पटना में इंजीनियर रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, घर से लाखों कैश
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंपटना में Vigilance Raid के दौरान एक कार्यपालक अभियंता को कथित तौर पर 1.04 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। Vigilance Raid के बाद आरोपी के आवास की तलाशी ली गई, जहां 8.36 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्रवाई के बाद आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है। मामला सरकारी विद्यालय में निर्माण कार्य के भुगतान से जुड़ा बताया जा रहा है।
गोल्फ क्लब के पास रिश्वत लेते पकड़े गए इंजीनियर
बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने गुरुवार को कार्यपालक अभियंता द्विजेन्द्र कुमार मिश्र को गिरफ्तार किया।
जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई पटना के बेली रोड स्थित गोल्फ क्लब के गेट के पास की गई। आरोप है कि वे शिकायतकर्ता से 1.04 लाख रुपये रिश्वत की रकम ले रहे थे।
द्विजेन्द्र कुमार मिश्र पूर्णिया में बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (BSEIDC) में कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत थे।
गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम आरोपी को निगरानी थाना लेकर पहुंची, जहां उससे पूछताछ की गई। इसके बाद जांच टीम ने उसके आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया।
तीन लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप
निगरानी ब्यूरो के अनुसार, पटना निवासी राम सागर शर्मा ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने BSEIDC के तहत कटिहार जिले के एक सरकारी विद्यालय में निर्माण से संबंधित काम कराया था। इस काम के प्रथम भुगतान के रूप में 1,54,19,329 रुपये उनके खाते में आए थे।
आरोप है कि इसी भुगतान की राशि के दो प्रतिशत कमीशन के तौर पर कार्यपालक अभियंता ने तीन लाख रुपये की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान 1.04 लाख रुपये रिश्वत मांगने की बात की पुष्टि होने का दावा किया गया।
इसके बाद निगरानी थाना में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
डीएसपी के नेतृत्व में बनाई गई धावादल की टीम
शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी ब्यूरो ने कार्रवाई के लिए विशेष टीम गठित की।
डीएसपी विकास कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में धावादल का गठन किया गया। टीम ने तय योजना के तहत आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ लिया।
निगरानी विभाग की इस कार्रवाई के बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच एजेंसी अब रिश्वत के आरोप से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
घर से 8.36 लाख रुपये नकद मिलने का दावा
रिश्वत मामले में गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने आरोपी के रूपसपुर स्थित लखन इन्क्लेव आवास की तलाशी ली।
तलाशी के दौरान 8.36 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा रूपसपुर में एक फ्लैट से संबंधित दस्तावेज भी टीम को मिले हैं।
निगरानी ब्यूरो के अनुसार, करीब एक करोड़ रुपये के पारिवारिक निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। जांच टीम ने एक हुंडई i20 कार, दो बैंक लॉकर से संबंधित कागजात और सोने-चांदी के आभूषण भी बरामद किए हैं।
आभूषणों की वास्तविक कीमत निर्धारित करने के लिए अधिकृत मूल्यांकनकर्ता से मूल्यांकन कराया जा रहा है। इन संपत्तियों और दस्तावेजों का रिश्वत मामले से क्या संबंध है, इसकी जांच आगे की कार्रवाई में स्पष्ट होगी।
2021 में जल संसाधन विभाग से हुए थे सेवानिवृत्त
निगरानी विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, द्विजेन्द्र कुमार मिश्र पहले जल संसाधन विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत थे।
बताया गया कि वर्ष 2021 में वे जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वर्ष 2023 से वे आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से शिक्षा विभाग से जुड़े।
वे टेक्नो फैसिलिटी एंड मैनेजमेंट सर्विसेज के तहत BSEIDC, पूर्णिया में कार्यपालक अभियंता के पद पर सेवा दे रहे थे।
इससे पहले उनका सरकारी सेवा का अनुभव जल संसाधन विभाग से जुड़ा रहा है। अब निगरानी ब्यूरो उनकी वर्तमान सेवा और कथित रिश्वत मामले से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
रिश्वत मामले में गिरफ्तारी और आवास की तलाशी के बाद निगरानी ब्यूरो की जांच आगे जारी रहेगी।
पूछताछ के बाद आरोपी को निगरानी के विशेष न्यायालय, पटना में पेश किए जाने की प्रक्रिया है। इसके बाद अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
वहीं, आवास से मिले नकद, निवेश संबंधी दस्तावेज, लॉकर के कागजात और आभूषणों की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Vigilance Raid में क्या-क्या मिला?
निगरानी विभाग की दी गई जानकारी के अनुसार तलाशी में प्रमुख रूप से ये चीजें मिलीं—
- 8.36 लाख रुपये नकद
- एक फ्लैट से संबंधित दस्तावेज
- करीब एक करोड़ रुपये के पारिवारिक निवेश से जुड़े कागजात
- हुंडई i20 कार
- दो बैंक लॉकर के दस्तावेज
- सोने-चांदी के आभूषण
हालांकि, बरामद संपत्ति और दस्तावेजों का अंतिम कानूनी महत्व जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पर फिर उठे सवाल
इस कार्रवाई ने सरकारी निर्माण कार्यों और भुगतान प्रक्रिया में कथित कमीशनखोरी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं।
सरकारी परियोजनाओं में भुगतान से जुड़े अधिकारियों पर रिश्वत मांगने के आरोप सामने आने पर निगरानी जैसी एजेंसियां सत्यापन के बाद कार्रवाई करती हैं। इस मामले में भी पहले शिकायत का सत्यापन कराया गया और उसके बाद ट्रैप ऑपरेशन किया गया।
फिलहाल आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। निगरानी ब्यूरो की जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित रिश्वत के अलावा बरामद नकदी, निवेश और अन्य संपत्तियों का मामले से कोई संबंध है या नहीं।
