मीसा भारती पहुंचीं थाने, CM सम्राट के खिलाफ FIR की मांग, मचा बवाल
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पटना में मीसा भारती ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर सचिवालय थाने में आवेदन दिया। मीसा भारती का आरोप है कि जमुई की छेड़खानी की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई, जिससे पीड़िता की पहचान उजागर होने का दावा किया गया है। पाटलिपुत्र सांसद और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी शुक्रवार देर शाम सचिवालय थाना पहुंचीं। उनके साथ कुछ समर्थक भी मौजूद थे। थाने में उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी।
क्या है मीसा भारती की शिकायत?
मीसा भारती के आवेदन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख किया गया है। शिकायत के मुताबिक, जमुई मामले की नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई थी। आरोप है कि मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर पोस्ट की गई। शिकायत में कहा गया है कि पोस्ट को बाद में हटा दिया गया, लेकिन तब तक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आ चुकी थी। मीसा भारती ने इसी आधार पर पुलिस से मामले की जांच करने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने भी उठाया मामला
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सवाल उठाए। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होना कानून के तहत गंभीर विषय है। तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि अगर पुलिस इस मामले में कार्रवाई नहीं करती है, तो राजद अदालत का रुख कर सकता है। यानी अब यह मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी कार्रवाई की मांग तक पहुंच गया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति पुलिस की जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
जमुई छेड़खानी मामले में क्या हुआ था?
दरअसल, जमुई की एक छात्रा से कथित छेड़खानी का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया। घटना से जुड़ी पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान तस्वीरें ली गईं। आरोप है कि इन्हीं तस्वीरों में से एक तस्वीर मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा की गई। बाद में पोस्ट को हटा दिया गया। अब विपक्ष का आरोप है कि तस्वीर हटाए जाने के बावजूद नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने का खतरा पैदा हुआ। इसी बिंदु को आधार बनाकर मीसा भारती ने थाने में शिकायत दी है।
नाबालिग पीड़िता की पहचान को लेकर क्या नियम हैं?
नाबालिग पीड़ितों से जुड़े मामलों में उनकी पहचान की सुरक्षा कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेष रूप से यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने को लेकर कानूनी प्रतिबंध हैं। इसी वजह से ऐसे मामलों में पीड़िता की तस्वीर, नाम, पता या ऐसी जानकारी साझा करने को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है, जिससे उसकी पहचान सामने आ सकती है। मीसा भारती की शिकायत में भी इसी कानूनी पहलू को प्रमुख आधार बनाया गया है। हालांकि, किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह पुलिस की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया में तय होगा।
अब आगे क्या हो सकता है?
सचिवालय थाने में आवेदन दिए जाने के बाद पुलिस के सामने शिकायत की जांच का सवाल है। पुलिस उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट, उसके स्क्रीनशॉट और पोस्ट से जुड़े अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है। यदि जांच में प्रथमदृष्टया किसी कानूनी प्रावधान के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो आगे नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही मानी जाएगी। इस मामले में आगे पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, यदि मामला अदालत तक जाता है तो न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पूरे विवाद के कानूनी पहलुओं पर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
राजनीतिक विवाद भी बढ़ने के संकेत
मामले ने बिहार की राजनीति में भी नया विवाद खड़ा कर दिया है। राजद की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि शिकायत का केंद्र नाबालिग पीड़िता की पहचान से जुड़े कानूनी प्रावधान हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मीसा भारती ने सचिवालय थाने में लिखित आवेदन देकर FIR की मांग की है। अब इस शिकायत पर पुलिस क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।