बिहार में डेयरी बिजनेस शुरू करने का मौका, जानें ₹8 लाख तक अनुदान की पूरी जानकारी
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पटना: बिहार में गांव में रहकर अपना रोजगार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए डेयरी व्यवसाय एक विकल्प हो सकता है। Bihar Dairy Subsidy Scheme के तहत राज्य सरकार दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए अनुदान देने की योजनाएं चलाती है। Bihar Dairy Subsidy Scheme के अंतर्गत प्रकाशित वित्तीय वर्ष 2025–26 की जानकारी के अनुसार, पात्र आवेदकों को छोटी डेयरी इकाई पर 75 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है।
समग्र गव्य विकास योजना और देशी गौपालन प्रोत्साहन योजना के माध्यम से पशुपालन, दूध उत्पादन और ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इन योजनाओं में पशुओं की संख्या, आवेदक की श्रेणी और निर्धारित शर्तों के अनुसार अनुदान की दर अलग-अलग हो सकती है। आवेदन करने से पहले मौजूदा वित्तीय वर्ष की अधिसूचना जरूर जांचें।
समग्र गव्य विकास योजना में कितना अनुदान मिलता है?
बिहार सरकार की समग्र गव्य विकास योजना का उद्देश्य दुधारू पशुओं की डेयरी इकाइयां स्थापित करने में पशुपालकों की सहायता करना है। योजना के वित्तीय वर्ष 2025–26 के प्रकाशित दस्तावेज के अनुसार, दो और चार दुधारू पशुओं की इकाई के लिए पात्र अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लाभार्थियों को 75 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान था। अन्य वर्गों के लिए यह दर 50 प्रतिशत थी।
वहीं, 15 और 20 उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं की बड़ी इकाई स्थापित करने पर सभी वर्गों के लिए 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान प्रकाशित किया गया था।
यहां ध्यान देना जरूरी है कि अनुदान की दर और वास्तविक राशि अलग-अलग बातें हैं। ₹8 लाख तक अनुदान मिलने का दावा तभी लागू माना जाना चाहिए, जब संबंधित वित्तीय वर्ष की आधिकारिक योजना में उस इकाई के लिए इतनी राशि स्वीकृत हो। पशुओं की खरीद, इकाई की लागत और विभागीय नियमों के आधार पर सहायता की सीमा तय होती है।
देसी गौपालन प्रोत्साहन योजना से भी मिल सकती है मदद
बिहार सरकार देसी गायों की नस्लों को बढ़ावा देने और दूध उत्पादन में वृद्धि करने के लिए देशी गौपालन प्रोत्साहन योजना भी चलाती है। इसके प्रकाशित 2025–26 दस्तावेज में गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी देसी नस्लों की गाय या हिफर की डेयरी इकाई स्थापित करने का प्रावधान दिया गया है।
इस योजना में दो और चार देसी गायों की इकाई पर EBC, SC और ST वर्ग के पात्र लाभार्थियों के लिए 75 प्रतिशत तथा अन्य वर्गों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान की दर प्रकाशित की गई थी। बड़ी इकाई के लिए अलग दर और शर्तें लागू हो सकती हैं।
देसी नस्लों का चयन करते समय केवल सरकारी सहायता पर निर्भर न रहें। पशुओं की सेहत, दूध देने की क्षमता, चारे की उपलब्धता, पशु चिकित्सक की सुविधा और स्थानीय बाजार की मांग का आकलन भी जरूरी है।
कौन कर सकता है आवेदन?
