हाजीपुर में बाढ़ पीड़ितों से मिले सम्राट चौधरी, मृतकों को 4 लाख

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 बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सोमवार को हाजीपुर पहुंचे, जहां उन्होंने गंगा ब्रिज थाना के सामने बने बाढ़ राहत शिविर में प्रभावित लोगों से मुलाकात की। सम्राट चौधरी ने बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सुनीं और राहत शिविर में मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि के चेक भी सौंपे गए। मुख्यमंत्री सुबह करीब 11:22 बजे राहत शिविर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से सीधे बातचीत कर उनकी परेशानियों की जानकारी ली। साथ ही अधिकारियों से राहत और बचाव अभियान की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी ली।

बाढ़ राहत शिविर में व्यवस्थाओं का लिया जायजा

मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में उपलब्ध व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य जरूरी इंतजामों की स्थिति जानी। इसके अलावा पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। राहत शिविर में मौजूद लोगों ने भी अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

मृतकों के परिजनों को मिले चार-चार लाख रुपये

बाढ़ के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को मुख्यमंत्री ने चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि के चेक प्रदान किए। सरकार की ओर से दी जाने वाली यह सहायता प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल आर्थिक मदद के तौर पर है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों से बातचीत भी की। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभावित परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचाने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बाढ़ जैसी आपदा में लोगों को आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राहत शिविरों के माध्यम से प्रशासन प्रभावित परिवारों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाने में जुटा है।

गंगा का जलस्तर 17 से 18 सेंटीमीटर घटा

राहत शिविर के दौरे के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बाढ़ की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि जलस्तर में कमी आने लगी है। उन्होंने बताया कि गंगा के जलस्तर में करीब 17 से 18 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक आने वाले दिनों में जलस्तर और घटने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अधिकारियों को लगातार सतर्क रहने और प्रभावित लोगों की जरूरतों का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

फरक्का से छोड़े जा रहे 15 लाख क्यूसेक पानी का असर

सम्राट चौधरी ने बताया कि फरक्का में करीब 15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसका असर बिहार में गंगा के जलस्तर पर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो दिनों में बाढ़ की स्थिति स्थिर हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन को अभी पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है। गंगा के जलस्तर में कमी के बावजूद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार की नजर राहत और बचाव कार्य पर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के समय लोगों को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। सरकार का प्रयास है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को कम से कम कठिनाइयों का सामना करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। चिकित्सा व्यवस्था, पशु चारा और राहत सामग्री जैसे जरूरी मुद्दों पर प्रशासन को विशेष ध्यान देने को कहा गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जलस्तर में होने वाले बदलाव के आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है।

कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

मुख्यमंत्री के हाजीपुर दौरे के दौरान वैशाली विधायक सिद्धार्थ पटेल, लालगंज विधायक संजय कुमार सिंह और भाजपा नेता संजय सिंह मौजूद रहे। इसके अलावा जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह, पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा समेत जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी भी राहत शिविर में मौजूद थे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों से जुड़ी जानकारी दी। मुख्यमंत्री करीब 11:37 बजे राहत शिविर से रवाना हो गए। उनके दौरे के दौरान प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए किए जा रहे इंतजामों की समीक्षा की गई। फिलहाल गंगा के जलस्तर में कमी राहत की उम्मीद जरूर जगा रही है, लेकिन फरक्का से छोड़े जा रहे पानी और निचले इलाकों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन के सामने सतर्कता बनाए रखना बड़ी चुनौती है।

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