पटना ई-चालान: ऑनलाइन कैसे भरें और लोक अदालत में कैसे माफ कराएं?
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भैया, अगर आप पटना या बिहार के किसी भी जिले की सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं, तो एक बात तो आपने भी गौर की होगी। अब पहले वाला समय नहीं रहा कि चौराहे पर पुलिस वाले को 100-50 रुपये थमाए और निकल गए। पटना अब स्मार्ट सिटी बन चुका है। डाक बंगला चौराहा हो, इनकम टैक्स गोलंबर हो या फिर गांधी मैदान का इलाका, हर जगह हाई-डेफिनिशन वाले स्मार्ट कैमरे लगे हुए हैं।
आप बिना हेलमेट के निकले, जेब्रा क्रॉसिंग पार कर गए या गलती से रॉग साइड घुस गए, आपको पता भी नहीं चलेगा और आपके मोबाइल पर एक मैसेज आ जाएगा— "आपका चालान कट गया है।" मैसेज देखते ही अच्छे-अच्छों का मूड खराब हो जाता है।
लेकिन टेंशन लेने से काम नहीं चलेगा। कई बार तो लोगों को महीनों तक पता ही नहीं चलता कि उनकी गाड़ी पर 5,000 या 10,000 रुपये का चालान पेंडिंग है। जब वो गाड़ी बेचने या पॉल्यूशन बनवाने जाते हैं, तब पता चलता है कि लंबा फटका लग चुका है।
आज मैं, आपका अपना लोकल पत्रकार, आपको जमीनी हकीकत और सबसे सटीक तरीका बताने जा रहा हूं। हम बात करेंगे कि अगर आपका चालान कट गया है, तो उसे ऑनलाइन खुद से कैसे चेक करें, कैसे भरें, और सबसे बड़ी बात— अगर जुर्माना बहुत ज्यादा है, तो लोक अदालत (Lok Adalat) में जाकर उसे माफ या कम कैसे करवाएं। कोई किताबी बात नहीं, सीधे मुद्दे की बात करेंगे जो आम आदमी के काम आती है।
कैसे चेक करें कि आपकी गाड़ी का चालान कटा है या नहीं?
कई बार कैमरा फोटो खींच लेता है लेकिन नेटवर्क इश्यू या नंबर लिंक न होने के कारण मोबाइल पर SMS नहीं आता। ऐसे में आपको खुद समय-समय पर चेक करते रहना चाहिए। इसे चेक करना बहुत ही आसान है, किसी कैफे वाले को 50 रुपये देने की जरूरत नहीं है।
ऑनलाइन चालान स्टेटस चेक करने का तरीका:
सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर भारत सरकार की वेबसाइट echallan.parivahan.gov.in खोलें।
वहां आपको 'Check Online Services' का ऑप्शन दिखेगा, उस पर क्लिक करें।
इसके बाद 'Check Challan Status' पर जाएं।
अब आपके सामने तीन ऑप्शन आएंगे:
Challan Number: अगर मैसेज आया है तो उसमें चालान नंबर होगा।
Vehicle Number: सबसे आसान तरीका। अपनी गाड़ी का नंबर डालें, साथ में चेसिस नंबर या इंजन नंबर के आखिरी 5 अंक डालें।
DL Number: अपने ड्राइविंग लाइसेंस के नंबर से भी चेक कर सकते हैं।
नीचे दिया गया कैप्चा (Captcha) कोड भरें और 'Get Detail' पर क्लिक करें।
अगर कोई चालान कटा होगा, तो उसकी पूरी लिस्ट आपके सामने आ जाएगी। आप वहीं पर फोटो भी देख सकते हैं कि किस चौराहे पर और किस गलती के कारण आपका चालान कटा है।
पटना ई-चालान ऑनलाइन कैसे भरें? (Step-by-Step Guide)
अगर चालान 1000 या 2000 रुपये का है और आपको लगता है कि वाकई आपसे गलती हुई है, तो उसे समय पर भर देना ही समझदारी है। चालान कटने के 60 दिन के अंदर उसे जमा करना होता है, वर्ना मामला कोर्ट में चला जाता है।
ऑनलाइन पेमेंट का पूरा प्रोसेस:
ऊपर बताए गए तरीके से echallan.parivahan.gov.in पर अपना चालान स्टेटस खोलें।
चालान लिस्ट में सबसे किनारे आपको 'Pay Now' का बटन दिखेगा।
'Pay Now' पर क्लिक करते ही आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा।
OTP डालकर कन्फर्म करें। इसके बाद आपको बिहार सरकार के पेमेंट गेटवे (OIGAS) पर भेज दिया जाएगा।
वहां आप अपना Debit Card, Credit Card, Net Banking या UPI (Google Pay, PhonePe, Paytm) चुन सकते हैं।
पेमेंट पूरा होते ही आपकी स्क्रीन पर Payment Successful का मैसेज आ जाएगा।
सबसे जरूरी काम: वहीं से अपनी रसीद (Receipt) डाउनलोड करके मोबाइल में सेव कर लें। भविष्य में कोई दिक्कत हो, तो यही रसीद काम आएगी।
गलत चालान कट जाए तो क्या करें? (Grievance Registration)
कई बार ऐसा होता है कि कैमरा किसी और गाड़ी की फोटो खींचता है, लेकिन नंबर प्लेट धुंधली होने के कारण चालान आपके नंबर पर कट जाता है। या फिर आपने हेलमेट पहना होता है, फिर भी चालान आ जाता है। ऐसे में आपको पैसा भरने की जरूरत नहीं है।
परिवहन पोर्टल पर ही 'Grievance System' का ऑप्शन होता है।
वहां जाकर अपना चालान नंबर डालें और शिकायत दर्ज करें कि "यह मेरी गाड़ी नहीं है" या "चालान गलत कटा है"।
पटना ट्रैफिक पुलिस की टीम इसे दोबारा चेक करती है और अगर आपकी बात सही निकली, तो चालान ऑनलाइन ही कैंसिल कर दिया जाता है।
लोक अदालत क्या है और भारी-भरकम चालान कैसे माफ या कम कराएं?
