बिहार में जमाबंदी को लेकर बड़ा आदेश, 31 अक्टूबर तक होगा सुधार
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में बिहार जमाबंदी सुधार अभियान को तेज कर दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लॉगिन में उपलब्ध अधूरी और त्रुटिपूर्ण जमाबंदियों को बिहार जमाबंदी सुधार अभियान के तहत 31 अक्टूबर तक दुरुस्त किया जाए। इसके लिए अब रैयत के आवेदन का इंतजार नहीं करना होगा।
विभाग ने अधूरी जमाबंदियों को रकबा, खाता और खेसरा समेत अलग-अलग विवरण के आधार पर चिह्नित कर अंचल अधिकारियों के लॉगिन में उपलब्ध कराया है। अधिकारियों को मूल अभिलेखों से मिलान कर आवश्यक सुधार करने होंगे।
31 अक्टूबर तक पूरा करना होगा जमाबंदी सुधार
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाया है। इसी अभियान के तहत अंचल अधिकारियों को अपने लॉगिन में उपलब्ध सभी अधूरी और गलत जमाबंदियों का सत्यापन कर सुधार पूरा करना है।
राजस्व विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में 15 सितंबर को जमाबंदी अद्यतीकरण और उत्तराधिकार नामांतरण के लिए विशेष अभियान से संबंधित निर्देश जारी होने की जानकारी दर्ज है। 30 सितंबर को भी मिशन मोड में अभियान के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन से संबंधित परिपत्र जारी किया गया।
सचिव जय सिंह ने अधिकारियों से कहा है कि तय समय सीमा के भीतर अभियान को पूरा करने के लिए अंचल स्तर पर नियमित निगरानी जरूरी है।
अब रैयत के आवेदन का इंतजार नहीं
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अधूरी जमाबंदी के सुधार के लिए रैयत के आवेदन का इंतजार नहीं किया जाएगा।
विभाग ने पहले ही ऐसी जमाबंदियों की सूची तैयार कर संबंधित अंचल अधिकारियों के लॉगिन में उपलब्ध करा दी है। अधिकारियों को सूची के आधार पर हल्का-वार कार्रवाई करनी होगी।
राजस्व कर्मचारियों को संबंधित हल्का में भेजकर मूल अभिलेखों से जमाबंदी का मिलान कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर संबंधित स्थान से भी दस्तावेजों और जमीन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सकती है।
विभाग का कहना है कि यह अभियान विभाग की पहल पर चल रहा है, इसलिए इसे पूरा कराने की जिम्मेदारी भी संबंधित पदाधिकारियों और कर्मचारियों की है।
रकबा, खाता और खेसरा का होगा सत्यापन
अधूरी जमाबंदियों को चिह्नित करते समय रकबा, खाता और खेसरा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को आधार बनाया गया है।
अंचल अधिकारी अपने लॉगिन में उपलब्ध सूची के अनुसार हल्का-वार माइक्रो प्लान तैयार कर सकते हैं। इसके बाद राजस्व कर्मचारियों को संबंधित क्षेत्रों में भेजकर रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी।
जहां मूल अभिलेख उपलब्ध हैं, वहां उन्हीं के आधार पर जमाबंदी में आवश्यक सुधार किया जाएगा। जमीन की मापी की जरूरत होने पर निशुल्क मापी कराने का भी निर्देश दिया गया है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य रिकॉर्ड में मौजूद अधूरी या गलत प्रविष्टियों को समय रहते ठीक करना है, ताकि ऑनलाइन भू-अभिलेख में उपलब्ध जानकारी अधिक व्यवस्थित और उपयोगी हो सके।
मृत रैयतों की जमाबंदी में जुड़ेंगे उत्तराधिकारी
अभियान में केवल गलत या अधूरी जमाबंदी ठीक करने पर ही जोर नहीं है। मृत जमाबंदीदारों के मामलों में उत्तराधिकार नामांतरण की प्रक्रिया को भी तेज करने का निर्देश दिया गया है।
अंचल स्तर पर पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से वंशावली प्राप्त करने की पहल की जाएगी। इसके आधार पर वैध उत्तराधिकारियों के नाम जमाबंदी में दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
यदि उत्तराधिकारियों के बीच आपसी बंटवारा नहीं हुआ है, तो सभी वैध उत्तराधिकारियों के नाम से जमाबंदी अद्यतन करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए भी अनावश्यक रूप से आवेदन की प्रतीक्षा नहीं करने को कहा गया है।
