बिहार बाढ़: पटना समेत 6 जिलों में हालात बिगड़े, 41 टीमें तैनात
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार बाढ़ ने एक बार फिर राज्य के कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिहार बाढ़ का सबसे ज्यादा असर गंडक नदी के आसपास के इलाकों में दिखाई दे रहा है। पटना के दियारा क्षेत्र से लेकर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली और मुजफ्फरपुर तक प्रशासन ने राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया है।
गंडक नदी में पानी बढ़ने और कई स्थानों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचने के बाद स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा राहत बल की 41 टीमें तैनात की गई हैं। इनमें NDRF की 14 और SDRF की 27 टीमें शामिल हैं।
गंडक के बढ़ते पानी से कई जिलों में परेशानी
गंगा और कोसी के बाद अब गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर उत्तर बिहार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पूर्वी और पश्चिम चंपारण के साथ गोपालगंज, सारण और वैशाली के कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
पिछले कुछ दिनों में गंडक के तटबंधों पर दबाव बढ़ा है। कई स्थानों पर तटबंध टूटने की घटनाओं के बाद निचले इलाकों में पानी तेजी से फैलने की खबर है।
ताजा रिपोर्टों में सारण और मुजफ्फरपुर में तटबंध टूटने तथा कई इलाकों में जलभराव की जानकारी सामने आई है। कुछ जगहों पर बाढ़ का पानी सड़क और राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया है।
पटना जिले के दियारा इलाकों में भी पानी बढ़ने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है। घरों में पानी घुसने के कारण कई परिवार सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
41 टीमें संभाल रहीं राहत और बचाव का मोर्चा
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए NDRF और SDRF की कुल 41 टीमें राहत एवं बचाव अभियान में लगाई गई हैं। इन टीमों का मुख्य उद्देश्य प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और जरूरत के अनुसार राहत पहुंचाना है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले भी बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में NDRF और SDRF की टीमें तैनात की जाती रही हैं।
बाढ़ के बीच सबसे बड़ी जरूरत भोजन, दवाइयों, पीने के पानी और पशुओं के चारे की है। कई प्रभावित परिवार अपना जरूरी सामान लेकर बांधों और ऊंचे स्थानों पर पहुंच रहे हैं।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए खुले स्थानों या अस्थायी टेंट में रहना चुनौती बना हुआ है। प्रशासन की कोशिश है कि राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के जरिए प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान समय पर पहुंचाया जाए।
सीएम सम्राट चौधरी ने राहत कार्यों की समीक्षा की
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील जिलों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली और मुजफ्फरपुर के जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव कार्य पूरी तत्परता से चलाने का निर्देश दिया।
इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे भी कर चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों से तटबंधों और निचले इलाकों पर विशेष निगरानी रखने तथा राहत कार्यों में तेजी लाने को कहा था।
राहत सामग्री में चूड़ा, चना, सत्तू और ORS शामिल
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में तैयार किए जा रहे सूखा राशन पैकेजिंग सेंटर का निरीक्षण किया।
उन्होंने पैकेट में रखी जा रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और पैकिंग व्यवस्था की जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि राहत सामग्री के वितरण में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
राहत पैकेट में चूड़ा, चना, सत्तू, चीनी, मसाला, ORS, माचिस, मोमबत्ती और जरूरत की अन्य सामग्री रखी जा रही है।
बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए एयरफोर्स के दो हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल की भी तैयारी की गई है। मुख्यमंत्री ने जरूरतमंद परिवारों तक समय पर भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने पर जोर दिया है।
गंगा और दूसरी नदियों का जलस्तर भी बढ़ा
बिहार में बाढ़ का संकट केवल गंडक नदी तक सीमित नहीं है। गंगा, कोसी, बागमती और दूसरी नदियों के जलस्तर पर भी प्रशासन लगातार नजर रख रहा है।
पटना में गंगा का जलस्तर भी चिंता का कारण बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को गंगा के जलस्तर का जायजा लेते हुए अगले 48 घंटे को महत्वपूर्ण बताया था और तटबंधों की सुरक्षा समेत राहत-बचाव व्यवस्था पर नजर रखने के निर्देश दिए थे।
जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार कई स्थानों पर नदियों के तटबंधों पर दबाव की स्थिति बनी हुई है। गंडक क्षेत्र में पानी के असामान्य रूप से बढ़ने से प्रशासन की चुनौती और बढ़ गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या?
बाढ़ के बीच प्रभावित परिवारों के सामने केवल घर छोड़ने की समस्या नहीं है। भोजन, पीने का पानी, दवाइयां, पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित आवागमन भी बड़ी चुनौती बन गया है।
कई ग्रामीण इलाकों में घरों में पानी प्रवेश करने से घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन के सामने एक साथ राहत वितरण, लोगों का सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और तटबंधों की निगरानी जैसी कई जिम्मेदारियां हैं।
फिलहाल सरकार और जिला प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और संवेदनशील इलाकों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने पर है। गंडक के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में प्रशासन की निगरानी और राहत अभियान महत्वपूर्ण रहने वाला है।