अब आते हैं सबसे काम की बात पर। मान लीजिए आपके पास प्रदूषण (Pollution) नहीं था, इंश्योरेंस फेल था और आप बिना हेलमेट के थे। पुलिस ने आपका 10,000 या 15,000 रुपये का भारी चालान काट दिया। एक आम आदमी के लिए इतना पैसा एक साथ देना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में आपकी सबसे बड़ी मदद करती है— राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat)।
लोक अदालत क्या होती है?
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देश पर बिहार के हर जिले के सिविल कोर्ट (जैसे पटना व्यवहार न्यायालय) में हर दो या तीन महीने में एक बार 'राष्ट्रीय लोक अदालत' लगाई जाती है। इसका मकसद कोर्ट में पेंडिंग छोटे-मोटे मामलों का आपसी सुलह-समझौते से निपटारा करना है। ट्रैफिक चालान के मामले इसमें सबसे ज्यादा आते हैं।
लोक अदालत में चालान कम कराने का प्रोसेस:
तारीख का पता करें: अखबारों में या कोर्ट की वेबसाइट पर लोक अदालत की तारीख निकलती है। आपको पहले से पता कर लेना है कि पटना में अगली लोक अदालत कब लगने वाली है।
टोकन/नोटिस प्राप्त करें: लोक अदालत से कुछ दिन पहले, आपको अपने पेंडिंग चालान का प्रिंटआउट लेकर ट्रैफिक एसपी ऑफिस या कोर्ट के संबंधित काउंटर पर जाना होता है। वहां से आपको लोक अदालत का एक टोकन या नोटिस दिया जाता है, जिसमें बेंच नंबर लिखा होता है।
लोक अदालत के दिन कोर्ट जाएं: तय तारीख को सुबह-सुबह पटना सिविल कोर्ट पहुंच जाएं। वहां अपने बेंच नंबर पर जाएं।
मजिस्ट्रेट के सामने पेशी: जब आपका नंबर आए, तो मजिस्ट्रेट (जज साहब) के सामने अपना चालान रखें।
सही कारण बताएं: आपको जज साहब को अपनी परेशानी बतानी होगी। अगर आप स्टूडेंट हैं, या आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तो साफ-साफ बताएं। आप कह सकते हैं, "हुजूर, गलती हो गई, आगे से ध्यान रखूंगा। मैं एक आम आदमी हूं, इतना जुर्माना नहीं भर सकता।"
जुर्माने में भारी छूट: लोक अदालत में जज साहब के पास पावर होती है कि वो आपके 10,000 के चालान को घटाकर 1,000 या 2,000 रुपये कर दें। कई बार तो अगर मामला जेनुइन हो, तो वो चेतावनी देकर चालान पूरी तरह माफ (Waiver) भी कर देते हैं।
वहीं पेमेंट करें: जितना पैसा जज साहब तय करेंगे, उतना आपको वहीं काउंटर पर जमा करना होगा और आपको क्लियरेंस की रसीद मिल जाएगी। पोर्टल पर भी आपका चालान तुरंत क्लियर दिखा दिया जाएगा।
बिहार में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आम जुर्माने (Quick Info Table)
आपको पता होना चाहिए कि किस गलती का कितना जुर्माना तय है, ताकि कोई आपको बेवकूफ न बना सके।
| ट्रैफिक नियम का उल्लंघन (Traffic Violation) | जुर्माना राशि (Fine Amount in ₹) |
| बिना हेलमेट गाड़ी चलाना (Without Helmet) | ₹1,000 |
| बिना सीट बेल्ट कार चलाना (No Seatbelt) | ₹1,000 |
| रॉन्ग साइड ड्राइविंग (Wrong Side Driving) | ₹5,000 |
| बिना ड्राइविंग लाइसेंस (Without DL) | ₹5,000 |
| बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाना (No Insurance) | ₹2,000 |
| प्रदूषण प्रमाण पत्र न होना (No Pollution/PUC) | ₹10,000 |
| ट्रिपल लोडिंग (Three Riders on Bike) | ₹1,000 |
| मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग (Using Mobile) | ₹5,000 |
(नोट: यह राशियां मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार हैं। बार-बार गलती दोहराने पर जुर्माना बढ़ सकता है।)
लोक अदालत जाने से पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें
