बेगूसराय में 25 हजार की घूस, खिड़की से फेंके नोट फिर भी पकड़े गए
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बेगूसराय में रिश्वत के एक मामले में निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रिश्वत लेने के आरोप में सेल टैक्स कार्यालय के सहायक कर आयुक्त प्रकाश चंद्र मोहन और डाटा एंट्री ऑपरेटर संतोष कुमार झा को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि जीएसटी राशि के समायोजन के बदले व्यवसायी से रकम मांगी गई थी।
निगरानी विभाग के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 25 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई। बताया गया कि सहायक कर आयुक्त ने टीम की भनक लगने के बाद कथित तौर पर रकम कार्यालय की खिड़की से बाहर फेंक दी, लेकिन निगरानी टीम ने उसे बरामद कर लिया।
जीएसटी समायोजन के बदले मांगे गए थे 50 हजार
मामला बेगूसराय के सेल टैक्स कार्यालय से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उलाव निवासी कपड़ा व्यवसायी ज्योति कुमार ने निगरानी विभाग में शिकायत की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि करीब साढ़े तीन लाख रुपये के जीएसटी कर के समायोजन के लिए सहायक कर आयुक्त और डाटा एंट्री ऑपरेटर की ओर से 50 हजार रुपये की मांग की गई थी।
व्यवसायी ने कथित तौर पर पूरी रकम देने के बजाय 25 हजार रुपये देने पर सहमति जताई और इसकी सूचना निगरानी विभाग को दी। शिकायत के आधार पर विभाग ने आगे की कार्रवाई की योजना बनाई।
निगरानी टीम ने पहले की शिकायत की जांच
शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 5 अक्टूबर 2026 को मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। टीम ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की।
योजना के तहत व्यवसायी को चिह्नित नोटों की गड्डी उपलब्ध कराई गई। इसके बाद निगरानी टीम ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी।
बताया गया कि व्यवसायी ने डाटा एंट्री ऑपरेटर संतोष झा के माध्यम से कथित रिश्वत की रकम सहायक कर आयुक्त प्रकाश चंद्र मोहन तक पहुंचाई।
खिड़की से फेंक दी गई रकम, फिर भी बरामद
निगरानी विभाग की कार्रवाई के दौरान मामला उस समय दिलचस्प हो गया, जब कथित तौर पर सहायक कर आयुक्त को टीम की कार्रवाई की भनक लग गई।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने रिश्वत की रकम कार्यालय की खिड़की से बाहर फेंक दी। हालांकि, निगरानी टीम ने मौके पर रकम बरामद कर ली।
रकम बरामद होने के बाद निगरानी अधिकारियों ने सहायक कर आयुक्त प्रकाश चंद्र मोहन और डाटा एंट्री ऑपरेटर संतोष कुमार झा को हिरासत में ले लिया। दोनों से मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है।
बेगूसराय सेल टैक्स कार्यालय में मचा हड़कंप
निगरानी विभाग की कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद बेगूसराय के सेल टैक्स कार्यालय में हड़कंप की स्थिति बन गई। कार्रवाई के दौरान विभाग की टीम ने मामले से जुड़े तथ्यों और कथित रिश्वत लेनदेन की जांच की।
इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करना होता है। हालांकि, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
फिलहाल निगरानी विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और कार्रवाई से जुड़े साक्ष्यों को भी देखा जा रहा है।
अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी
कार्रवाई के बाद निगरानी विभाग की टीम ने सहायक कर आयुक्त प्रकाश चंद्र मोहन के आवास और उनसे संबंधित अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी शुरू की।
छापेमारी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आ सकती है। निगरानी टीम मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
इस जांच में कथित रिश्वत की मांग, रकम के लेनदेन और जीएसटी समायोजन से संबंधित प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।
निगरानी डीएसपी ने कही विधि-सम्मत कार्रवाई की बात
निगरानी विभाग के डीएसपी सतीश चंद्र माधव के अनुसार, मामले की जांच पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, शिकायत के आधार पर ट्रैप कार्रवाई की गई और इसमें 25 हजार रुपये की रकम बरामद हुई। अब जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों की भूमिका, कथित रिश्वत की मांग और जीएसटी समायोजन से जुड़े आरोपों की जांच जारी है।
क्या है पूरा मामला?
संक्षेप में पूरा घटनाक्रम इस तरह समझें:
व्यवसायी ने जीएसटी समायोजन से जुड़ी शिकायत की।
आरोप के मुताबिक 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई।
व्यवसायी 25 हजार रुपये देने पर सहमत हुआ।
शिकायत के बाद निगरानी विभाग ने ट्रैप की कार्रवाई की।
चिह्नित नोटों के जरिए कथित रिश्वत का लेनदेन कराया गया।
कार्रवाई के दौरान रकम बरामद की गई।
सहायक कर आयुक्त और डाटा एंट्री ऑपरेटर को गिरफ्तार किया गया।
संबंधित ठिकानों पर छापेमारी और आगे की जांच जारी है।
यह कार्रवाई सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर निगरानी विभाग की सक्रियता को भी सामने लाती है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
