जीविका दीदी: महिलाओं के लिए रोजगार और लोन कैसे पाएं?

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नमस्कार दोस्तों! पटना से लेकर बिहार के सभी जिलों तक, अगर आज के समय में महिला सशक्तिकरण की कोई सबसे बड़ी मिसाल है, तो वो हैं हमारी 'जीविका दीदी'। एक समय था जब गांव-देहात की महिलाओं को घर की चारदीवारी तक ही सीमित माना जाता था। पैसे-पैसे के लिए उन्हें महाजनों या साहूकारों के आगे हाथ फैलाना पड़ता था, जो भारी भरकम ब्याज वसूलते थे। लेकिन अब हवा बदल चुकी है।

बतौर एक पत्रकार, जब मैं ग्राउंड पर जाता हूँ तो देखता हूँ कि बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (BRLPS) यानी 'जीविका' ने कैसे लाखों महिलाओं की किस्मत बदल दी है। अगर आप या आपके घर की कोई महिला रोजगार करना चाहती है, अपना कोई छोटा-मोटा बिज़नेस शुरू करना चाहती है, लेकिन पैसों की कमी आड़े आ रही है, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है।

आज मैं आपको एकदम सीधी और सच्ची भाषा में बताऊंगा कि आप अपने गांव या वार्ड की जीविका दीदी के माध्यम से रोजगार के नए अवसर कैसे खोज सकते हैं और बिना किसी गारंटी के लाखों रुपये तक का लोन कैसे पा सकते हैं। वीडियो देखने या इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है, बस इस जानकारी को पूरा पढ़ें।

जीविका योजना असल में है क्या? (ग्राउंड रियलिटी)

सरकारी कागजों में इसे 'बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोजेक्ट' कहा जाता है, जिसे वर्ल्ड बैंक की मदद से शुरू किया गया था। लेकिन आम बोलचाल में हम इसे 'जीविका' कहते हैं। इसका सीधा सा फॉर्मूला है— महिलाओं की ताकत को एक साथ जोड़ना। इसमें गांव की 10 से 15 गरीब और मध्यम वर्गीय महिलाओं को मिलाकर एक 'स्वयं सहायता समूह' (Self Help Group - SHG) बनाया जाता है।

जब ये महिलाएं एक साथ जुड़ती हैं, तो सरकार और बैंक दोनों इन पर भरोसा करते हैं। इसी भरोसे के दम पर उन्हें रोजगार की ट्रेनिंग और बिज़नेस के लिए लोन दिया जाता है।

जीविका के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजगार के कौन-कौन से अवसर हैं?

अक्सर लोगों को लगता है कि जीविका में सिर्फ सिलाई-बुनाई का काम होता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। आज जीविका दीदियों के लिए रोजगार के अनगिनत रास्ते खुल गए हैं। आइए देखते हैं कि आप कौन-कौन सा काम पा सकती हैं:

  • कम्युनिटी मोबिलाइजर (CM) और बुक कीपर (BK): हर समूह को चलाने के लिए एक CM (जो महिलाओं को जोड़ती है) और एक BK (जो रजिस्टर मेंटेन करती है) की जरूरत होती है। अगर महिला थोड़ी पढ़ी-लिखी है, तो उसे यह काम मिल जाता है जिसके लिए हर महीने एक तय मानदेय (Honorarium) मिलता है।

  • बैंक मित्र (Bank Mitra): यह एक बहुत ही शानदार जॉब है। इसमें महिला को बैंक शाखा में बैठाया जाता है ताकि वह जीविका से जुड़ी अन्य महिलाओं का Form भरने, पैसे निकालने और जमा करने में मदद कर सके। इसके लिए उन्हें कमीशन और सैलरी दोनों मिलती है।

  • पशु सखी और कृषि सखी: गांव में खेती-किसानी और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाती है। ये सखियां गांव वालों को अच्छी खेती और पशुओं की देखभाल के तरीके बताती हैं और इसके बदले में जीविका से पैसा कमाती हैं।

  • नीरा उत्पादन और सिलाई केंद्र: शराबबंदी के बाद बिहार सरकार ने नीरा उत्पादन को बढ़ावा दिया है, जिसमें जीविका दीदियों की बड़ी भूमिका है। इसके अलावा रेडीमेड कपड़ों के कारखाने (जैसे मुजफ्फरपुर का लेदर और टेक्सटाइल क्लस्टर) में सीधा रोजगार मिलता है।

