गया जी पहुंचीं स्मिता ठाकरे, बालासाहेब की तस्वीर लेकर किया पिंडदान

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स्मिता ठाकरे गया पिंडदान: पितृपक्ष के मौके पर मंगलवार को गया जी पहुंचीं स्मिता ठाकरे ने अपने पूर्वजों के लिए विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया। स्मिता ठाकरे गया पिंडदान के दौरान अपने ससुर और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर भी साथ लेकर पहुंचीं। गयापाल तीर्थपुरोहित चौधरी जी के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने यह धार्मिक अनुष्ठान पूरा किया। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे, अपने पिता मधुकर चित्रे और अपनी सास की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। इस दौरान वह भावुक भी नजर आईं।

बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर लेकर पहुंचीं स्मिता ठाकरे

गया जी में पिंडदान के दौरान स्मिता ठाकरे के हाथ में बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर नजर आई। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्होंने अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों को याद किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। मीडिया से बातचीत में स्मिता ठाकरे ने कहा कि उनके हाथों से जो कुछ भी हुआ, वह भगवान विष्णु की कृपा से संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से उनकी इच्छा थी कि वह गया जी पहुंचकर अपने पितरों का तर्पण करें। उनके मुताबिक, अब यह इच्छा पूरी होने के बाद वह खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार जीवन में कुछ पितरों को याद करना छूट जाता है, लेकिन गया जी में हुई पूजा के बाद उन्हें विश्वास है कि सभी पितरों को शांति मिली होगी। गया में पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंच रहे हैं। इस वर्ष भी गया जी में पितृपक्ष के धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी है।

सीता मैया की कथा सुनकर बदला पिंडदान को लेकर विचार

स्मिता ठाकरे ने पिंडदान को लेकर अपने अनुभव के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि महिलाएं पिंडदान नहीं करती हैं। बाद में जब उन्होंने गया जी में माता सीता से जुड़ी पिंडदान की कथा सुनी, तो उनका नजरिया बदला। इसके बाद उन्होंने भी अपने पितरों के लिए पिंडदान करने का निर्णय लिया। गया की धार्मिक परंपराओं में माता सीता से जुड़ी पिंडदान की कथा का विशेष उल्लेख मिलता है। गया के सीता कुंड से जुड़ी मान्यता के अनुसार, माता सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था। इसी धार्मिक परंपरा का हवाला देते हुए स्मिता ठाकरे ने कहा कि उन्हें भी पिंडदान करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे के साथ अपने संबंधों को भी याद किया। स्मिता ठाकरे ने कहा कि वह बालासाहेब से काफी प्रभावित रही हैं और उनके विचारों से उन्हें हमेशा प्रेरणा मिली। उनके अनुसार, बालासाहेब ठाकरे ने उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाया और साथ ही दूसरों का सम्मान करने की सीख भी दी।

सनातन और हिंदुत्व को लेकर क्या बोलीं स्मिता ठाकरे?

पिंडदान के बाद स्मिता ठाकरे ने सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने हमेशा समाज सेवा को महत्व दिया है और आगे भी वह इसे जारी रखना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा में सनातन धर्म के प्रति गहरी आस्था थी और वह उसी भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से गया जी पहुंची हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी उन्होंने अपनी राय रखी। स्मिता ठाकरे ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के विचारों का समर्थन करना चाहती हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी हिंदुत्व और सनातन के साथ आगे बढ़ रहे हैं और नई पीढ़ी को सनातन के महत्व के बारे में समझाने का काम कर रहे हैं। यह टिप्पणी स्मिता ठाकरे का व्यक्तिगत राजनीतिक-सामाजिक मत है; इसे उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

बिहार और महाराष्ट्र के रिश्ते को मजबूत करने की बात

गया जी पहुंचीं स्मिता ठाकरे ने बिहार की संस्कृति और यहां के लोगों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उनकी इच्छा थी कि वह बिहार आएं और यहां के लोगों से मिलें। उन्होंने बिहार और महाराष्ट्र के बीच संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा भी जताई। स्मिता ठाकरे ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच पहले से ही कई स्तरों पर जुड़ाव है और इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में बिहार से जुड़े कई प्रशासक काम कर रहे हैं और राज्य के विकास में योगदान दे रहे हैं। उनके बयान में दोनों राज्यों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाने पर जोर दिखाई दिया।

पितृपक्ष में गया जी क्यों खास है?

गया जी में पितृपक्ष के दौरान पिंडदान और तर्पण की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में यहां पहुंचते हैं। 2026 के पितृपक्ष के दौरान भी गया में विभिन्न वेदियों पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के अनुष्ठान चल रहे हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से इन कर्मकांडों को करते हैं। स्मिता ठाकरे की गया जी यात्रा भी इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ी रही। बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर के साथ पिंडदान करते हुए उनकी तस्वीरें और उनका भावुक बयान इस यात्रा को चर्चा में ले आया। 

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