जमुई कांड पर शिवानंद तिवारी का बड़ा बयान, शराबबंदी पर उठाए सवाल
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
जमुई कांड को लेकर बिहार की राजनीति में बहस तेज हो गई है। जमुई कांड के बाद राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने बिहार की शराबबंदी नीति पर सवाल उठाए हैं। जमुई कांड को शराबबंदी और कथित तौर पर बढ़ते नशे के चलन से जोड़ते हुए उन्होंने सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। हालांकि, यह शिवानंद तिवारी का दावा और राजनीतिक आकलन है; पुलिस की अब तक की जांच में घटना के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर है। मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी और SIT जांच की जानकारी सामने आई है।
जमुई घटना के बाद क्या बोले शिवानंद तिवारी?
शिवानंद तिवारी ने 24 सितंबर को प्रकाशित अपने बयान में जमुई की घटना को शराबबंदी की नीति से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़े आरोपी शराब तस्करी से जुड़े बताए जा रहे हैं और इसी आधार पर उन्होंने बिहार में शराबबंदी के प्रभाव पर व्यापक चर्चा की जरूरत बताई।
उनका कहना है कि शराब की कानूनी बिक्री पर रोक के बाद अवैध शराब और दूसरे नशीले पदार्थों का नेटवर्क बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ‘सूखे नशे’ का चलन बढ़ रहा है और इसका युवाओं पर असर पड़ रहा है।
हालांकि, जमुई मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 19 सितंबर को कोचिंग से लौट रहे नाबालिग लड़के और लड़की के साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार हुआ था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
शराबबंदी पर शिवानंद तिवारी ने क्या सवाल उठाए?
शिवानंद तिवारी ने बिहार में शराबबंदी लागू होने से पहले और बाद के राजस्व आंकड़ों का हवाला देते हुए शराब नीति में बदलाव के सामाजिक प्रभाव पर चर्चा की।
उनके मुताबिक, जब वह राबड़ी देवी सरकार में आबकारी मंत्री थे, तब आबकारी विभाग से सरकार को मिलने वाला राजस्व करीब 319 करोड़ रुपये था। उन्होंने दावा किया कि बाद में शराब की बिक्री बढ़ने के साथ यह राजस्व करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
तिवारी ने इसी तुलना के आधार पर कहा कि शराब की उपलब्धता बढ़ने से सामाजिक स्तर पर कई समस्याएं सामने आईं। उन्होंने महिलाओं के विरोध और परिवारों पर शराब के कथित आर्थिक प्रभाव का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े और उनके राजनीतिक निष्कर्ष उनके बयान का हिस्सा हैं।
बिहार सरकार ने 2016 में चरणबद्ध तरीके से पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। राज्य के मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल 2016 से देशी शराब पर रोक लागू हुई और बाद में 5 अप्रैल 2016 को पूर्ण शराबबंदी घोषित की गई।
'लड़के बरबाद हो रहे', तिवारी ने किस बात पर जताई चिंता?
शिवानंद तिवारी ने अपने बयान में युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब की कानूनी बिक्री बंद होने के बाद पैदा हुए खाली स्थान को शराब माफिया और अवैध नशे के कारोबार ने भरने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में नशीले पदार्थों की समस्या पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, इसका असर युवाओं पर पड़ रहा है और सरकार को मौजूदा नीति की समीक्षा करनी चाहिए।
तिवारी ने यह भी कहा कि शराबबंदी को एक नीति-प्रयोग के तौर पर देखा गया था। अगर किसी नीति से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं, तो उसके प्रभावों की समीक्षा करना जरूरी है।
सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
शिवानंद तिवारी ने सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी। उनका तर्क है कि शराबबंदी जैसे बड़े सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दे पर केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सभी दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए।
उनके अनुसार, ऐसी बैठक में शराबबंदी के प्रभाव, अवैध शराब के नेटवर्क, नशीले पदार्थों की उपलब्धता और युवाओं पर पड़ रहे असर जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।
यह मांग ऐसे समय आई है जब जमुई की घटना को लेकर विपक्षी दल सरकार से कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर जवाब मांग रहे हैं। कांग्रेस ने भी घटना के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया था।
जमुई कांड में अब तक क्या हुआ?
जमुई मामले में सामने आए वीडियो के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की। रिपोर्टों के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम हुई थी। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन भी किया गया।
मामले में POCSO Act के तहत कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई की मांग की थी।
इस बीच, घटना को शराबबंदी से जोड़ने वाले दावे और पुलिस जांच के तथ्य अलग-अलग हैं। अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि जमुई की घटना शराबबंदी के कारण ही हुई।
मुलायम सिंह यादव के पुराने बयान से क्यों हो रही तुलना?
शिवानंद तिवारी के बयान में युवाओं को लेकर इस्तेमाल किए गए शब्दों की तुलना समाजवादी पार्टी के दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव के एक पुराने विवादित बयान से की जा रही है।
मुलायम सिंह यादव ने 2014 में बदायूं गैंगरेप मामले के संदर्भ में एक टिप्पणी की थी, जिस पर काफी राजनीतिक विवाद हुआ था। उस समय उनके बयान की आलोचना भी हुई थी।
हालांकि, शिवानंद तिवारी का मौजूदा बयान शराबबंदी और युवाओं में नशे की समस्या के संदर्भ में है। दोनों बयानों का संदर्भ अलग है, इसलिए केवल एक जैसे शब्दों के आधार पर दोनों को समान मानना उचित नहीं होगा।
अब आगे क्या?
शिवानंद तिवारी की मांग के बाद बिहार में शराबबंदी की नीति और उसके सामाजिक प्रभाव पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। एक तरफ सरकार की नीति और उसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कानून लागू करने वाली एजेंसियां अवैध शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करती रही हैं।
जमुई मामले में फिलहाल मुख्य फोकस आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने पर है। शराबबंदी से इसका संबंध कितना है, यह अलग नीति और सामाजिक अध्ययन का विषय है।