  • राशन दुकान और अस्पताल की कैंटीन: बिहार के कई जिलों में सदर अस्पतालों की कैंटीन और पीडीएस (PDS) राशन की दुकानें अब जीविका दीदियों के हवाले कर दी गई हैं। यह एक पक्की कमाई का जरिया है।

बिना गारंटी के लोन कैसे मिलता है? (Loan Opportunities)

अगर आप ऊपर दिए गए काम नहीं करना चाहतीं, बल्कि अपनी कोई चूड़ी की दुकान, किराना स्टोर, या गाय-भैंस पालन शुरू करना चाहती हैं, तो जीविका आपको आसान किस्तों पर लोन देती है। वह भी बिना किसी जमीन के कागज या गारंटी के!

लोन तीन चरणों में मिलता है:

  1. रिवॉल्विंग फंड (Revolving Fund - RF): जब आपका समूह 3 महीने पुराना हो जाता है और आप नियमित मीटिंग करती हैं, तो सरकार समूह के बैंक खाते में 15,000 रुपये का फंड देती है। इसे समूह की महिलाएं आपस में अपनी छोटी जरूरतों के लिए 1-2% के मामूली ब्याज पर ले सकती हैं।

  2. कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (CIF): कुछ और महीनों के बाद, समूह को ग्राम संगठन (VO) के माध्यम से लगभग 50,000 से 1,00,000 रुपये तक का फंड मिलता है। यह पैसा रोजगार शुरू करने के लिए होता है।

  3. बैंक लिंकेज (Bank Linkage): जब समूह का लेन-देन अच्छा होता है, तो सीधे बैंक (जैसे SBI या ग्रामीण बैंक) समूह को लाखों रुपये (3 लाख से 5 लाख तक) का लोन देते हैं। इसमें सरकार की तरफ से ब्याज पर भारी सब्सिडी (Interest Subvention) भी मिलती है।

स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: जीविका समूह से जुड़कर रोजगार और लोन कैसे पाएं?

अगर आप सोच रहे हैं कि यह सब बहुत मुश्किल है, तो घबराइए मत। मैंने पूरी प्रक्रिया को आसान स्टेप्स में बांट दिया है। बस इन्हें फॉलो करें:

स्टेप 1: अपने गांव की एक्टिव जीविका दीदी को खोजें

सबसे पहले अपने मोहल्ले या टोले में पता करें कि वहां कौन सी महिला जीविका समूह से जुड़ी है। हर वार्ड में कोई न कोई 'कम्युनिटी मोबिलाइजर' (CM दीदी) जरूर होती है। उनसे जाकर मिलें।

स्टेप 2: नया समूह (SHG) बनाएं

अगर आपके इलाके में कोई समूह नहीं है या उसमें जगह फुल है, तो अपने आस-पड़ोस की 10 से 15 महिलाओं को इकट्ठा करें जो जुड़ना चाहती हैं। CM दीदी की मदद से अपना एक नया स्वयं सहायता समूह बनाएं। समूह का कोई अच्छा सा नाम रखें (जैसे- सरस्वती जीविका महिला समूह)।

स्टेप 3: साप्ताहिक मीटिंग और बचत शुरू करें

समूह बनने के बाद हर हफ्ते एक तय दिन पर मीटिंग करें। मीटिंग में हर महिला को 10 या 20 रुपये (जो भी समूह तय करे) जमा करने होते हैं। यह पैसा आपके ही काम आएगा।

स्टेप 4: बैंक खाता और ऑनलाइन एंट्री (Online Portal Entry)

CM दीदी आपके समूह के सभी कागजात (आधार कार्ड, फोटो) लेकर ब्लॉक में स्थित जीविका ऑफिस (BPIU) में जाएंगी। वहां आपका डेटा जीविका के Online Portal पर चढ़ाया जाएगा। इसके बाद नज़दीकी बैंक में समूह का जॉइंट खाता (Joint Account) खुलेगा।

स्टेप 5: पंचसूत्र का पालन करें और लोन पाएं

जीविका में 5 नियम बहुत जरूरी हैं— नियमित बैठक, नियमित बचत, नियमित लेन-देन, नियमित कर्ज वापसी, और नियमित बही-खाता (Register Update)। जो समूह इसका पालन करता है, उसका फॉर्म कभी Reject नहीं होता और कुछ ही महीनों में उनके बैंक खाते में सरकार की तरफ से लाखों का फंड और रोजगार की ट्रेनिंग आने लगती है।

