समस्तीपुर में बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट, लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही

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समस्तीपुर में बाढ़ राहत को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बाढ़ राहत और बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं हो, इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभारी सचिव सह भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने रविवार को रसलपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। इसके बाद जिला कंट्रोल रूम में अधिकारियों के साथ बैठक कर संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई।

बैठक में जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा, एडीएम आपदा प्रबंधन राजेश सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रभारी सचिव ने स्पष्ट किया कि आपदा की स्थिति में लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

बाढ़ राहत में लापरवाही पर होगी जवाबदेही

प्रभारी सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ से जुड़ी प्रत्येक महत्वपूर्ण व्यवस्था के लिए संबंधित पदाधिकारी की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने दायित्वों की नियमित समीक्षा करें। किसी व्यवस्था में कमी या समस्या सामने आती है तो उसे तत्काल दूर किया जाए, ताकि बाढ़ आने की स्थिति में राहत और बचाव कार्य प्रभावित न हों।

प्रशासन का जोर पहले से तैयारी पूरी रखने पर है, जिससे आपात स्थिति में फैसले लेने और संसाधन पहुंचाने में समय बर्बाद न हो।

आश्रय स्थलों पर भोजन-पानी की रहे पूरी व्यवस्था

संभावित बाढ़ के कारण यदि लोगों को घरों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की जरूरत पड़ती है, तो प्रशासन ने आश्रय स्थलों को पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

प्रभारी सचिव ने अधिकारियों से आश्रय स्थलों की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को जरूरत पड़ने पर बिना देरी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाए।

आश्रय स्थलों पर भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके साथ ही सामुदायिक रसोई के संचालन की व्यवस्था भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।

आपात स्थिति के लिए उपलब्ध मानव बल, संसाधनों और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को सभी जरूरी संसाधनों को चालू हालत में रखने को कहा गया है।

दवा, पशु चारा और पॉलिथीन शीट का स्टॉक तैयार

बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं और पशुओं से जुड़ी जरूरतों को देखते हुए प्रशासन ने जरूरी सामग्री का पर्याप्त भंडारण करने पर जोर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग को जीवनरक्षक दवाओं सहित आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने का निर्देश दिया गया। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति आने पर दवाओं की कमी न हो, इसके लिए पहले से तैयारी करने को कहा गया है।

पशुओं के लिए चारा और पशु चिकित्सा दवाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। पशुपालन विभाग को जरूरत के अनुसार प्रभावित इलाकों में चारा और दवाएं पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश मिला है।

इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों के लिए पॉलिथीन शीट का पर्याप्त भंडारण करने को कहा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर इनका समय पर वितरण होना चाहिए।

जलस्तर और तटबंधों की लगातार होगी निगरानी

बैठक के दौरान जिले में नदियों के जलस्तर की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई। एडीएम आपदा प्रबंधन और बाढ़ प्रमंडल के अधिकारियों को जलस्तर पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया गया है।

संवेदनशील स्थानों और तटबंधों की सतत निगरानी करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी या तटबंध से जुड़ी किसी समस्या की स्थिति में समय रहते कार्रवाई करना है।

अनुमंडल पदाधिकारी को अनुमंडल स्तर के कंट्रोल रूम के जरिए स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। वहीं जिला स्तर पर 24 घंटे संचालित जिला आपातकालीन संचालन केंद्र यानी डीईओसी के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने को कहा गया है।

माइकिंग के जरिए ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक

बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित और संभावित प्रभावित इलाकों में जागरूकता अभियान भी शुरू किया है।

एडीएम आपदा प्रबंधन राजेश सिंह के अनुसार, माइकिंग के जरिए लोगों को लगातार आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। लोगों को प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।

इस अभियान का उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे से पहले ही सतर्क करना और आपदा की स्थिति में सुरक्षित रहने के तरीकों की जानकारी देना है।

आपदा की स्थिति में क्या है प्रशासन की प्राथमिकता?

प्रशासन की तैयारी को मुख्य रूप से कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • बाढ़ प्रभावित लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना।
  • आश्रय स्थलों पर भोजन और पेयजल की व्यवस्था बनाए रखना।
  • सामुदायिक रसोई को जरूरत के अनुसार संचालित करना।
  • जीवनरक्षक और जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखना।
  • पशुओं के लिए चारा और चिकित्सा दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • पॉलिथीन शीट का पर्याप्त भंडारण और समय पर वितरण करना।
  • नदी के जलस्तर और तटबंधों की लगातार निगरानी करना।
  • जिला और अनुमंडल स्तर के कंट्रोल रूम के बीच बेहतर समन्वय रखना।

अधिकारियों को पूरी तत्परता से काम करने के निर्देश

प्रभारी सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ की स्थिति में सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। राहत और बचाव से जुड़े इंतजामों में किसी भी तरह की देरी लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।

प्रशासन ने फील्ड स्तर पर तैयारियों की नियमित समीक्षा करने और जरूरत के अनुसार तत्काल कदम उठाने पर जोर दिया है। खास तौर पर संवेदनशील इलाकों, तटबंधों और निचले क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई गई है।

फिलहाल जिला प्रशासन की प्राथमिकता संभावित बाढ़ की स्थिति से पहले जरूरी संसाधन और व्यवस्थाएं तैयार रखना है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक राहत तेजी से पहुंचाई जा सके।

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