बिहार MLC चुनाव में घमासान तेज, अनंत सिंह और बागियों से NDA की बढ़ी चिंता

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बिहार MLC चुनाव में घमासान तेज, अनंत सिंह और बागियों से NDA की बढ़ी चिंता

बिहार में MLC चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर मुकाबले के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। MLC चुनाव 2026 में एक तरफ राजद आठों सीटों पर जीत का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा ने भी सभी सीटें जीतने का भरोसा जताया है। इस बीच जदयू विधायक अनंत सिंह के अलग रुख और कुछ नेताओं की बगावत को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

14 अक्टूबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय और 15 अक्टूबर को जदयू कार्यालय में बैठकों का दौर चला। गठबंधन के नेताओं के मुताबिक, इन बैठकों का मकसद चुनावी तैयारियों की समीक्षा करना और मतदाताओं तक पहुंच मजबूत करना है।

आठ MLC सीटों पर क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल?

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों में चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी के स्नातक क्षेत्र तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण के शिक्षक क्षेत्र हैं।

इन सीटों पर चुनाव को लेकर प्रमुख दल अपने उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के साथ रणनीति बना रहे हैं। चुनाव में दलों के अधिकृत उम्मीदवारों के अलावा निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशी भी मैदान में हैं। ऐसे में मुकाबले का आकलन केवल गठबंधन की ताकत से नहीं, बल्कि स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों के समर्थन से भी जुड़ा है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदान 23 अक्टूबर 2026 को और मतगणना 27 अक्टूबर को होनी है। नतीजों से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष में माहौल होने का दावा कर रहे हैं।

राजद का दावा- आठों सीटों पर हमारी जीत तय

राष्ट्रीय जनता दल के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने दावा किया कि उनकी पार्टी स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ में से सात सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एक सीट पर उसने कम्युनिस्ट पार्टी को समर्थन दिया है। उनके मुताबिक, विपक्षी खेमे को सभी आठ सीटों पर सफलता मिलने की उम्मीद है।

शक्ति यादव ने एनडीए की लगातार हो रही बैठकों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा और जदयू की बैठकों के बीच गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है। उन्होंने अनंत सिंह के रुख का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जदयू के भीतर ही अलग आवाजें सुनाई दे रही हैं।

राजद प्रवक्ता ने यह भी कहा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता ऐसे प्रतिनिधि चाहते हैं जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि मजबूत हो। हालांकि, आठों सीटों पर जीत का उनका दावा राजनीतिक बयान है; चुनाव परिणाम आने से पहले इसे तय नतीजा नहीं माना जा सकता।

भाजपा बोली- घबराहट नहीं, तैयारी के लिए हो रही बैठकें

राजद के आरोपों पर भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि एनडीए में किसी तरह की घबराहट नहीं है। उनके अनुसार, लगातार बैठकें चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने, कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने और मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने के लिए हो रही हैं।

प्रेम रंजन पटेल ने दावा किया कि एनडीए सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज करेगा। उन्होंने विपक्ष के बिखराव और गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच मतभेदों का भी जिक्र किया।

भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, कुछ नेताओं ने गठबंधन समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ विरोध किया था। उन्होंने कहा कि संबंधित दलों ने ऐसे दो लोगों को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया है। उनके बयान के अनुसार, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उम्मीदवार के खिलाफ विरोध करने वालों पर भी कार्रवाई हुई।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि मतदाता एनडीए के साथ मजबूती से खड़े हैं। यह गठबंधन का चुनावी दावा है, जिसकी पुष्टि मतदान और मतगणना के बाद ही होगी।

अनंत सिंह के रुख ने बढ़ाई चर्चा

इस चुनाव में जदयू विधायक अनंत सिंह का रुख भी चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अनंत सिंह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं, जबकि जदयू ने इस सीट से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है।

इस घटनाक्रम ने जदयू के भीतर मतभेदों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने इसे जदयू का आंतरिक मामला बताया और कहा कि इससे चुनावी नतीजों पर असर नहीं पड़ेगा।

दूसरी ओर, कांग्रेस प्रवक्ता शिशिर कौण्डिल्य ने आरोप लगाया कि एनडीए के कुछ नेता गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। उन्होंने अनंत सिंह के जन सुराज उम्मीदवार के समर्थन को इसी संदर्भ में उठाया और कहा कि भाजपा तथा एनडीए की बैठकें डैमेज कंट्रोल की कोशिश हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता ने इस स्थिति के लिए भाजपा की रणनीति को जिम्मेदार ठहराते हुए ‘ऑपरेशन लोटस’ का भी उल्लेख किया। यह उनका राजनीतिक आरोप है; इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

चुनाव में बागियों की भूमिका कितनी अहम होगी?

स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, मतदाताओं से संपर्क और स्थानीय मुद्दे अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में किसी दल के भीतर असंतोष या बागी उम्मीदवारों का मैदान में होना वोटों के समीकरण को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका वास्तविक असर पहले से तय नहीं माना जा सकता।

एनडीए जहां अपनी बैठकों को चुनावी तैयारी का हिस्सा बता रहा है, वहीं विपक्ष इन्हीं बैठकों को गठबंधन के भीतर चिंता का संकेत बता रहा है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और मतदाताओं के समर्थन को लेकर आश्वस्त होने की बात कह रहे हैं।

अब निगाहें 23 अक्टूबर के मतदान और 27 अक्टूबर की मतगणना पर हैं। नतीजे बताएंगे कि आठों सीटों पर किस दल या उम्मीदवार को मतदाताओं का समर्थन मिला और अनंत सिंह से जुड़ा विवाद तथा बागियों की सक्रियता चुनावी परिणामों पर कितना असर डाल पाई।

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