त्वरित जानकारी सारांश (Quick-Info Summary Table)

विवरण (Details)जानकारी (Information)
योजना का नामजीविका (बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन समिति)
लाभार्थीबिहार की सभी ग्रामीण और शहरी महिलाएं
समूह के लिए जरूरी संख्या10 से 15 महिलाएं
जरूरी डाक्यूमेंट्सआधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक पासबुक
मुख्य लाभकम ब्याज पर लोन, रोजगार प्रशिक्षण (Training), सरकारी जॉब्स में प्राथमिकता
लोन का प्रकारRF (15 हजार), CIF (1 लाख तक), Bank Linkage (लाखों में)

अक्सर पूछे जाने वाले 5 जरूरी सवाल (FAQs)

Q1: जीविका से जुड़ने के लिए क्या कोई फॉर्म भरने की फीस लगती है?

उत्तर: बिल्कुल नहीं! जीविका से जुड़ना पूरी तरह से फ्री है। अगर कोई भी व्यक्ति आपसे समूह में जुड़ने या लोन दिलाने के नाम पर पैसों की मांग करता है, तो आप तुरंत ब्लॉक के जीविका मैनेजर (BPM) से उसकी शिकायत कर सकते हैं।

Q2: मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हूँ, क्या मुझे लोन मिलेगा?

उत्तर: सौ प्रतिशत मिलेगा! जीविका योजना खास तौर पर गरीब और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए ही बनी है। अगर आप सिर्फ अपना नाम लिखना (Sign करना) भी सीख लें, तो आप आसानी से लोन लेकर अपना रोजगार शुरू कर सकती हैं।

Q3: लोन पर ब्याज (Interest) कितना लगता है?

उत्तर: समूह के अंदर दिए जाने वाले लोन पर आमतौर पर 1 से 2 रुपये सैकड़ा (प्रतिमाह) का मामूली ब्याज लगता है। सबसे अच्छी बात यह है कि समय पर लोन चुकाने पर सरकार ब्याज में सब्सिडी देती है, जिससे यह कर्ज बाजार के मुकाबले बहुत सस्ता पड़ता है।

Q4: क्या शहर में रहने वाली महिलाएं भी जीविका से जुड़ सकती हैं?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। जिस तरह गांवों में 'जीविका' काम करती है, उसी तरह शहरी क्षेत्रों में भी 'शहरी आजीविका मिशन' (NULM) के तहत महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं। आप अपने नगर निगम या नगर पंचायत कार्यालय में जाकर इसकी जानकारी ले सकती हैं।

Q5: अगर कोई महिला लोन लेकर न चुकाए तो क्या होगा?

उत्तर: चूंकि यह लोन किसी एक महिला को नहीं, बल्कि पूरे समूह की गारंटी पर मिलता है, इसलिए अगर कोई एक महिला पैसे नहीं चुकाती है, तो इसका असर पूरे समूह पर पड़ता है और भविष्य में समूह को मिलने वाले बड़े लोन रोक दिए जाते हैं। इसलिए समूह में आपसी विश्वास होना बहुत जरूरी है।

आगे की राह और मेरा सुझाव

बिहार की असली ताकत हमारे गांवों में बसती है, और इन गांवों की रीढ़ हमारी महिलाएं हैं। जीविका योजना ने साबित कर दिया है कि अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन और थोड़ा सा आर्थिक सपोर्ट मिले, तो वे गरीबी को जड़ से मिटा सकती हैं।

अगर आपके परिवार में या आस-पड़ोस में कोई महिला है जो घर बैठे परेशान है, तो उसे जीविका से जुड़ने के लिए जरूर प्रेरित करें। शुरुआत में सिर्फ 10-20 रुपये की बचत आपको आने वाले समय में खुद का मालिक बना सकती है। अपने कागजात (आधार, फोटो) आज ही Update करा लें।

दोस्तों, मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि आप तक एकदम सही और ग्राउंड-लेवल की जानकारी पहुंचे। अगर आपको यह आर्टिकल मददगार लगा हो, तो इसे सिर्फ अपने फोन तक सीमित न रखें। इस जानकारी को अपने Facebook Groups और WhatsApp पर अपनी जान-पहचान वाली दीदियों और भाइयों के साथ जरूर शेयर करें, ताकि बिहार के हर जिले, हर कोने की महिला आत्मनिर्भर बन सके। अगर आपका कोई सवाल है तो अपने स्थानीय जीविका कार्यालय से बेझिझक संपर्क करें!

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