SIR Protest: 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, अनुमति पर भी सवाल
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👉 WhatsApp से जुड़ेंदिल्ली में SIR Protest को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। SIR Protest के तहत 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। आयोजकों ने सुबह 11 बजे जुटने की अपील की है। हालांकि, 30 सितंबर तक दिल्ली पुलिस ने इस प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी है। पुलिस के मुताबिक जंतर-मंतर क्षेत्र में चार से अधिक लोगों के जुटने पर प्रतिबंध लागू है।
प्रदर्शन का मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। आयोजकों का कहना है कि वे चुनावी प्रक्रिया और नागरिकों के मताधिकार से जुड़े सवालों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहते हैं।
2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जुटने का आह्वान
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और अन्य नागरिक समूहों ने 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का कार्यक्रम प्रस्तावित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक आयोजकों ने 28 सितंबर को संसद मार्ग थाने जाकर प्रदर्शन की सूचना दी और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने की बात कही थी।
प्रस्तावित कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू करने की बात कही गई है। इसमें SIR को लेकर सवाल उठाने के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।
प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और अन्य नागरिक कार्यकर्ताओं के इस अभियान से जुड़ने की जानकारी सामने आई है। आयोजकों का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और नागरिक अपनी मांग लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखेंगे।
दिल्ली पुलिस ने अभी तक नहीं दी अनुमति
2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सबसे अहम स्थिति दिल्ली पुलिस की अनुमति से जुड़ी है। 30 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने अब तक प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि जंतर-मंतर क्षेत्र में चार से अधिक लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध है।
इससे पहले 25 सितंबर को भी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन हुआ था। उस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उस प्रदर्शन में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, योगेंद्र यादव, अंजली भारद्वाज, प्रशांत भूषण और दीपांकर भट्टाचार्य समेत 60 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने कहा था कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी।
25 सितंबर की हिरासत का मुद्दा फिर उठा
पिछले प्रदर्शन की कार्रवाई को लेकर आयोजकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले नागरिकों को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक असहमति के अधिकार से जुड़ा सवाल है।
नेहा बोरा ने कहा है कि नागरिकों को मतदान के अधिकार के साथ अपनी असहमति व्यक्त करने का अधिकार भी मिलना चाहिए। आयोजकों के मुताबिक 2 अक्टूबर का प्रदर्शन इसी मुद्दे को सामने रखने का माध्यम है।
हालांकि, 25 सितंबर की कार्रवाई को लेकर पुलिस का पक्ष अलग रहा। पुलिस अधिकारियों ने अनुमति नहीं होने की बात कही थी। इसलिए आगामी प्रदर्शन को लेकर अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
प्रशांत भूषण ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की बात कही
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने SIR से जुड़े विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर जोर दिया है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अदालत में कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह चल सकती है, लेकिन नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सार्वजनिक रूप से भी रख सकते हैं।
उनके अनुसार SIR को लेकर अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया और नागरिकों के विरोध का अधिकार अलग-अलग विषय हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध को लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बताया है।
25 सितंबर के प्रदर्शन में भी प्रशांत भूषण मौजूद थे और उन्हें अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में लिया गया था।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ी प्रमुख मांगें SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से संबंधित हैं।
मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- SIR प्रक्रिया को रोकने या समाप्त करने की मांग।
- SIR से पहले मौजूद मतदाता सूची को बनाए रखने की मांग।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
- चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल।
- नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग।
इन मांगों को प्रदर्शन आयोजकों और उनसे जुड़े समूहों ने सामने रखा है। चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में किसी संस्थागत मतभेद की धारणा को खारिज किया है और कहा है कि संबंधित फैसले आयोग की मंजूरी से लिए गए।
SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों और चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखने वाले समूहों के बीच बहस जारी है।
25 सितंबर को जंतर-मंतर के पास हुए प्रदर्शन में भी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठी थी। इसके बाद 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।
इसी बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने भी विवाद को बढ़ाया। हालांकि आयोग ने निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे संस्थागत मतभेद के दावों को स्वीकार नहीं किया और SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है।
2 अक्टूबर को क्या होगा, अब नजर अनुमति पर
फिलहाल 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर आयोजकों की तैयारी जारी है, लेकिन दिल्ली पुलिस की अनुमति अभी नहीं मिली है। ऐसे में कार्यक्रम का वास्तविक स्वरूप और आयोजन स्थल पर पुलिस की व्यवस्था आगे के निर्णय पर निर्भर करेगी।
आयोजकों ने इसे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन बताया है, जबकि पुलिस ने अनुमति नहीं दिए जाने की स्थिति स्पष्ट की है। अब 2 अक्टूबर को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रदर्शन के लिए औपचारिक अनुमति मिलती है या नहीं।
SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर आगे कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इस पूरे मामले में अदालत, चुनाव आयोग, पुलिस और प्रदर्शन आयोजकों के अगले कदम पर नजर रहेगी।
