ललन सिंह के घर अचानक पहुंचे नीतीश, बंद कमरे में हुई लंबी बैठक
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और ललन सिंह की अचानक हुई मुलाकात ने JDU को लेकर चल रही चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है। नीतीश कुमार 19 सितंबर 2026 को पटना स्थित ललन सिंह के सरकारी आवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में काफी देर तक बातचीत हुई। मुलाकात ऐसे समय हुई जब एक दिन पहले JDU की बैठक से ललन सिंह की गैरमौजूदगी चर्चा में रही थी। हालांकि, बैठक के बाद दोनों नेताओं की ओर से मुलाकात के एजेंडे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया गया।
JDU में चर्चा के बीच अचानक ललन सिंह से मिले नीतीश
19 सितंबर को नीतीश कुमार का ललन सिंह के आवास पहुंचना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई और मुलाकात के बाद ललन सिंह नीतीश कुमार को उनकी गाड़ी तक छोड़ने भी पहुंचे।
इस मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई।
हालांकि, मुलाकात का समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे ठीक एक दिन पहले JDU की पटना में बैठक हुई थी, जिसमें ललन सिंह और राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति पर पार्टी के भीतर और बाहर सवाल उठे थे।
बैठक से गैरमौजूदगी पर ललन सिंह ने क्या कहा?
18 सितंबर की JDU बैठक में शामिल नहीं होने के सवाल पर ललन सिंह ने 19 सितंबर को सफाई दी। उन्होंने पार्टी में किसी तरह के मतभेद से इनकार किया और कहा कि JDU एकजुट है।
ललन सिंह के मुताबिक, उनका कार्यक्रम गुजरात में था। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नेताओं को उनके कार्यक्रम की जानकारी थी और उनकी संजय झा समेत अन्य नेताओं से बातचीत हुई थी।
उन्होंने JDU में लंबे समय से चली आ रही आंतरिक लोकतंत्र और आपसी विचार-विमर्श की परंपरा का भी उल्लेख किया। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि बैठक में उनकी गैरमौजूदगी को पार्टी के भीतर किसी विवाद का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
JDU ने भी बैठक को लेकर दिया था स्पष्टीकरण
ललन सिंह की अनुपस्थिति पर JDU की ओर से भी सफाई सामने आई थी। पार्टी नेताओं ने बताया कि 18 सितंबर का कार्यक्रम मुख्य रूप से विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के प्रशिक्षण एवं प्रबोधन से संबंधित था।
ABP की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी नेताओं ने कहा कि ललन सिंह और कुछ अन्य नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए थे, लेकिन इससे पार्टी में किसी बड़े विवाद का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।
इसी बीच बैठक में पार्टी के संगठन, नेतृत्व और कुछ नेताओं के बयानों को लेकर चर्चा भी सामने आई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में विधायकों द्वारा सवाल उठाए जाने का दावा किया गया है। इन दावों को संबंधित रिपोर्टों के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि पार्टी में टूट के स्थापित तथ्य के रूप में।
अनंत सिंह और नीरज कुमार का विवाद भी चर्चा में
JDU के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम में मोकामा विधायक अनंत सिंह और पार्टी नेता नीरज कुमार के बीच सार्वजनिक बयानबाजी भी महत्वपूर्ण है।
दोनों नेताओं के बीच पटना स्नातक विधान परिषद चुनाव को लेकर मतभेद सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ चुनावी रुख अपनाने और निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन की बात कही है।
इस विवाद के कारण भी JDU के भीतर राजनीतिक चर्चा बढ़ी है। हालांकि, अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद को सीधे नीतीश कुमार और ललन सिंह की मुलाकात का कारण बताने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या ललन सिंह से मुलाकात का संबंध MLC चुनाव से है?
नीतीश कुमार और ललन सिंह की बैठक को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में संभावित मुद्दों पर चर्चा की गई है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट ने इसे पटना स्नातक MLC चुनाव और अनंत सिंह से जुड़े मामले से जोड़ा है।
दूसरी ओर, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में दोनों नेताओं ने स्वयं यह नहीं बताया है कि बंद कमरे की बातचीत में कौन-कौन से मुद्दे उठे।
इसलिए फिलहाल MLC चुनाव या अनंत सिंह के खिलाफ किसी संभावित कार्रवाई को इस मुलाकात का निश्चित एजेंडा बताना जल्दबाजी होगी। आगे JDU या संबंधित नेताओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
मुलाकात के बाद क्या बदला?
इस मुलाकात का सबसे स्पष्ट तथ्य यही है कि JDU की बैठक से ललन सिंह की गैरमौजूदगी के अगले दिन नीतीश कुमार उनसे मिलने उनके आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई, लेकिन बातचीत के विषय को सार्वजनिक नहीं किया गया।
ललन सिंह पहले ही पार्टी में मतभेद की चर्चाओं को खारिज कर चुके हैं। ऐसे में अब राजनीतिक नजर इस बात पर रहेगी कि JDU नेतृत्व अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद और आगामी MLC चुनाव को लेकर क्या कदम उठाता है।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से इतना जरूर स्पष्ट है कि JDU से जुड़े कई मुद्दे एक साथ राजनीतिक चर्चा में हैं। लेकिन इन घटनाओं के आधार पर पार्टी में टूट या किसी अंतिम संगठनात्मक फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।
