समस्तीपुर स्कूल में फर्जी हाजिरी का खुलासा, प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई
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👉 WhatsApp से जुड़ेंसमस्तीपुर में फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जिले के ताजपुर प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय गौसपुर सरसौना में फर्जी उपस्थिति से जुड़े मामले की विभागीय जांच की गई। जांच के आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापक शिवचन्द्र दास के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता), समस्तीपुर की ओर से जारी जांच पत्र में ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति और अपलोड किए गए फोटो की तकनीकी तथा भौतिक जांच का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान प्रभारी प्रधानाध्यापक की उपस्थिति को लेकर अनियमितता के प्रमाण मिले। विभाग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी को उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की औपचारिक अनुशंसा भेजी है।
शिकायत के बाद स्कूल में हुई जांच
यह मामला मुकेश कुमार की ओर से ‘सहयोग पोर्टल’ पर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत को REF143212 संख्या के तहत दर्ज किया गया था।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग ने विद्यालय की जांच कराई। इस दौरान ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड किए गए फोटो, उपस्थिति विवरण और स्कूल में मौजूद रिकॉर्ड की जांच की गई।
जांच पत्र में बताया गया कि उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया में ऐसी स्थिति सामने आई, जिसमें प्रभारी प्रधानाध्यापक की गैरमौजूदगी में उनकी उपस्थिति दर्ज किए जाने की बात सामने आई।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ मामलों में रसोइया के माध्यम से उपस्थिति बनाए जाने की बात बच्चों से पूछताछ के दौरान सामने आई।
हालांकि, इस मामले में अंतिम विभागीय कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही तय होगी।
फर्जी हाजिरी से वेतन और छुट्टी पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट में गलत तरीके से उपस्थिति दर्ज कराए जाने के कारण अवैध छुट्टी का लाभ लेने और वेतन प्राप्त करने से जुड़े गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
विभागीय जांच में इसे प्रधानाध्यापक स्तर पर गंभीर लापरवाही या जानबूझकर की गई अनियमितता के तौर पर देखा गया है। इसी आधार पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मामला सामने आने पर विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पोर्टल पर अपलोड किए गए फोटो भी रहे। विभाग ने फोटो और वास्तविक स्थिति के बीच तालमेल की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की।
वाटर एटीएम और स्कूल की योजनाओं की भी जांच
शिकायत में विद्यालय में लगाए गए वाटर एटीएम को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। शिकायतकर्ता ने इसके निर्माण में मानकों का पालन नहीं होने और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
जांच में सामने आया कि विद्यालय में वाटर एटीएम स्थानीय सांसद क्षेत्र विकास योजना के तहत उपलब्ध कराया गया था। इस बिंदु पर जांच में योजना के स्रोत और उपलब्ध कराए गए संसाधन से संबंधित जानकारी देखी गई।
इसके अलावा विद्यालय रखरखाव के लिए मिलने वाली सालाना 50 हजार रुपये की राशि और मध्याह्न भोजन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मध्याह्न भोजन विद्यालय में निर्धारित मेनू के अनुसार संचालित पाया गया। संबंधित पंजी और वाउचर भी संधारित मिले। यानी शिकायत के सभी आरोपों की जांच में एक जैसी स्थिति सामने नहीं आई।
मोबाइल और राजनीतिक गतिविधि के आरोप भी जांचे गए
विद्यालय निरीक्षण के दौरान शिक्षकों के मोबाइल फोन या सोशल मीडिया के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की भी जांच की गई।
जांच के समय कोई शिक्षक मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए नहीं मिला। इसलिए इस बिंदु पर प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
इसी तरह कुछ शिक्षकों के राजनीतिक दलों की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप भी लगाए गए थे। जांच पत्र के अनुसार, इस संबंध में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला।
यह बिंदु महत्वपूर्ण है क्योंकि विभागीय जांच में शिकायत के प्रत्येक आरोप को अलग-अलग देखा गया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष दर्ज किया गया।
RTI और RTE से जुड़ी शिकायतों पर भी रिपोर्ट
जांच पत्र में सूचना का अधिकार यानी RTI के तहत मांगी गई जानकारी को निर्धारित प्रपत्र के अनुसार उपलब्ध नहीं कराने का भी उल्लेख किया गया है।
इसे शिकायत में उठाए गए बिंदुओं में शामिल किया गया। विभाग ने स्कूल स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड और सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में रखा।
वहीं, RTE आवेदन वापस लेने के लिए बाहरी लोगों द्वारा अभिभावकों पर कथित दबाव बनाए जाने के आरोप की भी जांच हुई। इस मामले में अभिभावकों की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की बात जांच पत्र में दर्ज है।
इससे साफ है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों को जांच रिपोर्ट ने समान रूप से सही नहीं माना है। जिन मामलों में साक्ष्य या तथ्य मिले, उन्हें रिपोर्ट में अलग तरीके से दर्ज किया गया।
प्रधानाध्यापक पर अब विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा
जांच का सबसे गंभीर निष्कर्ष ई-शिक्षा कोष पर उपस्थिति दर्ज करने से जुड़ा है। जांच पत्र के अनुसार, उपस्थिति के समय अपलोड किए गए फोटो और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद प्रभारी प्रधानाध्यापक शिवचन्द्र दास को फर्जी उपस्थिति के मामले में दोषी पाया गया।
इसके बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, समस्तीपुर को ज्ञापन भेजकर उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई करने की औपचारिक अनुशंसा की है।
अब आगे की कार्रवाई सक्षम विभागीय स्तर पर होने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रधानाध्यापक के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है।
क्या है पूरा मामला?
- स्थान: उच्च माध्यमिक विद्यालय गौसपुर सरसौना, ताजपुर, समस्तीपुर
- शिकायतकर्ता: मुकेश कुमार
- पोर्टल: सहयोग पोर्टल
- परिवाद संख्या: REF143212
- मुख्य आरोप: ई-शिक्षा कोष पर फर्जी उपस्थिति
- जांच: उपस्थिति फोटो, रिकॉर्ड और भौतिक स्थिति की जांच
- अनुशंसित कार्रवाई: प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई
मामले में विभागीय जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब निगाहें आगे होने वाली कार्रवाई पर हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई की अनुशंसा हो चुकी है, जबकि अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर होना बाकी है।