पटना ADM के ठिकानों पर छापा, कैश और महंगी घड़ियों से मचा हड़कंप
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में पटना ADM निगरानी कार्रवाई को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पटना ADM निगरानी कार्रवाई के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एडीएम (सप्लाई) रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी से जुड़े पटना और बेगूसराय के ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति यानी Disproportionate Assets के मामले में की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, महंगी घड़ियां, आभूषण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले हैं।
ADM दंपती के कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने सोमवार को रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी के पटना तथा बेगूसराय स्थित परिसरों पर कार्रवाई की। रविंद्र कुमार दिवाकर फिलहाल पटना में एडीएम (आपूर्ति) के पद पर तैनात हैं, जबकि उनकी पत्नी दानापुर में जिला अवर निबंधक यानी सब-रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं।
तलाशी अभियान पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र स्थित कश्यप ग्रीन सिटी के आवास समेत अन्य परिसरों और बेगूसराय स्थित पैतृक आवास से जुड़े स्थानों पर चलाया गया। निगरानी टीम ने वहां मौजूद नकदी, आभूषण, घड़ियों और संपत्ति से संबंधित कागजात को जांच के दायरे में लिया।
निगरानी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज केस और न्यायालय से मिले वारंट के आधार पर की गई। रिपोर्टों में केस नंबर 113/26 का भी उल्लेख है।
कितनी नकदी और कितनी घड़ियां मिलीं?
छापेमारी में बरामद नकदी और घड़ियों को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी और 35 से ज्यादा महंगी घड़ियों की जानकारी दी गई थी।
वहीं, बाद की रिपोर्ट में टाइम्स ऑफ इंडिया ने निगरानी विभाग के हवाले से करीब 79 लाख रुपये नकद और 48 घड़ियां बरामद होने की जानकारी दी है। इन घड़ियों की कीमत लगभग 6 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने की भी जानकारी दी गई।
इसलिए बरामदगी का अंतिम आंकड़ा निगरानी विभाग की विस्तृत आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही स्पष्ट माना जाएगा।
तलाशी के दौरान नकदी की गिनती के लिए मशीन का इस्तेमाल किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। टीम ने बरामद सामान और दस्तावेजों को सूचीबद्ध कर उनका सत्यापन शुरू किया।
बेगूसराय के पैतृक आवास पर भी हुई कार्रवाई
निगरानी टीम ने बेगूसराय में रविंद्र कुमार दिवाकर के पैतृक आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। यहां से संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है।
जांच का एक अहम हिस्सा इन दस्तावेजों और अधिकारियों द्वारा घोषित आय एवं संपत्ति के विवरण के बीच तुलना करना है। निगरानी टीम यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद चल-अचल संपत्तियों का वास्तविक मूल्य कितना है और उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से उसका क्या संबंध है।
रिपोर्टों के मुताबिक, तलाशी में जमीन, फ्लैट और अन्य संपत्तियों से जुड़े कागजात भी मिले हैं। इन दस्तावेजों की जांच के बाद संपत्तियों का मूल्यांकन और आय से उनका मिलान किया जाएगा।
आय से अधिक संपत्ति के मामले में क्या है जांच का आधार?
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी सामान्य तौर पर अधिकारी की ज्ञात और घोषित आय की तुलना उसके नाम या उससे जुड़े लोगों के नाम पर मौजूद संपत्तियों और निवेश से करती है।
इस मामले में भी नकदी, आभूषण, घड़ियां, बैंक एवं निवेश संबंधी दस्तावेज और अचल संपत्ति के कागजात जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। हालांकि, किसी संपत्ति या बरामद सामान का मिलना अपने आप में अवैध आय साबित नहीं करता। अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
निगरानी विभाग ने मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू की है। तलाशी से मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल निगरानी टीम का फोकस बरामद नकदी, आभूषण, घड़ियों और संपत्ति के दस्तावेजों का सत्यापन करने पर है। इसके साथ ही अलग-अलग ठिकानों से मिली सामग्री को केस रिकॉर्ड और अधिकारियों द्वारा घोषित संपत्ति से मिलाया जा रहा है।
तलाशी पूरी होने के बाद बरामद सामान और संपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद जांच की दिशा और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी मामला जांच के चरण में है। इसलिए बरामदगी और आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय निगरानी विभाग की जांच और अदालत की आगे की प्रक्रिया को अंतिम आधार माना जाएगा।
