प्रशांत किशोर का PM मोदी पर बड़ा हमला, 2047 के विजन पर उठाए सवाल
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👉 WhatsApp से जुड़ेंपटना: प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य पर सवाल खड़े किए हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि लंबे समय के लक्ष्य की बात करने से पहले सरकार को आज की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। औरंगाबाद दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बेरोजगारी, पेपर लीक, पढ़ाई, महंगाई और किसानों को खाद की उपलब्धता जैसे मुद्दे उठाए।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने केंद्र के साथ-साथ बिहार सरकार को भी कई मुद्दों पर घेरा। उन्होंने कहा कि आम लोगों की जरूरतें आज की हैं और सरकार को इन्हीं पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए।
'2047 का विकास देखने कौन रहेगा जिंदा?'
प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत बनाने के विजन पर तंज कसते हुए पूछा कि उस विकास को देखने के लिए तब तक कितने लोग जीवित रहेंगे।
उनका कहना था कि देश के युवाओं के सामने फिलहाल रोजगार की समस्या है। पढ़ाई से जुड़े मुद्दे और लगातार सामने आने वाले पेपर लीक भी चिंता का विषय हैं। ऐसे में भविष्य के बड़े लक्ष्यों के साथ वर्तमान की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है।
प्रशांत किशोर ने किसानों की खाद संबंधी परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खाद के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उनके मुताबिक, सरकार को पहले रोजगार, शिक्षा, खाद और आम लोगों की बुनियादी जरूरतों की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। इसके बाद 2047 के विकास लक्ष्य पर चर्चा हो सकती है।
रोजगार और पेपर लीक को लेकर सरकार पर निशाना
प्रशांत किशोर ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को अपने बयान का प्रमुख आधार बनाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा नौकरी की तलाश कर रहे हैं, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं भरोसे को प्रभावित करती हैं।
उनका सवाल है कि अगर युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे, तो विकास के बड़े दावों का लाभ आम परिवारों तक कैसे पहुंचेगा।
उन्होंने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए भी सरकार से सवाल किए। खासतौर पर खेती से जुड़ी लागत और खाद की उपलब्धता को लेकर उन्होंने अपनी चिंता जाहिर की।
कांग्रेस से गठबंधन पर प्रशांत किशोर का रुख
औरंगाबाद में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के साथ भविष्य में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि जन सुराज का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना या सत्ता की राजनीति करना नहीं है।
उनके मुताबिक, जन सुराज व्यवस्था में बदलाव और समाज के स्तर पर वास्तविक परिवर्तन की बात करता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी राजनीति का उद्देश्य केवल सांसद या विधायक बनाना नहीं, बल्कि व्यवस्था से जुड़े मूल सवालों को उठाना है।
यूजीसी के नियमों से जुड़े विवाद पर भी उन्होंने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है। साथ ही उन्होंने भाजपा समर्थकों से सवाल करने की बात कही कि यदि किसी नीति या कानून को लेकर विवाद है, तो उसके बारे में पार्टी नेताओं से जवाब क्यों नहीं मांगा जाता।
बिहार की कानून व्यवस्था पर भी हमला
प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी घेरा। उन्होंने पटना में पिता के सामने बच्ची के अपहरण की घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि ऐसी गंभीर घटनाओं पर सरकार के प्रमुख लोगों की प्रतिक्रिया कितनी प्रभावी है।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके बयान में जनप्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि और राजनीति में आपराधिक छवि वाले लोगों की मौजूदगी का मुद्दा भी शामिल रहा।
हालांकि, इन मुद्दों पर सरकार और संबंधित पक्षों का पक्ष अलग हो सकता है। प्रशांत किशोर के ये बयान उनके राजनीतिक दृष्टिकोण और सरकार की नीतियों पर उनकी आलोचना के तौर पर देखे जा रहे हैं।
'बिहार से पूंजी और प्रतिभा का पलायन रोकना जरूरी'
प्रशांत किशोर ने बिहार से मजदूरों के पलायन को राज्य की बड़ी समस्याओं में शामिल बताया। उनका तर्क है कि केवल श्रमिकों के पलायन पर चर्चा करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि पहले राज्य से पूंजी और प्रतिभा के बाहर जाने की प्रक्रिया को रोकना जरूरी है। जब निवेश और रोजगार के अवसर बिहार में बढ़ेंगे, तो स्थानीय स्तर पर काम के विकल्प भी मजबूत होंगे।
उन्होंने दावा किया कि हर साल बैंकों के माध्यम से बिहार से बड़ी मात्रा में पैसा दूसरे राज्यों की ओर जाता है। उनके अनुसार, यदि पढ़े-लिखे युवाओं और पूंजी को राज्य में ही रोकने की व्यवस्था बनती है, तो श्रमिकों के दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत भी धीरे-धीरे कम हो सकती है।
क्या है प्रशांत किशोर के बयान का बड़ा संदेश?
प्रशांत किशोर के ताजा बयान में तीन प्रमुख मुद्दे उभरकर सामने आते हैं—आज की बुनियादी जरूरतें, युवाओं के लिए रोजगार और बिहार से पलायन। उन्होंने 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की आलोचना करते हुए सरकार का ध्यान वर्तमान चुनौतियों की ओर खींचने की कोशिश की है।
राजनीतिक तौर पर उनके बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में जन सुराज के जरिए अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर उनकी मुखर टिप्पणी आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकती है।
