बिहार बाढ़ राहत की दूसरी किस्त जारी, खाते में आएंगे ₹7,000

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बिहार बाढ़ राहत की दूसरी किस्त जारी, खाते में आएंगे ₹7,000

बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए राहत राशि जारी करने का सिलसिला आगे बढ़ा है। बिहार बाढ़ राहत की दूसरी किस्त के तहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 1,60,201 बाढ़ पीड़ित परिवारों के बैंक खातों में 112.14 करोड़ रुपये की सहायता भेजी। इस चरण में प्रत्येक पात्र परिवार को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 7,000 रुपये दिए गए। बिहार बाढ़ राहत योजना के तहत अब तक कुल 10,37,391 परिवारों को 726.17 करोड़ रुपये की सहायता मिल चुकी है। सरकार ने शेष पात्र परिवारों तक मदद पहुंचाने और बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

बिहार बाढ़ राहत की दूसरी किस्त में कितने परिवारों को मिले पैसे?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दूसरे चरण में 1 लाख 60 हजार 201 बाढ़ प्रभावित परिवारों के खातों में राहत राशि हस्तांतरित की। इस मद में कुल 112.14 करोड़ रुपये जारी किए गए।

सरकार के अनुसार, प्रत्येक परिवार के लिए 7,000 रुपये की दर निर्धारित है। राशि सीधे बैंक खाते में भेजने के लिए DBT व्यवस्था अपनाई गई है, जिससे सहायता लाभार्थियों तक पहुंचाई जा सके।

बाढ़ के कारण घर, घरेलू सामान और आजीविका को नुकसान झेलने वाले परिवारों के लिए यह राशि तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकती है। हालांकि, सहायता की वास्तविक उपयोगिता परिवारों को हुए नुकसान और उनकी जरूरतों पर निर्भर करेगी।

पहली और दूसरी किस्त में कितनी राशि जारी हुई?

बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए दो चरणों में सहायता राशि हस्तांतरित की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले चरण में 15 सितंबर 2026 को राशि जारी की गई थी।

दोनों चरणों का विवरण इस प्रकार है:

विवरण      परिवारों की संख्याजारी राशि
पहली किस्त8,77,190                 ₹614.03 करोड़
दूसरी किस्त1,60,201₹112.14 करोड़
कुल10,37,391₹726.17 करोड़

इन आंकड़ों के अनुसार, अब तक 10.37 लाख से अधिक बाढ़ प्रभावित परिवारों को सहायता दी जा चुकी है। सरकार का कहना है कि पात्र परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।

खाते में ₹7,000 नहीं आए तो क्या करें?

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सहायता से वंचित पात्र परिवारों की पहचान करें। उनका जोर इस बात पर है कि कोई भी पात्र परिवार सरकारी राहत से वंचित न रहे।

अगर किसी प्रभावित परिवार को अब तक राशि नहीं मिली है, तो उसे सबसे पहले अपने जिले के संबंधित प्रशासनिक कार्यालय या आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों से जानकारी लेनी चाहिए।

लाभार्थी को अपने आवेदन या पंजीकरण से संबंधित विवरण और बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध रखनी चाहिए। अधिकारी पात्रता, दर्ज विवरण और भुगतान की स्थिति की जांच कर सकते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहने से हर व्यक्ति स्वतः इस सहायता का पात्र साबित नहीं होता। राहत पाने के लिए संबंधित सरकारी मानदंडों और पात्रता की पुष्टि जरूरी है।

बाढ़ प्रभावित किसानों को कब मिलेगा कृषि इनपुट अनुदान?

बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए भी सरकार ने सहायता की घोषणा की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फसल क्षति के लिए कृषि इनपुट अनुदान की राशि 14 अक्टूबर 2026 को दशहरा से पहले उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

इस सहायता का उद्देश्य बाढ़ के कारण फसलों को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को राहत देना है। कृषि इनपुट अनुदान की पात्रता, राशि और भुगतान की स्थिति संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होगी।

किसानों को अपनी फसल क्षति से संबंधित जानकारी और जरूरी दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। भुगतान की तारीख या पात्रता से जुड़ी जानकारी के लिए कृषि विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचना देखना उचित होगा।

दिवाली से पहले सड़कों की मरम्मत का निर्देश

बाढ़ के बाद कई इलाकों में सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इससे लोगों को आवागमन, बाजार तक पहुंच और रोजमर्रा के कामों में परेशानी हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को क्षतिग्रस्त सड़कों और दूसरी आधारभूत सुविधाओं की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराने का निर्देश दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार इन कार्यों को दिवाली से पहले पूरा करने पर जोर दे रही है।

मरम्मत कार्य समय पर पूरा होने से प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन बेहतर बनाने और सामान्य गतिविधियां बहाल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अलग-अलग जिलों में काम की प्रगति और पूरा होने की स्थिति स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

बिहार में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान पर जोर

राहत राशि देने के साथ सरकार ने भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम करने की आवश्यकता जताई है।

बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का असर घरों, खेती, सड़कों और स्थानीय आजीविका पर पड़ सकता है। ऐसे में तत्काल आर्थिक सहायता के साथ जल निकासी, तटबंधों की देखरेख, प्रभावित आधारभूत संरचनाओं की मरम्मत और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण हैं।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान तलाशने पर जोर दिया है। इसके लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, विभागों के बीच समन्वय और स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम करना अहम होगा।

कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद?

राहत राशि हस्तांतरण से जुड़े कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव और आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा उपस्थित रहे।

इसके अलावा मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल तथा पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल सहित अन्य अधिकारी भी शामिल हुए। सभी जिलों के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े थे।

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