औरंगाबाद में CID अधिकारी बनकर 25 लाख की ठगी, पत्थर थमाकर फरार हुए बदमाश

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औरंगाबाद में CID अधिकारी बनकर 25 लाख की ठगी, पत्थर थमाकर फरार हुए बदमाश

बिहार के औरंगाबाद में ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां तीन बदमाशों ने खुद को सीआईडी अधिकारी बताकर जेवर व्यवसायी रघुनंदन साव से करीब 25 लाख रुपये के सोने के गहने ठग लिए। औरंगाबाद में सीआईडी अधिकारी बनकर ठगी करने वाले आरोपियों ने कार्रवाई और जुर्माने का डर दिखाया, फिर सोने की चेन और अंगूठी लेकर उनकी जगह पत्थर से भरी पोटली थमा दी। वारदात के बाद तीनों मौके से फरार हो गए।

घटना शहर के महाराजगंज रोड इलाके की बताई जा रही है। पीड़ित के अनुसार, ठगों ने इतनी तेजी से पूरी वारदात को अंजाम दिया कि उन्हें आसपास मौजूद परिजनों को सूचना देने तक का मौका नहीं मिला। बाद में जब उन्होंने पोटली खोलकर देखी, तो उसमें सोने के जेवरों की जगह पत्थर मिले।

चेन छिनतई का डर दिखाकर व्यवसायी को बनाया निशाना

पीड़ित रघुनंदन साव ने बताया कि वह अपने घर के पास टहल रहे थे। इसी दौरान दो बाइक पर सवार होकर तीन लोग वहां पहुंचे। उन्होंने खुद को सीआईडी अधिकारी बताया और इलाके में चेन छिनतई की घटनाओं का जिक्र करते हुए व्यवसायी से पूछताछ शुरू कर दी।

आरोपियों ने कथित तौर पर रघुनंदन साव पर लूटे गए जेवर खरीदने का आरोप लगाया। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का डर दिखाया। इसी बहाने उन्होंने व्यवसायी से शरीर पर पहने सोने के गहने उतारने को कहा।

अचानक पुलिसिया रौब और कार्रवाई की धमकी से व्यवसायी उनके झांसे में आ गए। उन्होंने करीब 110 ग्राम वजन की सोने की चेन और 35 ग्राम की सोने की अंगूठी उतार दी। इस तरह ठगे गए गहनों का कुल वजन लगभग 145 ग्राम बताया गया है।

हाथ की सफाई से बदली पोटली, सोने की जगह मिले पत्थर

ठगों ने भरोसा जीतने के लिए एक चाल चली। एक आरोपी ने पहले अपनी चेन उतारी और उसे रुमाल में रखने का नाटक किया। इससे व्यवसायी को लगा कि सामने मौजूद लोग वास्तव में किसी आधिकारिक जांच की प्रक्रिया अपना रहे हैं।

इसके बाद आरोपियों ने रघुनंदन साव के गहनों को कागज में लपेटकर रुमाल में बांध दिया। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर हाथ की सफाई से जेवरों वाला रुमाल बदल दिया और उसकी जगह पत्थर बंधी पोटली व्यवसायी की जेब में रख दी।

वारदात पूरी होते ही तीनों आरोपी वहां से निकल गए। कुछ देर बाद जब व्यवसायी ने रुमाल खोलकर देखा, तो उनके होश उड़ गए। सोने के गहनों की जगह पत्थर देखकर उन्हें ठगी का एहसास हुआ। गहनों की अनुमानित कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है।

महाराजगंज रोड पर हुई वारदात, परिवार के पास भी नहीं पहुंची सूचना

रघुनंदन साव शहर के जाने-माने जेवर व्यवसायियों में गिने जाते हैं। स्थानीय लोग उन्हें रघुनंदन सेठ के नाम से जानते हैं। उनका घर महाराजगंज रोड स्थित पवई कोठी के आसपास है। इसी इलाके में उनके परिवार के सदस्य अलग-अलग व्यवसाय भी करते हैं।

घटनास्थल के पास चंद्रा मशीनरी नाम की दुकान है, जिसका संचालन उनके पुत्र अजीत चंद्रा करते हैं। अजीत चंद्रा रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

पीड़ित का कहना है कि ठगों ने इतनी तेजी और चालाकी से घटना को अंजाम दिया कि उन्हें कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। आरोपियों ने पहले डर का माहौल बनाया और फिर इसी का फायदा उठाकर गहने लेकर फरार हो गए।

प्राथमिकी दर्ज, सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की तलाश

घटना के बाद रघुनंदन साव ने औरंगाबाद नगर थाने में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा के मुताबिक, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस आरोपियों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों का पता लगाने में जुटी है।

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी भी की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खबर लिखे जाने तक आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।

अब पुलिस के सामने तीनों आरोपियों की पहचान करना, उनके भागने के रास्ते का पता लगाना और ठगे गए गहनों की बरामदगी करना प्रमुख चुनौती है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य अहम साबित हो सकते हैं।

औरंगाबाद में पहले भी सामने आ चुके हैं जेवर ठगी के मामले

औरंगाबाद जिले में इस तरह की ठगी की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, कुछ महीने पहले कुटुंबा में भी झांसा देकर लाखों रुपये के जेवर ठग लिए गए थे। उस मामले में कई आरोपियों को पकड़े जाने की बात सामने आई थी, जबकि अन्य घटनाओं में शामिल लोगों की तलाश जारी रही।

ताजा घटना के बाद शहर के व्यापारियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों ने पुलिस से आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने और ऐसी वारदातों पर रोक लगाने की मांग की है।

ऐसी ठगी से कैसे बचें?

इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं:

  • पहचान की पुष्टि करें: कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या सीआईडी अधिकारी बताए, तो उसका पहचान पत्र और संबंधित थाने से पुष्टि करें।

  • डर में आकर गहने न उतारें: जुर्माने या गिरफ्तारी की धमकी मिलने पर तुरंत भरोसा न करें।

  • पोटली या रुमाल में जेवर न सौंपें: किसी अनजान व्यक्ति को गहने देकर जांच कराने से बचें।

  • परिजनों को सूचना दें: संदिग्ध स्थिति में आसपास के लोगों या परिवार के सदस्य को तुरंत बुलाएं।

  • पुलिस को सूचना दें: ठगी की आशंका होने पर स्थानीय पुलिस से संपर्क करें और उपलब्ध जानकारी साझा करें।

औरंगाबाद की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ठग सरकारी अधिकारी होने का दिखावा करके लोगों को निशाना बना सकते हैं। इसलिए किसी की वर्दी, रौब या धमकी के बजाय उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है।

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