पटना में 10 हजार रिश्वत लेते दारोगा गिरफ्तार, लड़की की स्कूटी वाला वीडियो भी आया था सामने

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पटना में दारोगा रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। दारोगा रिश्वत के आरोप में ट्रैफिक थाने में तैनात उपेंद्र शाह को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 10 हजार रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एक वाहन को छोड़ने के बदले उन्होंने उसके मालिक से पैसे की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने सत्यापन किया और फिर जाल बिछाकर कार्रवाई की।

यह कार्रवाई जेपी गंगा पथ के पास हुई। इसी दिन निगरानी की टीम ने जहानाबाद और शेखपुरा में भी अलग-अलग कार्रवाई की। जहानाबाद में मनरेगा सदर प्रखंड के जेई अमन कुमार को 20 हजार रुपये और शेखपुरा DTO कार्यालय के बड़ा बाबू कुणाल को 15 हजार रुपये लेते पकड़े जाने की जानकारी दी गई है।

वाहन छोड़ने के बदले मांगी गई रिश्वत

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के DSP श्रीराम चौधरी के अनुसार, कैमूर निवासी जमील अंसारी ने ट्रैफिक थाने में तैनात दारोगा उपेंद्र शाह के खिलाफ शिकायत की थी।

जमील अंसारी पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री का काम करते हैं। बताया गया कि पटना जंक्शन के पास एक वाहन की खरीद-बिक्री को लेकर उनकी चंदन नाम के ड्राइवर से बातचीत चल रही थी।

वाहन के ट्रायल के दौरान वह किसी तीसरे व्यक्ति के वाहन से टच हो गया। इसके बाद संबंधित पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया था। आरोप है कि इसी दौरान दारोगा उपेंद्र शाह वहां पहुंचे और वाहन को जब्त कर थाने ले आए।

इसके बाद वाहन छोड़ने के बदले जमील अंसारी से 10 हजार रुपये की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया।

शिकायत के बाद निगरानी ने बिछाया जाल

जमील अंसारी ने कथित रिश्वत मांगने की शिकायत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने मामले का सत्यापन कराया।

सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद निगरानी टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। मंगलवार को टीम ने तय रणनीति के तहत दारोगा को रिश्वत लेते पकड़ने की कार्रवाई शुरू की।

जेपी गंगा पथ के पास जैसे ही उपेंद्र शाह ने 10 हजार रुपये लिए, निगरानी टीम ने उन्हें पकड़ लिया। टीम ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पहले भी विवादों में रहे हैं उपेंद्र शाह

दारोगा उपेंद्र शाह की गिरफ्तारी के बाद उनका नाम एक पुराने विवाद से भी जोड़ा जा रहा है। कुछ समय पहले एक लड़की की स्कूटी रोकने से संबंधित उनका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था।

वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला काफी चर्चा में रहा था। अब रिश्वत के आरोप में गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर उपेंद्र शाह चर्चा में हैं।

हालांकि पुराने वीडियो और वर्तमान रिश्वत मामले की परिस्थितियां अलग हैं। निगरानी ब्यूरो की मौजूदा कार्रवाई शिकायत, सत्यापन और कथित रिश्वत लेते पकड़े जाने से जुड़ी है।

एक दिन में तीन जगह निगरानी की कार्रवाई

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पटना के अलावा जहानाबाद और शेखपुरा में भी कार्रवाई की। इससे सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही निगरानी कार्रवाई का दायरा सामने आता है।

जहानाबाद में मनरेगा सदर प्रखंड के जेई अमन कुमार को 20 हजार रुपये लेते पकड़े जाने की बात सामने आई है। वहीं, शेखपुरा DTO कार्यालय में तैनात बड़ा बाबू कुणाल को 15 हजार रुपये लेते गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है।

तीनों मामलों में निगरानी टीम संबंधित आरोपों और लेन-देन की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

अब आगे क्या करेगी निगरानी टीम?

दारोगा उपेंद्र शाह की गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगी। इसमें शिकायत की पूरी पृष्ठभूमि, वाहन जब्ती की प्रक्रिया और कथित रिश्वत मांगने से जुड़े तथ्यों को शामिल किया जा सकता है।

जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि इस मामले में केवल रिश्वत लेने का आरोप है या इसके पीछे किसी अन्य स्तर पर भी कोई भूमिका सामने आती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्रवाई का मुख्य आधार जमील अंसारी की शिकायत और उसके सत्यापन के बाद की गई ट्रैप कार्रवाई है।

यह मामला एक बार फिर सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी तंत्र की भूमिका को सामने लाता है। किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा।

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