अंचल अधिकारी खुद करेंगे रोजाना मॉनिटरिंग
सचिव जय सिंह ने अंचल अधिकारियों को केवल कर्मचारियों के भरोसे अभियान नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है।
अधिकारियों को अपने लॉगिन में उपलब्ध जमाबंदियों की प्रगति पर नजर रखनी होगी। कितनी जमाबंदियों का सत्यापन हुआ, कितनी में सुधार किया गया और कितने मामले अभी लंबित हैं, इसकी जानकारी नियमित रूप से रखनी होगी।
अभियान की प्रगति की निगरानी हल्का स्तर से लेकर अंचल स्तर तक करने पर जोर दिया गया है। 31 अक्टूबर की समय-सीमा को देखते हुए विभाग ने अधिकारियों से काम में तेजी लाने को कहा है।
अभियान बसेरा के आवेदनों पर भी निर्देश
समीक्षा बैठक में अभियान बसेरा की भी समीक्षा की गई। सचिव ने निर्देश दिया कि वासभूमि के लिए अंचल कार्यालय पहुंचने वाले पात्र भूमिहीन लाभुकों का आवेदन अनिवार्य रूप से लिया जाए।
किसी पात्र लाभुक को आवेदन देने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। लाभुकों को आवेदन के लिए पटना या विभागीय मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं है।
अंचल कार्यालय के साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है। शिविरों में प्राप्त आवेदनों को ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए दर्ज कर उनके निष्पादन की कार्रवाई की जाएगी।
भू-अभिलेखों की स्कैनिंग भी प्राथमिकता में
समीक्षा के दौरान भू-अभिलेखों की स्कैनिंग को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिया गया।
सभी अंचल अधिकारियों को अपने क्षेत्र में बचे हुए भू-अभिलेखों की स्कैनिंग प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराने को कहा गया है। विभाग पहले से ऑनलाइन भू-अभिलेख उपलब्ध कराने की व्यवस्था चला रहा है।
बिहार भूमि एवं राजस्व विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन जमाबंदी, परिमार्जन प्लस, ई-मापी और भू-अभिलेख जैसी कई सेवाएं उपलब्ध हैं। ऑनलाइन जमाबंदी में किसी त्रुटि की स्थिति में नागरिकों के लिए परिमार्जन से संबंधित ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध है।
इन राजस्व कार्यों की भी हुई समीक्षा
पटना में हुई समीक्षा बैठक में सिर्फ जमाबंदी सुधार की स्थिति ही नहीं देखी गई। दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी, जमाबंदी वेरिफिकेशन, लॉक-अनलॉक और सरकारी जमीन की पहचान जैसे कार्यों की भी समीक्षा हुई।
इसके अलावा जरूरत के अनुसार अनस्कैन्ड भू-अभिलेख उपलब्ध कराने और अन्य लंबित राजस्व कार्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
सचिव ने अधिकारियों से कहा कि जहां आवश्यक मूल अभिलेख उपलब्ध हैं, वहां केवल अतिरिक्त कागजात के इंतजार में मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए।
बिहार जमाबंदी सुधार की मुख्य बातें
- अभियान की अवधि: 15 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026
- अंतिम समय-सीमा: 31 अक्टूबर 2026
- किसकी जमाबंदी: अधूरी और त्रुटिपूर्ण जमाबंदियां
- सुधार का आधार: मूल भू-अभिलेख
- क्या आवेदन जरूरी है: विभाग द्वारा चिह्नित मामलों में रैयत के आवेदन का इंतजार नहीं किया जाएगा
- जांच: रकबा, खाता, खेसरा और अन्य रिकॉर्ड का सत्यापन
- उत्तराधिकार: मृत रैयतों के वैध उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करने की कार्रवाई
- मॉनिटरिंग: अंचल अधिकारियों को नियमित प्रगति की समीक्षा करनी होगी
- अन्य प्राथमिकता: भू-अभिलेखों की स्कैनिंग और डिजिटल रिकॉर्ड को अपडेट करना
इस अभियान के जरिए विभाग अंचल अधिकारियों के लॉगिन में उपलब्ध अधूरी और त्रुटिपूर्ण जमाबंदियों को निर्धारित समय में दुरुस्त करने पर जोर दे रहा है। जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े लोगों के लिए 31 अक्टूबर की समय-सीमा और बिना आवेदन सुधार की यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
