पारिवारिक लाभ योजना बिहार: ऑफलाइन फॉर्म से पाएं ₹20,000
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परिवार में कमाने वाले मुख्य सदस्य का अचानक दुनिया से चले जाना किसी भी घर की कमर तोड़ देता है। दुख की इस घड़ी में आर्थिक तंगी एक और बड़ा पहाड़ बनकर टूटती है। सरकार इस जमीनी हकीकत को समझती है, और इसीलिए समाज कल्याण विभाग द्वारा 'राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना' (National Family Benefit Scheme - NFBS) चलाई जा रही है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेना लोहे के चने चबाने जैसा है, खासकर तब जब सारा सिस्टम ऑनलाइन हो रहा हो। लेकिन सच्चाई यह है कि पटना और बिहार के सभी जिलों में आज भी इस योजना के लिए ऑफलाइन आवेदन (Offline Form) ब्लॉक ऑफिस यानी प्रखंड कार्यालय के RTPS काउंटर पर ही सबसे ज्यादा कारगर साबित होते हैं। अगर आपके आस-पड़ोस या रिश्तेदारी में किसी गरीब परिवार के साथ ऐसी अनहोनी हुई है, तो उन्हें ₹20,000 की यह सरकारी सहायता दिलाने में आप उनकी मदद कर सकते हैं। आइए, बिना किसी घुमाव-फिराव के समझते हैं कि इसका ऑफलाइन फॉर्म कैसे भरा जाता है और ब्लॉक से लेकर बैंक खाते तक पैसा पहुँचने का असली प्रोसेस क्या है।
पारिवारिक लाभ योजना असल में क्या है?
यह केंद्र और राज्य सरकार की एक संयुक्त योजना है, जिसे समाज कल्याण विभाग चलाता है। इसका सीधा मकसद गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले उन परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद पहुँचाना है, जिनके घर के मुख्य कमाने वाले (Primary Earner) की मृत्यु हो गई हो। मृत्यु चाहे सामान्य बीमारी से हुई हो या किसी हादसे में, सरकार आश्रित परिवार को ₹20,000 की एकमुश्त राशि (One-time grant) सीधे उनके बैंक खाते में भेजती है।
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी शर्तें (Eligibility)
ब्लॉक ऑफिस जाने से पहले यह पक्का कर लें कि पीड़ित परिवार सरकार की इन शर्तों को पूरा करता हो, वर्ना फॉर्म रिजेक्ट होने में देर नहीं लगती:
मृतक की उम्र: जिस व्यक्ति की मृत्यु हुई है, उसकी उम्र 18 वर्ष से ज्यादा और 59 वर्ष से कम (18 से 59 साल के बीच) होनी चाहिए। 60 साल या उससे ऊपर वालों पर यह योजना लागू नहीं होती।
कमाई का मुख्य जरिया: मरने वाला व्यक्ति परिवार का मुख्य कमाऊ सदस्य होना चाहिए। वह महिला हो या पुरुष, इससे फर्क नहीं पड़ता।
गरीबी रेखा (BPL): परिवार BPL श्रेणी का होना चाहिए। अगर BPL सूची में नाम नहीं है, तो पारिवारिक आय का प्रमाण पत्र देना होगा (ग्रामीण क्षेत्र के लिए अधिकतम ₹46,000 और शहरी क्षेत्र के लिए ₹56,000 सालाना)।
आश्रित का अधिकार: आवेदन वही कर सकता है जो मृतक पर पूरी तरह आश्रित हो (जैसे- पत्नी, पति, नाबालिग बच्चे या अविवाहित बेटी)।
समय सीमा: मृत्यु के 1 साल (365 दिन) के भीतर आवेदन करना जरूरी है।
फॉर्म भरने से पहले तैयार रखें ये डॉक्यूमेंट्स