समय से पहुंचें: लोक अदालत में पूरे जिले की भीड़ उमड़ती है। इसलिए सुबह 10 बजे से पहले ही कोर्ट परिसर पहुंच जाएं। जो पहले जाएगा, उसका काम पहले होगा।
दस्तावेज साथ रखें: अपनी गाड़ी का RC (रजिस्ट्रेशन कार्ड), इंश्योरेंस, पॉल्यूशन, ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड की फोटोकॉपी जरूर साथ ले जाएं। अगर आपने चालान कटने के बाद पॉल्यूशन या इंश्योरेंस रिन्यू करा लिया है, तो उसे जरूर दिखाएं, इससे चालान जल्दी माफ होता है।
दलालों से दूर रहें: कोर्ट के बाहर आपको कई लोग मिलेंगे जो कहेंगे "लाओ 500 रुपये दो, तुम्हारा काम जल्दी करवा देंगे।" ऐसे दलालों के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें। लोक अदालत की प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त और पारदर्शी होती है। आपको सीधे जज साहब से बात करनी है।
सभी पेंडिंग चालान एक साथ लाएं: अगर आपकी गाड़ी पर 2 या 3 चालान पेंडिंग हैं, तो सभी का प्रिंटआउट लेकर जाएं। मजिस्ट्रेट सभी को एक साथ मर्ज करके बहुत ही कम अमाउंट में सेटल कर देते हैं।
लोगों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. अगर मैं अपना ई-चालान न भरूं तो क्या होगा?
अगर आप 60 दिनों के भीतर चालान नहीं भरते हैं, तो वह वर्चुअल कोर्ट या स्थानीय अदालत में ट्रांसफर हो जाता है। इसके बाद आपको कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ेगा। अगर फिर भी इग्नोर किया, तो आपकी गाड़ी का ट्रांसफर, फिटनेस या रिन्यूअल रोक दिया जाएगा और गाड़ी जब्त भी हो सकती है।
2. क्या मैं लोक अदालत में जाने के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकता हूं?
कुछ राज्यों में लोक अदालत के लिए ऑनलाइन टोकन कटने लगा है, लेकिन बिहार में ज्यादातर जिलों में आपको ट्रैफिक एसपी ऑफिस या कोर्ट के विधिक सेवा काउंटर से जाकर ही नोटिस/टोकन लेना पड़ता है। अगली अदालत कब है, इसकी जानकारी आप e-Courts पोर्टल या लोकल न्यूजपेपर से ले सकते हैं।
3. क्या लोक अदालत में जाने की कोई फीस लगती है?
बिल्कुल नहीं! लोक अदालत में अपने केस की सुनवाई के लिए आपको एक भी रुपया फीस नहीं देनी होती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है। आपको सिर्फ वही पैसा देना है जो मजिस्ट्रेट जुर्माना तय करेंगे।
4. मेरा चालान दूसरे जिले (जैसे मुजफ्फरपुर) में कटा है और मैं पटना में रहता हूं। मैं क्या करूं?
ई-चालान सिस्टम पूरे राज्य और देश में जुड़ा हुआ है। आप इसे ऑनलाइन घर बैठे भर सकते हैं। लेकिन अगर आपको इसे लोक अदालत में कम करवाना है, तो नियमतः जिस जिले में चालान कटा है, वहीं की लोक अदालत में जाना पड़ता है।
5. मैंने चालान ऑनलाइन भर दिया, लेकिन अभी भी 'Pending' दिखा रहा है, क्या करूं?
कई बार बैंक सर्वर डाउन होने के कारण पेमेंट अपडेट होने में 24 से 48 घंटे लग जाते हैं। दोबारा पेमेंट न करें। 'Verify Payment Status' ऑप्शन पर जाकर अपना स्टेटस चेक करें। अगर पैसा कट गया है, तो एक-दो दिन में रसीद जनरेट हो जाएगी।
आखिरी सलाह
भैया, गाड़ी चलाते समय नियम तोड़कर आप पुलिस को नहीं, बल्कि खुद की जिंदगी को धोखा देते हैं। चालान का पैसा तो फिर भी लोक अदालत में कम हो जाएगा, लेकिन अगर कोई दुर्घटना हो गई, तो उसकी भरपाई दुनिया की कोई अदालत नहीं कर सकती।
पटना की ट्रैफिक व्यवस्था अब बहुत सख्त हो चुकी है। घर से निकलिए तो हेलमेट सिर पर (हाथ में नहीं), सीट बेल्ट बांधकर, और गाड़ी के सभी कागज दुरुस्त करके ही निकलिए। अगर गलती से चालान कट भी जाए, तो घबराइए मत, ऊपर बताए गए तरीके से ऑनलाइन चेक कीजिए और लोक अदालत का फायदा उठाइए। सुरक्षित रहिए, सावधान रहिए और आराम से गाड़ी चाइए!
