बिहार का अगला DGP कौन? प्रीता वर्मा समेत कई IPS अधिकारी रेस में

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें

 

बिहार का अगला DGP कौन?

बिहार का अगला DGP कौन होगा, इसे लेकर पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज है। बिहार का अगला DGP चुनने की प्रक्रिया में वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और पुलिस नेतृत्व का अनुभव अहम माना जा रहा है। फिलहाल 1991 बैच की IPS अधिकारी प्रीता एस. वर्मा पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं। उनके अलावा कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी संभावित दावेदारों के रूप में सामने आए हैं। हालांकि, अभी किसी अधिकारी की नियमित नियुक्ति को अंतिम रूप दिए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रीता वर्मा के पास फिलहाल DGP का अतिरिक्त प्रभार

बिहार के पूर्व DGP विनय कुमार के पद छोड़ने के बाद राज्य सरकार ने प्रीता वर्मा को पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। गृह विभाग के 5 अक्टूबर 2026 के आदेश के मुताबिक, वह अगले आदेश तक यह जिम्मेदारी संभालेंगी।

प्रीता वर्मा 1991 बैच की IPS अधिकारी हैं। वह बिहार गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाओं की महानिदेशक भी रह चुकी हैं। वरिष्ठता के कारण उनका नाम नियमित DGP पद के संभावित उम्मीदवारों में शामिल है।

यदि सरकार उन्हें नियमित DGP नियुक्त करती है, तो वह बिहार की पहली पूर्णकालिक महिला पुलिस महानिदेशक बन सकती हैं। फिलहाल इसे संभावना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि अंतिम फैसला निर्धारित चयन प्रक्रिया के बाद होगा।

भृगु श्रीनिवासन और जितेंद्र सिंह गंगवार के नाम भी चर्चा में

भृगु श्रीनिवासन 1992 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी हैं। वह बिहार में विभिन्न पुलिस जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) से भी जुड़े रहे हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनाती और बिहार में उनकी उपलब्धता जैसे पहलू चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

दूसरी ओर, जितेंद्र सिंह गंगवार 1993 बैच के IPS अधिकारी हैं। उन्हें बिहार में पुलिस मुख्यालय और सतर्कता अन्वेषण ब्यूरो सहित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का अनुभव रहा है। उनका प्रशासनिक अनुभव भी संभावित दावेदारी के संदर्भ में चर्चा में है।

हालांकि, किसी अधिकारी का वरिष्ठ बैच या महत्वपूर्ण पदों पर काम करना अपने आप में नियुक्ति की गारंटी नहीं है। अंतिम चयन निर्धारित पात्रता और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

जितेंद्र कुमार और कुंदन कृष्णन भी संभावित दावेदार

1993 बैच के IPS अधिकारी जितेंद्र कुमार का नाम भी बिहार के अगले DGP के संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताया गया है। उन्हें रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के महानिदेशक पद की जिम्मेदारी दिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। ऐसे में उनकी वर्तमान तैनाती और उपलब्धता को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

वहीं, कुंदन कृष्णन 1994 बैच के IPS अधिकारी हैं। उन्हें बिहार में लंबे समय तक काम करने और ऑपरेशनल पुलिसिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव है। वह पटना में वरिष्ठ पुलिस पदों के साथ विशेष कार्यबल (STF) और विशेष शाखा से संबंधित भूमिकाओं में भी रह चुके हैं।

कुंदन कृष्णन का नाम चर्चा में ऐसे समय आया है, जब उनकी भूमिका को लेकर राजद सांसद सुधाकर सिंह के साथ सार्वजनिक विवाद भी सामने आया। यह विवाद भोजपुर के बिलौटी गांव में भारत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले से जुड़ा है।

सुधाकर सिंह ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद कानूनी नोटिस और जवाबी पत्राचार की खबरें सामने आईं। इन आरोपों और दावों को किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए; मामले में संबंधित पक्षों के बयानों और जांच की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।

अरविंद कुमार, निर्मल कुमार आजाद और अनुपमा नीलेकर के नाम

संभावित नामों की चर्चा में 1993 बैच के IPS अधिकारी अरविंद कुमार का नाम भी आया है। वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और उनकी सेवा अवधि से जुड़ी स्थिति उनकी संभावित दावेदारी को प्रभावित कर सकती है।

1994 बैच के IPS अधिकारी निर्मल कुमार आजाद को बिहार में पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) की जिम्मेदारी दी गई है। उनके नाम का उल्लेख भी संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में हुआ है, हालांकि अंतिम पैनल में शामिल होने की पुष्टि जरूरी है।

इसी बैच की अनुपमा नीलेकर चंद्रा को जनवरी 2026 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में महानिदेशक (जांच) नियुक्त किए जाने की मंजूरी की खबर सामने आई थी। इसके अलावा परेश सक्सेना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का भी उल्लेख हुआ है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि मीडिया रिपोर्टों में संभावित उम्मीदवारों की सूची अलग-अलग हो सकती है। इसलिए चर्चा में आए सभी नामों को आधिकारिक रूप से शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवार मानना सही नहीं होगा।

बिहार में स्थायी DGP की नियुक्ति कैसे होती है?

स्थायी DGP की नियुक्ति केवल राज्य सरकार द्वारा किसी अधिकारी को चुन लेने से पूरी नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के तहत चयन प्रक्रिया में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की महत्वपूर्ण भूमिका है।

आमतौर पर राज्य सरकार पात्र वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम और आवश्यक सेवा विवरण UPSC को भेजती है। अधिकारियों की वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, पुलिस बल का नेतृत्व करने का अनुभव और निर्धारित पात्रता जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है।

इसके बाद UPSC तय मानकों के अनुसार पैनल तैयार करता है और उसे राज्य सरकार को भेजता है। पारंपरिक प्रक्रिया में पैनल में तीन अधिकारियों के नाम शामिल किए जाते हैं। राज्य सरकार निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनमें से एक अधिकारी को नियमित DGP नियुक्त करती है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य नियुक्ति में तय मानकों और संस्थागत प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना है। हालांकि, पात्रता और पैनल से जुड़े नियमों में न्यायालय के निर्देशों तथा लागू व्यवस्था के अनुसार बदलाव या स्पष्टीकरण हो सकते हैं।

कब होगा बिहार के नए DGP के नाम का ऐलान?

फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि बिहार सरकार स्थायी DGP की नियुक्ति कब तक करेगी। प्रीता वर्मा के पास अतिरिक्त प्रभार है, जबकि अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नामों को लेकर चर्चा जारी है।

नियुक्ति की समय-सीमा और अंतिम नाम को लेकर आधिकारिक घोषणा सामने आने तक किसी एक अधिकारी को अगला DGP मानना जल्दबाजी होगी। राज्य सरकार और UPSC की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस के बीच नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चयन प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और नियमित DGP के रूप में किस अधिकारी की नियुक्ति होती है।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1