बिहार के RTPS काउंटर पर सबसे ज्यादा फॉर्म सिर्फ इसलिए लौट जाते हैं क्योंकि फाइल में कोई न कोई कागज कम होता है। अपनी फाइल में इन कागजातों की फोटोकॉपी (स्व-हस्ताक्षरित) जरूर लगा लें:
मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): पंचायत या ब्लॉक से बना हुआ असली मृत्यु प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी।
मृतक का आधार कार्ड और पहचान पत्र: जो साबित करे कि उनकी उम्र 18 से 59 साल के बीच थी।
आवेदक का आधार कार्ड: जो व्यक्ति फॉर्म भर रहा है (जैसे मृतक की पत्नी), उसका आधार कार्ड।
BPL राशन कार्ड या आय प्रमाण पत्र: गरीबी रेखा के नीचे होने का सबूत।
बैंक पासबुक (Bank Passbook): आवेदक के बैंक खाते के पहले पन्ने की स्पष्ट फोटोकॉपी (खाता आधार से लिंक होना चाहिए)।
आवासीय प्रमाण पत्र (Residence Certificate): बिहार का स्थायी निवासी होने का प्रमाण।
एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट (अगर लागू हो): यदि मृत्यु किसी दुर्घटना, हत्या या सांप काटने से हुई है, तो पुलिस की FIR और पोस्टमार्टम रिपोर्ट देना अनिवार्य है। सामान्य मृत्यु में इसकी जरूरत नहीं है।
पासपोर्ट साइज फोटो: आवेदक की 3 पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो।
ऑफलाइन फॉर्म (Application Form) कैसे प्राप्त करें और भरें?
यह इस प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा है। किसी भी साइबर कैफे वाले पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय खुद फॉर्म को समझना जरूरी है।
1. फॉर्म कहाँ से लाएं?
अपने ब्लॉक (प्रखंड) कार्यालय के RTPS काउंटर पर जाएं। वहाँ कर्मचारी से "राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना" का फॉर्म मांगें। कई बार स्टेशनरी या ब्लॉक के बाहर फॉर्म बेचने वालों के पास भी यह प्रपत्र 10-20 रुपये में मिल जाता है।
2. फॉर्म भरने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
फॉर्म में दो-तीन पेज होते हैं। इसे नीले या काले पेन से साफ-साफ हिंदी में भरें:
व्यक्तिगत विवरण: सबसे ऊपर आवेदक अपना नाम, पिता/पति का नाम, पूरा पता (ग्राम, पंचायत, वार्ड नंबर, थाना, जिला) साफ अक्षरों में लिखे।
मृतक की जानकारी: जिस व्यक्ति की मृत्यु हुई है उसका पूरा नाम, मृत्यु की तारीख, और मृत्यु का कारण (बीमारी या दुर्घटना) भरें।
उम्र का प्रमाण: मृतक की उम्र वाले कॉलम में सही उम्र लिखें (जो आधार या वोटर आईडी से मैच करती हो)।
आश्रितों की सूची: परिवार में कितने लोग बचे हैं और उनका मृतक से क्या रिश्ता है, यह जानकारी टेबल में भरनी होती है।
बैंक डिटेल्स (Bank Details): अपना बैंक खाता नंबर, बैंक का नाम, ब्रांच और IFSC कोड बहुत ध्यान से भरें। यही वो जगह है जहाँ एक नंबर गलत होने पर पैसा फँस जाता है।
मुखिया/सरपंच का हस्ताक्षर: फॉर्म के एक हिस्से में स्थानीय मुखिया, पंचायत समिति सदस्य या वार्ड पार्षद से यह प्रमाणित करवाना होता है कि यह परिवार गरीब है और मृत्यु की घटना सत्य है। उनका मोहर और साइन जरूर लगवाएं।
फॉर्म कहाँ जमा करें और आगे क्या होगा?
