खगड़िया मुक्तिधाम पानी में डूबा, अंतिम संस्कार नदी किनारे; उठे सवाल
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👉 WhatsApp से जुड़ेंखगड़िया | खगड़िया | दीपक कुमार
खगड़िया नगर परिषद का मुक्तिधाम जलजमाव के कारण चर्चा में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ का पानी बढ़ने पर मुक्तिधाम परिसर डूब जाता है और लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार बूढ़ी गंडक नदी के किनारे करना पड़ता है। मुक्तिधाम जलजमाव की यह स्थिति अब सिर्फ सुविधा की समस्या नहीं, बल्कि योजना के स्थल चयन और उसकी उपयोगिता को लेकर भी सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस जगह मुक्तिधाम का निर्माण कराया गया, वहां पहले से हर साल बाढ़ का पानी पहुंचता रहा है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि निर्माण से पहले स्थल की बाढ़ संबंधी स्थिति का आकलन किस स्तर पर किया गया था।
मुक्तिधाम डूबा तो अंतिम संस्कार के लिए बदली जगह
खगड़िया नगर परिषद क्षेत्र में बने मुक्तिधाम का उद्देश्य लोगों को अंतिम संस्कार के लिए व्यवस्थित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराना था। लेकिन बाढ़ या जलस्तर बढ़ने के दौरान यही परिसर पानी में डूबने की स्थिति में पहुंच जाता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, ऐसे समय में परिवारों के सामने अपने मृत परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक जगह तलाशने की मजबूरी पैदा हो जाती है।
बताया जा रहा है कि कई लोग बूढ़ी गंडक नदी के किनारे अंतिम संस्कार करने को मजबूर हो रहे हैं। इससे बरसात और बाढ़ के मौसम में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और अधिक कठिन हो जाती है।
यह स्थिति खास तौर पर उन परिवारों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है, जिन्हें अचानक अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी पड़ती है।
जब पहले से आता था बाढ़ का पानी, तो यहां क्यों बना मुक्तिधाम?
स्थानीय लोगों के सवालों का सबसे अहम केंद्र मुक्तिधाम का स्थल चयन है।
लोगों का कहना है कि निर्माण से पहले भी इस इलाके में हर साल बाढ़ का पानी आने की जानकारी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि परियोजना तैयार करते समय क्या बाढ़ के संभावित खतरे को ध्यान में रखा गया था।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर निर्माण की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों या संबंधित एजेंसियों की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं है।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि परियोजना में नियमों का उल्लंघन हुआ है। हालांकि, जलजमाव की मौजूदा स्थिति स्थल चयन और योजना की व्यवहारिकता की जांच की जरूरत जरूर दिखाती है।
सरकारी राशि से बनी योजना पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों ने मुक्तिधाम के निर्माण पर खर्च हुई सरकारी राशि को लेकर भी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
लोग जानना चाहते हैं कि परियोजना की कुल लागत कितनी थी, पैसा किस सरकारी मद से मिला और निर्माण की निगरानी किस विभाग या एजेंसी ने की।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि योजना कोरोना काल की किसी योजना या मद से जुड़ी थी, तो उस राशि का इस्तेमाल किस प्रावधान के तहत किया गया और परियोजना की निगरानी कैसे हुई।
इन सवालों का सही जवाब संबंधित सरकारी दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकता है। इसलिए लोगों की मांग है कि परियोजना से जुड़ी स्वीकृति, लागत, निर्माण एजेंसी और तकनीकी जांच की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
जनता के सामने जवाबदेही का मुद्दा
मुक्तिधाम के जलमग्न होने की स्थिति ने नगर परिषद और संबंधित विभाग की जवाबदेही पर भी चर्चा शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी सार्वजनिक परियोजना की सफलता सिर्फ उसके निर्माण से तय नहीं होती। उसका इस्तेमाल अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में कितना प्रभावी है, यह भी महत्वपूर्ण है।
अगर बाढ़ के समय मुक्तिधाम का उपयोग ही संभव नहीं हो पाता, तो उसकी उपयोगिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोग चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और यह पता लगाएं कि पानी परिसर में क्यों भरता है। साथ ही यह भी देखा जाए कि जलनिकासी, ऊंचाई, तटबंध या अन्य सुरक्षा उपायों की जरूरत है या नहीं।
जनता पूछ रही है ये बड़े सवाल
मुक्तिधाम की मौजूदा स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों के सामने कई सवाल हैं:
- जिस जगह हर साल बाढ़ का पानी आता था, वहां मुक्तिधाम बनाने का निर्णय क्यों लिया गया?
- निर्माण से पहले बाढ़ और जलस्तर का तकनीकी आकलन हुआ था या नहीं?
- परियोजना की स्वीकृति किन मानकों के आधार पर दी गई?
- मुक्तिधाम निर्माण की कुल लागत कितनी थी?
- राशि किस योजना या सरकारी मद से जारी हुई?
- निर्माण कार्य की गुणवत्ता और स्थल का निरीक्षण किसने किया?
- बाढ़ के दौरान मुक्तिधाम को सुरक्षित रखने के लिए क्या प्रावधान किए गए थे?
- वर्तमान समस्या के स्थायी समाधान की जिम्मेदारी किस विभाग की है?
इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि समस्या का मूल कारण क्या है और भविष्य में इससे कैसे निपटा जा सकता है।
अब जांच और स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले को केवल मौसमी जलजमाव मानकर छोड़ने के बजाय इसकी तकनीकी जांच कराई जाए।
यदि स्थल पर बाढ़ का खतरा नियमित रूप से बना रहता है, तो विशेषज्ञों की मदद से यह देखा जाना चाहिए कि मुक्तिधाम को सुरक्षित बनाने के लिए कौन से व्यावहारिक उपाय संभव हैं।
इसके साथ ही परियोजना से जुड़े दस्तावेजों, स्वीकृति प्रक्रिया और खर्च की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि योजना किस उद्देश्य से बनाई गई थी और वर्तमान स्थिति में उसके इस्तेमाल को लेकर क्या समाधान निकाला जा सकता है।
यह मामला किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने से ज्यादा सार्वजनिक योजना की उपयोगिता, स्थल चयन और सरकारी धन के पारदर्शी इस्तेमाल से जुड़ा है।
खगड़िया नगर परिषद और संबंधित विभाग की ओर से यदि इस मामले में आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तो उससे कई सवालों का जवाब मिल सकता है।
फिलहाल तस्वीर यही है कि जिस जगह लोगों को अपने परिजनों को अंतिम विदाई देने की सुविधा मिलनी चाहिए, वहां बाढ़ का पानी पहुंचने से परेशानी बढ़ रही है।
सवाल सीधा है—अगर मुक्तिधाम ही बाढ़ के समय उपयोग के लायक नहीं रहता, तो इस समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब और कैसे होगा?
📍 मामला: खगड़िया नगर परिषद का मुक्तिधाम
स्थिति: बाढ़/जलजमाव के कारण अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक स्थान का सहारा लेने की स्थानीय लोगों की शिकायत
