छात्रा के शोषण के आरोप में समस्तीपुर का सरकारी शिक्षक निलंबित
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समस्तीपुर में छात्रा के शोषण के गंभीर आरोप के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। समस्तीपुर शिक्षक निलंबित मामले में विभूतिपुर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय खदियाही में कार्यरत विशिष्ट शिक्षक तारा बाबू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। समस्तीपुर शिक्षक निलंबित किए जाने की कार्रवाई छात्रा से जुड़े आरोपों और सरकारी सेवा में रहते हुए निजी कोचिंग संचालित करने के मामले में की गई है। मामला महिला थाना में दर्ज प्राथमिकी के बाद सामने आया।
शिक्षा विभाग के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई। विभूतिपुर के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की ओर से 31 अगस्त 2026 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने की बात कही गई है। इसके बाद विभाग ने शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी।
महिला थाना में प्राथमिकी के बाद सामने आया मामला
मामला तब सामने आया जब खदियाही निवासी मीनाक्षी देवी ने समस्तीपुर महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शिक्षक सरकारी सेवा में रहते हुए निजी कोचिंग का संचालन कर रहे थे।
प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया कि इसी निजी कोचिंग में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ शिक्षक ने शारीरिक शोषण किया। शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और विभागीय स्तर पर जांच शुरू की।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना गया क्योंकि आरोप सरकारी सेवा में कार्यरत एक शिक्षक से संबंधित हैं। विभाग ने जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों और शिकायत से जुड़े बिंदुओं की समीक्षा की।
हालांकि, किसी आपराधिक मामले में अंतिम दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। फिलहाल शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी और विभागीय जांच के आधार पर कार्रवाई की गई है।
31 अगस्त की जांच रिपोर्ट के बाद विभाग ने की कार्रवाई
मामले की जांच विभूतिपुर के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को सौंपी गई थी। जांच के बाद 31 अगस्त 2026 को रिपोर्ट विभाग के समक्ष प्रस्तुत की गई।
विभागीय आदेश के अनुसार, जांच रिपोर्ट में शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने की बात कही गई। रिपोर्ट सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने निलंबन की कार्रवाई आगे बढ़ाई।
इससे पहले विभाग ने शिक्षक से उनका पक्ष जानने के लिए स्पष्टीकरण भी मांगा था। 29 अगस्त 2026 को जारी पत्र के माध्यम से उनसे आरोपों के संबंध में जवाब देने को कहा गया था।
स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने पर बढ़ी कार्रवाई
विभाग के मुताबिक, निर्धारित समय सीमा के भीतर शिक्षक की ओर से स्पष्टीकरण का कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीर अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता और स्वेच्छाचारिता से जुड़ा माना।
आदेश में सरकारी सेवा के दौरान नियमों के कथित उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है। विभाग ने इसे बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023, यथा संशोधित, तथा बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1976 के प्रावधानों के विपरीत बताया है।
सरकारी सेवा में रहते हुए निजी कोचिंग संचालन का आरोप भी विभागीय कार्रवाई का एक अहम आधार बना है। शिक्षा विभाग अब मामले में आगे की अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई करेगा।
1 सितंबर को जारी हुआ निलंबन आदेश
जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश के बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने 1 सितंबर 2026 को शिक्षक के निलंबन का आदेश जारी किया।
निलंबन के दौरान शिक्षक अनुशासनिक कार्रवाई के अधीन रहेंगे। आदेश के अनुसार, इस अवधि में उनका मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, मोहनपुर निर्धारित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान शिक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वहन भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। विभागीय नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई पूरी होने तक निलंबन प्रभावी रहेगा।
अलग से जारी होगा आरोप पत्र
शिक्षा विभाग ने शिक्षक के खिलाफ अलग से आरोप पत्र जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। आरोप पत्र जारी होने के बाद शिक्षक को विभागीय कार्रवाई में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
इसके बाद विभागीय अनुशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस प्रक्रिया में आरोपों, उपलब्ध जांच रिपोर्ट और शिक्षक के पक्ष को नियमों के अनुसार देखा जाएगा।
मामले में अब तक क्या हुआ?
- छात्रा से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई।
- विभाग ने मामले की जांच के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को जिम्मेदारी दी।
- 29 अगस्त 2026 को शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया।
- निर्धारित समय में स्पष्टीकरण का जवाब नहीं मिलने की बात विभाग ने कही।
- 31 अगस्त को विभागीय जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
- 1 सितंबर 2026 को निलंबन आदेश जारी किया गया।
- शिक्षक का निलंबन अवधि में मुख्यालय मोहनपुर स्थित प्रखंड संसाधन केंद्र तय किया गया।
- विभाग अब अलग आरोप पत्र जारी कर अनुशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ाएगा।
समस्तीपुर के इस मामले में अब विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ प्राथमिकी से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। छात्रा से जुड़े आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी। शिक्षा विभाग की ओर से भी आरोप पत्र और आगे की अनुशासनिक कार्रवाई के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