पूरी फाइल तैयार होने के बाद, सारे डॉक्यूमेंट्स को फॉर्म के साथ स्टेपल करें।
RTPS काउंटर पर सबमिशन: ब्लॉक ऑफिस के RTPS काउंटर पर अपनी फाइल जमा करें। जमा करते ही ऑपरेटर आपको एक पावती रसीद (Acknowledgement Receipt) देगा। इस रसीद पर एक एप्लीकेशन नंबर लिखा होता है, इसे संभाल कर रखें।
कर्मचारी द्वारा जाँच: फॉर्म जमा होने के बाद आपके पंचायत के 'पंचायत सचिव' (Panchayat Sachiv) या राजस्व कर्मचारी (Karamchari) को फाइल भेजी जाती है। वे आपके घर आकर या फोन पर यह वेरिफाई करते हैं कि घटना सच है और परिवार वास्तव में हकदार है।
BDO और SDO का अप्रूवल: कर्मचारी की रिपोर्ट के बाद, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) अपनी मुहर लगाते हैं और फाइल को अनुमंडल (SDO) या जिला कार्यालय (DDC) भेज दिया जाता है।
पैसा खाते में आना: सब कुछ सही पाए जाने पर, ट्रेजरी (Treasury) के माध्यम से ₹20,000 सीधे आवेदक के बैंक खाते (DBT के माध्यम से) में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में अमूमन 30 से 45 दिन का समय लगता है।
पारिवारिक लाभ योजना: क्विक-इन्फो समरी
| जानकारी | विवरण |
| योजना का नाम | राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (NFBS) |
| लाभार्थी | मृतक के आश्रित (पत्नी/पति/बच्चे) |
| सहायता राशि | ₹20,000 (एकमुश्त बैंक खाते में) |
| मृतक की आयु सीमा | 18 वर्ष से 59 वर्ष के बीच |
| आय सीमा | BPL परिवार या निर्धारित आय सीमा के अंदर |
| आवेदन का तरीका | ब्लॉक कार्यालय (RTPS काउंटर) पर ऑफलाइन |
| आवेदन की समय सीमा | मृत्यु के 1 वर्ष के भीतर |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या फॉर्म जमा करने की कोई फीस लगती है?
बिल्कुल नहीं। RTPS काउंटर पर फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क (फ्री) है। अगर कोई बिचौलिया इसके लिए पैसे मांगता है, तो आप ब्लॉक अधिकारी (BDO) से सीधे शिकायत कर सकते हैं।
2. अगर मृतक की उम्र 60 साल थी, तो क्या इस योजना का पैसा मिलेगा?
नहीं। इस योजना का नियम बहुत स्पष्ट है कि मृतक की आयु 18 से अधिक और 60 वर्ष से कम (यानी अधिकतम 59 वर्ष) होनी चाहिए। 60 या उससे ऊपर के लिए यह लाभ नहीं है।
3. दुर्घटना में मृत्यु होने पर क्या साधारण डेथ सर्टिफिकेट से काम चल जाएगा?
अगर मृत्यु किसी सड़क हादसे, डूबने, या अन्य अप्राकृतिक कारण से हुई है, तो मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ पुलिस की FIR कॉपी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट लगाना अनिवार्य है।
4. पैसा आने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर फॉर्म जमा करने और पंचायत कर्मचारी के सत्यापन (Verification) के बाद 1 से डेढ़ महीने (30-45 दिन) के भीतर राशि सीधे बैंक खाते में आ जाती है। फण्ड की कमी होने पर थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
5. अगर बैंक खाता जन-धन योजना वाला है, तो क्या पैसा आएगा?
हाँ, जन-धन खाता या कोई भी सेविंग अकाउंट मान्य है। बस यह ध्यान रखें कि आपका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक (NPCI Seeded) होना चाहिए, क्योंकि सरकार पैसा DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए ही भेजती है।
विपत्ति के समय में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना किसी को अच्छा नहीं लगता, लेकिन सही जानकारी हो तो आधी परेशानी वहीं खत्म हो जाती है। पटना और बिहार के सभी जिलों में प्रशासन अब ऐसी योजनाओं को लेकर काफी सतर्क है। आपको बस अपने कागज दुरुस्त रखने हैं और सही तरीके से ब्लॉक के RTPS काउंटर पर फाइल बढ़ानी है। अगर आपके आस-पास कोई ऐसा मजबूर परिवार है, तो यह जानकारी उन तक जरूर पहुँचाएं, ताकि संकट की इस घड़ी में उन्हें उनका हक मिल सके।
