पटना में दूध में फॉर्मेलिन मिलने से मचा हड़कंप, 180 लीटर दूध नष्ट

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पटना में दूध में फॉर्मेलिन मिलने की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दूध में फॉर्मेलिन पाए जाने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने दानापुर की एक डेयरी से करीब 180 लीटर दूध नष्ट कराया है। विभाग की टीम ने दानापुर और भट्टीपुर इलाके में दूध-पनीर बेचने वाले कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर सात सैंपल लिए थे। इनमें एक दूध का नमूना फॉर्मेलिन की मौजूदगी के लिए पॉजिटिव पाया गया।

यह कार्रवाई बिहार में दूध और खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। अधिकारियों के मुताबिक, पटना के अलग-अलग दूध बाजारों और डेयरियों में औचक जांच आगे भी जारी रहेगी।

दानापुर की डेयरी में कैसे सामने आया मामला?

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दानापुर के भट्टीपार पीपा पुल के पास स्थित एक डेयरी और आसपास के दूध-पनीर विक्रेताओं के यहां जांच की। इस दौरान कुल सात सैंपल लिए गए और मौके पर फील्ड टेस्टिंग की गई।

जांच में एक दूध के नमूने में फॉर्मेलिन की मौजूदगी सामने आई। इसके बाद संबंधित दूध को मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त मानते हुए करीब 180 लीटर दूध नष्ट कर दिया गया।

खास बात यह रही कि अधिकारियों को डेयरी परिसर में फॉर्मेलिन, हाइड्रोजन पेरोक्साइड या कोई अन्य संदिग्ध रसायन नहीं मिला। ऐसे में अब यह सवाल भी जांच के दायरे में है कि दूध में यह पदार्थ आखिर किस स्तर पर पहुंचा।

डेयरी संचालक ने मिलावट से किया इनकार

डेयरी संचालक श्याम राय ने दूध में किसी तरह का रसायन मिलाने से इनकार किया है। उनका कहना है कि संभव है कि दूध सप्लाई करने से पहले किसी सप्लायर की ओर से ऐसा पदार्थ मिलाया गया हो।

डेयरी संचालक के मुताबिक, दूध को जल्दी खराब होने से बचाने और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए सप्लाई चेन में किसी स्तर पर मिलावट की जा सकती है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुदामा चौधरी ने डेयरी संचालक को फॉर्मेलिन से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में चेतावनी दी। अधिकारियों ने साफ किया कि भविष्य में दोबारा ऐसी मिलावट मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पटना जंक्शन पर दूध में मिला स्टार्च

दूध में मिलावट की जांच का अभियान केवल दानापुर तक सीमित नहीं रहा। अधिकारियों ने पटना जंक्शन के दूध बाजार में भी सैंपल की जांच की।

पटना जंक्शन से लिए गए एक नमूने में फॉर्मेलिन नहीं मिला, लेकिन उसमें स्टार्च की मिलावट पाई गई। इससे साफ है कि खाद्य सुरक्षा विभाग दूध में अलग-अलग तरह की मिलावट की जांच पर विशेष ध्यान दे रहा है।

विभाग की टीम डेयरियों, दूध बाजारों और बिक्री केंद्रों पर निरीक्षण कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और मानक के अनुरूप खाद्य पदार्थ पहुंचाना है।

फॉर्मेलिन स्वास्थ्य के लिए क्यों चिंता का विषय है?

फॉर्मेलिन का इस्तेमाल औद्योगिक और संरक्षण संबंधी उद्देश्यों में किया जाता है, लेकिन इसे खाद्य पदार्थों में मिलाना गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय माना जाता है। लंबे समय तक हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

न्यू गार्डिनर अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मनोज कुमार सिन्हा के अनुसार, फॉर्मेलिन के संपर्क से आंखों और त्वचा में जलन, लालिमा और पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक संपर्क स्वास्थ्य के लिए अधिक गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बच्चों को मिलावटी या खराब गुणवत्ता वाले दूध से विशेष सावधानी की जरूरत है। आईजीआईएमएस के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीरेंद्र कुमार सिंह ने दूध में यूरिया, स्टार्च, डिटर्जेंट और दूषित पानी जैसी संभावित मिलावटों को लेकर भी चिंता जताई।

मिलावटी दूध का सेवन पाचन संबंधी परेशानियां पैदा कर सकता है और दूध से मिलने वाले पोषण पर भी असर डाल सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति पर प्रभाव उसकी मात्रा, संपर्क की अवधि और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।

दूध खरीदते समय उपभोक्ता रहें सावधान

पटना में सामने आए इस मामले के बाद उपभोक्ताओं के लिए भी सावधानी जरूरी हो गई है। दूध खरीदते समय पैकेट की सील, निर्माण और उपयोग की तारीख, बैच नंबर तथा लेबल की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।

खुले दूध की खरीदारी करते समय विश्वसनीय विक्रेता और डेयरी को प्राथमिकता देना बेहतर है। किसी दूध या खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर उसका सेवन जारी रखने के बजाय संबंधित विभाग को शिकायत करना उचित है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने लोगों को घर पर किसी संदिग्ध रसायन की जांच करने के लिए खतरनाक प्रयोग नहीं करने की सलाह दी है। ऐसे मामलों में आधिकारिक खाद्य सुरक्षा तंत्र का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित है।

मिलावट की शिकायत कहां करें?

खाद्य सुरक्षा विभाग ने उपभोक्ताओं से संदिग्ध मिलावट की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने की अपील की है। शिकायत करते समय दुकान या डेयरी का नाम-पता, खरीद की तारीख, बिल या पैकेट, बैच नंबर और उपलब्ध तस्वीरें सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है।

शिकायत के लिए उपलब्ध संपर्क माध्यमों में FSSAI टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-2100, बिहार खाद्य सुरक्षा विभाग का ईमेल fsohqfsdbihar@gmail.com और बिहार स्वास्थ्य विभाग का ईमेल health-bih@nic.in शामिल हैं।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कार्यालय सिविल सर्जन कार्यालय परिसर, गर्दनीबाग, पटना में बताया गया है। किसी शिकायत पर कार्रवाई संबंधित विभाग की जांच और प्रक्रिया के आधार पर होगी।

आगे भी जारी रहेगा जांच अभियान

दानापुर की डेयरी में फॉर्मेलिन मिलने और 180 लीटर दूध नष्ट किए जाने की कार्रवाई ने पटना की दूध सप्लाई चेन पर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संदिग्ध पदार्थ दूध में किस स्तर पर पहुंचा।

फिलहाल खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध बाजारों और डेयरियों की निगरानी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में और सैंपल लिए जाने तथा मिलावट पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की संभावना है।

उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि संदिग्ध दूध या खाद्य पदार्थ की शिकायत सीधे आधिकारिक चैनल पर करें और बिना पुष्टि के किसी वायरल दावे पर भरोसा न करें।

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