सम्राट चौधरी ने खोला राज, कैसे बना बिहार का मुख्यमंत्री चेहरा?

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सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री बनने पर क्या कहा?

सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री बनने को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट की है। सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला नीतीश कुमार या किसी सहयोगी दल के नेता ने नहीं, बल्कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने लिया था। न्यूज एजेंसी एएनआई के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार एनडीए के सम्मानित नेता हैं। हालांकि, बीजेपी अपने मुख्यमंत्री का चुनाव किसे करेगी, इसका निर्णय पार्टी का आंतरिक विषय है। उनके इस बयान से उन अटकलों पर विराम लगता दिख रहा है, जिनमें कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार की सहमति या पहल के बाद सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली।

नीतीश कुमार के साथ रिश्तों पर भी खुलकर बोले

सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधों को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का उन पर विशेष आशीर्वाद रहा है और यह आज भी बना हुआ है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय नीतीश कुमार के कहने पर नहीं हुआ। उन्होंने सहयोगी दलों के नेताओं के स्तर से ऐसा फैसला होने की बात को भी खारिज किया। सम्राट चौधरी ने अपने और नीतीश कुमार के रिश्ते को खट्टे-मीठे अनुभवों वाला बताया। उनके बयान से संकेत मिलता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक सम्मान का रिश्ता कायम है।

बीजेपी ने विधायक से मुख्यमंत्री तक दी जिम्मेदारियां

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने उन्हें लगातार अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह बिहार के मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचेंगे। पार्टी ने उन्हें विधायक, एमएलसी और डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी। इसके अलावा वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और विधान परिषद में नेता की भूमिका भी निभा चुके हैं। अब पार्टी ने उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। सम्राट चौधरी के मुताबिक, उनका राजनीतिक सफर पार्टी के भरोसे और दी गई जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ता गया। मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने को उन्होंने पार्टी के निर्णय का परिणाम बताया।

आरक्षण को लेकर भी सीएम का बड़ा बयान

पॉडकास्ट में सम्राट चौधरी ने आरक्षण के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ सभी पात्र लोगों को मिलेगा और इसको लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के अति पिछड़े समाज के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया। साथ ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाशपति मिश्र की भूमिका का भी जिक्र किया। सम्राट चौधरी ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि गरीब और वंचित वर्गों को लाभ पहुंचाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। उनके बयान में आरक्षण को लेकर बीजेपी की सामाजिक नीति और अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की बात प्रमुख रूप से सामने आई।

मुख्यमंत्री पद को लेकर क्यों अहम है यह बयान?

बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर हर राजनीतिक संकेत काफी अहम माना जाता है। खासकर तब, जब सरकार में कई दल गठबंधन का हिस्सा हों और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण बनते रहें। ऐसे में सम्राट चौधरी का यह बयान महत्वपूर्ण है कि मुख्यमंत्री चुनने का फैसला बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने किया। इससे पार्टी के भीतर नेतृत्व चयन की प्रक्रिया को लेकर उनका रुख साफ दिखाई देता है। वहीं, नीतीश कुमार के प्रति सम्मान जताकर उन्होंने एनडीए के भीतर सहयोग और राजनीतिक संबंधों का संदेश भी दिया है। यानी बयान में एक तरफ नेतृत्व को लेकर स्पष्टता है, तो दूसरी तरफ गठबंधन की एकजुटता पर जोर भी नजर आता है।

सम्राट चौधरी के बयान से क्या संदेश गया?

सम्राट चौधरी के बयान को तीन प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है।

पहला, मुख्यमंत्री पद पर उनकी नियुक्ति का फैसला बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने किया।

दूसरा, नीतीश कुमार के साथ उनके संबंधों में सम्मान और राजनीतिक उतार-चढ़ाव दोनों रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के फैसले का श्रेय उन्होंने नीतीश कुमार को नहीं दिया।

तीसरा, आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने सभी पात्र और जरूरतमंद वर्गों तक लाभ पहुंचाने की बात कही।

इस पूरे बयान से मुख्यमंत्री ने अपनी राजनीतिक स्थिति और बीजेपी नेतृत्व के प्रति भरोसे को स्पष्ट करने की कोशिश की है। साथ ही एनडीए के वरिष्ठ नेता के तौर पर नीतीश कुमार के प्रति सम्मान भी बनाए रखा है। बिहार की राजनीति में आने वाले समय में इस बयान के राजनीतिक मायने निकाले जा सकते हैं। हालांकि, सम्राट चौधरी ने खुद अपने मुख्यमंत्री बनने को पार्टी नेतृत्व के फैसले के तौर पर स्पष्ट किया है।

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