सम्राट चौधरी ने प्रशांत किशोर को बताया ‘बेचारा’, बांकीपुर हार पर मानी गलती

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बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी और प्रशांत किशोर के बीच जुबानी टकराव एक बार फिर चर्चा में है। सम्राट चौधरी ने बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार पर पार्टी की गलती स्वीकार की, वहीं प्रशांत किशोर के लगातार हमलों पर उन्हें ‘बेचारा’ कहकर जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी किसी नेता से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी को उनके खिलाफ कोई शिकायत या आरोप है तो वह अदालत का रुख कर सकता है और अंतिम फैसला कोर्ट को ही करना है।

प्रशांत किशोर पर सम्राट चौधरी का बड़ा बयान

न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में सम्राट चौधरी से जब पूछा गया कि बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने उन्हें मुख्य निशाना क्यों बनाया और पूरा चुनाव उनके इर्द-गिर्द क्यों घूमता रहा, तो मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत राजनीति से दूरी की बात कही। सम्राट चौधरी ने कहा कि वह व्यक्तिगत राजनीति में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने प्रशांत किशोर को लेकर कहा कि जो बोलना है, उन्हें बोलने दिया जाए और वह जो करना चाहते हैं, करने दिया जाए। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार की राजनीति में बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे को लेकर बीजेपी और प्रशांत किशोर के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चर्चा में हैं।

कोर्ट जाने की बात पर क्या बोले मुख्यमंत्री?

सम्राट चौधरी ने अपने खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों पर अदालत का रास्ता अपनाने की सलाह दी। उनका कहना था कि अगर किसी के पास उनके खिलाफ कुछ है तो वह कोर्ट जा सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक मामला ले जाने की बात का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी रास्ता अपनाने का अधिकार संविधान देता है। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में फैसला राजनीतिक बहस के बजाय अदालत को करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी को अदालत जाने से नहीं रोका है। उनके मुताबिक, संविधान हर व्यक्ति को कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार देता है और इसमें उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी पर क्या आरोप लगाए?

प्रशांत किशोर ने पिछले कुछ समय में सम्राट चौधरी पर कई तीखे राजनीतिक और व्यक्तिगत हमले किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की शिक्षा, नाम-पहचान और पुराने मामलों से जुड़े आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इनमें सबसे गंभीर आरोपों में से एक 1995 के तारापुर हत्याकांड से जुड़ा रहा है। किशोर ने सम्राट चौधरी पर इस मामले में गंभीर आरोप लगाए और उनकी गिरफ्तारी तथा मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी। हालांकि, ऐसे आरोपों के संदर्भ में यह जरूरी है कि इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाए। किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप अपने आप में न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं होते। प्रशांत किशोर ने इसके अलावा सम्राट चौधरी के नाम, शैक्षणिक योग्यता और चुनावी हलफनामे से जुड़े कथित विरोधाभासों पर भी सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री बनने के आसपास और उसके बाद भी यह राजनीतिक बहस जारी रही।

बांकीपुर में बीजेपी की हार पर सम्राट ने मानी गलती

बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार को लेकर सम्राट चौधरी ने बचाव करने के बजाय पार्टी की जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने माना कि पार्टी से गलती हुई है और इस पर आत्ममंथन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बीजेपी के कार्यकर्ता इस नतीजे को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी संगठन स्तर पर समीक्षा करेगी और जरूरी बदलावों पर काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी सीट पर किसी दूसरे उम्मीदवार की जीत चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह तर्क दिया कि एक विधानसभा सीट का उपचुनाव पूरे बिहार का जनादेश नहीं माना जा सकता।

एक सीट के नतीजे से पूरे बिहार का फैसला नहीं

सम्राट चौधरी ने बिहार के राजनीतिक इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि उपचुनाव के नतीजों को पूरे राज्य के जनादेश से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने 2005 के बाद हुए उपचुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में कई सीटों पर हार के बावजूद बाद में विधानसभा चुनाव में व्यापक जनसमर्थन मिला था। मुख्यमंत्री ने बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का वास्तविक जनादेश समझने के लिए भागलपुर, पूर्णिया, मोतिहारी, सारण और शाहाबाद जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के राजनीतिक रुझानों को देखना होगा। उनका संदेश साफ था कि बांकीपुर के नतीजे को बीजेपी के लिए गंभीर समीक्षा का विषय जरूर माना जाना चाहिए, लेकिन इसे पूरे बिहार की राजनीतिक तस्वीर का अंतिम संकेत नहीं माना जा सकता।

आगे क्या होगा, बीजेपी के लिए चुनौती बड़ी

बांकीपुर उपचुनाव की हार के बाद बीजेपी के सामने अब संगठनात्मक स्तर पर समीक्षा की चुनौती है। खासकर उस सीट पर हार, जहां पार्टी मजबूत स्थिति में रहने की उम्मीद कर सकती थी, नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। सम्राट चौधरी ने खुद गलती स्वीकार कर यह संकेत दिया है कि पार्टी नतीजे को हल्के में नहीं ले रही। आने वाले समय में संगठन की रणनीति, स्थानीय समीकरण और उम्मीदवार चयन जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हो सकती है। दूसरी तरफ प्रशांत किशोर और सम्राट चौधरी के बीच बयानबाजी बिहार की राजनीति में आगे भी सुर्खियां बटोर सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत टकराव से दूरी बनाते हुए पूरे मामले को राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रखने का संदेश दिया है। 

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