Supaul DTO: ₹15 हजार रिश्वत लेते डेटा ऑपरेटर गिरफ्तार, विजिलेंस ने दबोचा
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👉 WhatsApp से जुड़ेंसुपौल DTO कार्यालय में रिश्वत कांड के बाद गुरुवार को हड़कंप मच गया। सुपौल DTO कार्यालय में रिश्वत कांड उस समय सामने आया, जब विजिलेंस की टीम ने डेटा एंट्री ऑपरेटर नंदलाल कुमार को कथित तौर पर ₹15 हजार लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई जिला मुख्यालय स्थित डीटीओ कार्यालय में हुई। विजिलेंस के मुताबिक, एक वाहन के बिहार नंबर में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद यह ट्रैप ऑपरेशन किया गया था। शिकायत की जांच और सत्यापन के बाद टीम ने कार्रवाई की।
शिकायत से शुरू हुई विजिलेंस की कार्रवाई
मामला मधुबनी जिले के ललितग्राम थाना क्षेत्र से जुड़े शिकायतकर्ता मो. अजहर अली की शिकायत के बाद सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपने वाहन का बिहार में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सुपौल डीटीओ कार्यालय में आवेदन किया था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले डेटा एंट्री ऑपरेटर नंदलाल कुमार ने ₹15 हजार की कथित रिश्वत मांगी। इसके बाद अजहर अली ने पटना स्थित विजिलेंस थाना में शिकायत की।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता काफी समय से कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। हालांकि, वाहन और आवेदन से जुड़े विवरणों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में कुछ अंतर है, इसलिए अंतिम तथ्य जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
पहले सत्यापन, फिर बिछाया गया ट्रैप
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने आरोपों का सत्यापन कराया। अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन में रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
गुरुवार को डीएसपी विंध्याचल प्रसाद के नेतृत्व में विजिलेंस की टीम डीटीओ कार्यालय पहुंची। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक टीम में नौ सदस्य शामिल थे।
तय योजना के तहत शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर डेटा ऑपरेटर को ₹15 हजार दिए। इसी दौरान विजिलेंस टीम ने नंदलाल कुमार को राशि स्वीकार करते हुए पकड़ लिया।
विजिलेंस अधिकारियों ने गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अपने कब्जे में लिया और मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
वाहन के बिहार नंबर से जुड़ा था मामला
रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत वाहन के बिहार में रजिस्ट्रेशन या नंबर ट्रांसफर की प्रक्रिया से संबंधित थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि इस काम को आगे बढ़ाने के लिए उससे ₹15 हजार की अवैध राशि मांगी गई।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट इसे महाराष्ट्र नंबर वाली कार के बिहार में रजिस्ट्रेशन से जोड़ती है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में वाहन के पुराने रजिस्ट्रेशन राज्य को अलग तरीके से बताया गया है।
इसलिए वाहन के मूल रजिस्ट्रेशन से जुड़े सटीक विवरण की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के अंतिम निष्कर्ष से ही होगी।
डीटीओ कार्यालय में कार्रवाई से मचा हड़कंप
विजिलेंस टीम की अचानक कार्रवाई से डीटीओ कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों के बीच हलचल मच गई। गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी डेटा ऑपरेटर को अपने साथ ले गई।
विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि तत्काल ट्रैप कार्रवाई में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने नहीं आई है। मामले की आगे की जांच जारी है।
इस कार्रवाई के बाद परिवहन कार्यालयों में होने वाले कामकाज और कथित रिश्वत मांगने की शिकायतों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका के बारे में फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
आरोपी पर आगे क्या कार्रवाई होगी?
गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस विभाग ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक आरोपी को आगे पटना स्थित विशेष विजिलेंस अदालत में पेश किया जाना है।
मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, किसी आरोपी की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
विजिलेंस अब शिकायत, सत्यापन, ट्रैप और बरामद राशि से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट होगा कि कथित रिश्वत मांगने की पूरी परिस्थिति क्या थी।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विजिलेंस ट्रैप
बिहार में विजिलेंस विभाग समय-समय पर सरकारी कार्यालयों में रिश्वत की शिकायतों पर ट्रैप कार्रवाई करता रहा है। सुपौल की यह कार्रवाई भी शिकायत के सत्यापन के बाद की गई ट्रैप कार्रवाई के रूप में सामने आई है।
ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की सूचना, प्रारंभिक सत्यापन और ट्रैप ऑपरेशन जांच प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। सुपौल मामले में भी विजिलेंस ने शिकायत मिलने के बाद पहले सत्यापन किया और फिर कार्रवाई की।
सुपौल DTO मामले की प्रमुख बातें
- स्थान: जिला परिवहन कार्यालय, सुपौल
- आरोपी: नंदलाल कुमार, डेटा एंट्री ऑपरेटर
- कथित रिश्वत: ₹15,000
- शिकायतकर्ता: मो. अजहर अली
- कार्रवाई: विजिलेंस ट्रैप
- नेतृत्व: डीएसपी विंध्याचल प्रसाद
- मामला: वाहन के बिहार रजिस्ट्रेशन/ट्रांसफर से जुड़ी शिकायत
- आगे की प्रक्रिया: कानूनी कार्रवाई और विशेष अदालत में पेशी