योजना के लिए पात्रता संबंधित वित्तीय वर्ष के दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संभावित आवेदकों को इन शर्तों पर ध्यान देना चाहिए:
आवेदक बिहार का स्थायी निवासी हो।
निर्धारित आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करता हो।
प्रस्तावित डेयरी इकाई के लिए पर्याप्त जमीन या निर्धारित व्यवस्था उपलब्ध हो।
हरा चारा उगाने, पशुओं को रखने और उनकी देखभाल करने की व्यवस्था हो।
आवेदन के समय मांगे गए सभी दस्तावेज सही और वैध हों।
दी गई योजना संबंधी जानकारी में 18 से 55 वर्ष की आयु सीमा का उल्लेख है। चार पशुओं की इकाई के लिए कम से कम 15 डिसमिल और 15–20 पशुओं की इकाई के लिए 30 डिसमिल जमीन की जरूरत बताई गई है। जमीन अपनी या लीज पर हो सकती है, लेकिन इन शर्तों की मौजूदा अधिसूचना से पुष्टि करें।
प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों, दुग्ध सहकारी समिति के सदस्यों और जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को चयन में प्राथमिकता मिल सकती है। प्राथमिकता मिलने का अर्थ स्वतः अनुदान स्वीकृत होना नहीं है।
आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
आवेदन करने से पहले जरूरी कागजात तैयार रखना उपयोगी होगा। उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार, निम्न दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:
आधार कार्ड
बिहार का निवास प्रमाण पत्र
आरक्षित वर्ग के आवेदकों के लिए जाति प्रमाण पत्र
बैंक पासबुक की प्रति
जमीन से जुड़े कागजात, जैसे LPC, लगान रसीद या वैध लीज एग्रीमेंट
पासपोर्ट साइज फोटो
मांगे जाने पर पशुपालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र
दस्तावेजों की सूची योजना और आवेदन की श्रेणी के अनुसार बदल सकती है। इसलिए आवेदन फॉर्म भरते समय आधिकारिक पोर्टल पर दी गई नवीनतम सूची को ही अंतिम मानें।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
बिहार सरकार के गव्य विकास निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट dairy.bihar.gov.in पर जाकर योजनाओं और आवेदन संबंधी सूचनाओं की जांच की जा सकती है। वेबसाइट पर योजना, विज्ञापन और विभागीय संपर्क से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार हो सकती है:
आधिकारिक वेबसाइट खोलें और संबंधित योजना का नवीनतम विज्ञापन पढ़ें।
आवेदन शुरू होने की तारीख और अंतिम तारीख की पुष्टि करें।
पोर्टल पर उपलब्ध आवेदन लिंक के माध्यम से मांगी गई जानकारी भरें।
जरूरी दस्तावेज निर्देशानुसार अपलोड करें और आवेदन जमा करें।
आवेदन संख्या या पावती सुरक्षित रखें, ताकि आगे स्थिति की जानकारी ली जा सके।
आवेदन जमा करने के बाद विभागीय अधिकारी दस्तावेजों और प्रस्तावित स्थल का सत्यापन कर सकते हैं। अंतिम चयन और अनुदान की स्वीकृति विभागीय नियमों, उपलब्ध बजट तथा निर्धारित प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। बैंक ऋण की आवश्यकता होने पर बैंक की अलग शर्तें भी लागू हो सकती हैं।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
डेयरी व्यवसाय शुरू करने से पहले कुल लागत का हिसाब लगाना जरूरी है। पशुओं की खरीद के अलावा शेड निर्माण, चारा, पानी, दवाइयों, टीकाकरण, बीमा और मजदूरी पर भी खर्च हो सकता है। दूध बेचने के लिए स्थानीय बाजार या दुग्ध सहकारी समिति से संपर्क करना भी उपयोगी रहेगा।
सबसे अहम बात यह है कि अनुदान को पहले से मिलने वाली निश्चित रकम न मानें। योजना की पात्रता, आवेदन की उपलब्धता, चयन और स्वीकृति की पुष्टि संबंधित विभाग से करें। बिहार के गव्य विकास निदेशालय की वेबसाइट पर दिए गए संपर्क विवरण के अनुसार, पूछताछ के लिए 9471007445 नंबर भी उपलब्ध है।
