पर भी दोनों दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। RJD ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने संजय यादव को टिकट दिया है। इस तरह दोनों सहयोगी दलों के बीच कई निर्वाचन क्षेत्रों में सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
सारण शिक्षक सीट पर RJD और CPI की टक्कर
महागठबंधन के भीतर एक और मुकाबला सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में है। यहां RJD ने प्रो. जयराम यादव को उम्मीदवार बनाया है, जबकि CPI ने विद्यासागर विद्यार्थी को मैदान में उतारा है।
विद्यासागर विद्यार्थी पहले से शिक्षक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं और चुनाव क्षेत्र में शिक्षकों से संपर्क अभियान भी चला चुके हैं। ऐसे में सारण शिक्षक सीट पर भी गठबंधन के भीतर से ही दो उम्मीदवारों की चुनौती देखने को मिल रही है।
तिरहुत शिक्षक सीट पर CPI के मौजूदा एमएलसी डॉ. संजय कुमार सिंह भी मैदान में हैं। इस सीट पर गठबंधन के भीतर उम्मीदवारों को लेकर अलग-अलग रणनीतियां सामने आई हैं।
NDA में भी बागियों और असंतोष की चुनौती
महागठबंधन के अलावा NDA के भीतर भी चुनावी समीकरण पूरी तरह आसान नहीं दिख रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक सीट की है, जहां JDU ने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को फिर उम्मीदवार बनाया है।
मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पहले नीरज कुमार के खिलाफ अपना रुख जाहिर किया था और जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन की बात भी सामने आई थी। हालांकि, 5 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि उन्होंने अनंत सिंह से बात की है और उन्होंने नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं देने पर सहमति जताई है।
इसके बावजूद अनंत सिंह की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है। पटना स्नातक सीट पर JDU के नीरज कुमार के मुकाबले जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह भी चुनाव मैदान में हैं।
23 अक्टूबर को होगा मतदान, 27 को आएगा परिणाम
बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। चुनाव के लिए मतदान 23 अक्टूबर को होना है और मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
इस चुनाव में गठबंधन के भीतर उम्मीदवारों का आमने-सामने होना खास राजनीतिक महत्व रखता है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी गठबंधन के भविष्य का अंतिम संकेत मानना जल्दबाजी होगी। अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवारों की पकड़ और मतदाता समूह भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महागठबंधन के सहयोगी दल चुनाव के बाद भी एक साथ राजनीतिक मंच पर बने रहेंगे या MLC चुनाव की यह प्रतिस्पर्धा उनके रिश्तों पर लंबा असर डालेगी? इसका जवाब चुनाव परिणाम और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से ही स्पष्ट होगा।
