IAS हरजोत कौर बम्हरा को BPSC की कमान, जानिए कौन हैं नई अध्यक्ष
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पटना: IAS हरजोत कौर बम्हरा को बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है। IAS हरजोत कौर बम्हरा 1992 बैच की बिहार कैडर की वरिष्ठ अधिकारी हैं और लंबे प्रशासनिक अनुभव के साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। उन्हें यह जिम्मेदारी BPSC के मौजूदा अध्यक्ष रवि मनुभाई परमार के अवकाश पर जाने के बाद दी गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह फिलहाल अतिरिक्त प्रभार है।
BPSC बिहार में सरकारी सेवाओं के लिए होने वाली महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं का संचालन करता है। ऐसे में अध्यक्ष की भूमिका परीक्षा प्रक्रिया, प्रशासनिक समन्वय और आयोग के कामकाज के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहती है।
कौन हैं IAS हरजोत कौर बम्हरा?
हरजोत कौर बम्हरा 1992 बैच की बिहार कैडर की IAS अधिकारी हैं। बिहार सरकार की 2026 सिविल लिस्ट में उनका बैच, कैडर और वर्तमान पद दर्ज है। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने 11 अक्टूबर 1992 को IAS सेवा ज्वाइन की थी और उनकी वर्तमान पोस्टिंग बिहार राजस्व पर्षद में चेयरमैन-कम-मेंबर के तौर पर दर्ज है।
बिहार राजस्व पर्षद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी हरजोत कौर बम्हरा को चेयरमैन-कम-मेंबर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इससे पहले वह राज्य सरकार के कई अहम विभागों में वरिष्ठ प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।
उनके करियर में जिला प्रशासन से लेकर विभागीय और नीतिगत स्तर तक की जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। उपलब्ध प्रशासनिक रिकॉर्ड में कटिहार और बेगूसराय जैसे जिलों में जिलाधिकारी के तौर पर काम करने का अनुभव भी दर्ज है।
किन-किन महत्वपूर्ण पदों पर कर चुकी हैं काम?
हरजोत कौर बम्हरा का प्रशासनिक करियर तीन दशक से अधिक लंबा है। बिहार सरकार और उपलब्ध प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने अलग-अलग समय में कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी संभाली है।
उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में समाज कल्याण विभाग में अपर मुख्य सचिव स्तर की भूमिका, खान एवं भू-विज्ञान विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक पद और बिहार महिला एवं बाल विकास निगम से जुड़ी जिम्मेदारी शामिल रही है।
2025 में उन्हें बिहार राजस्व पर्षद के चेयरमैन-कम-मेंबर की जिम्मेदारी मिली थी। सितंबर 2026 में भी बिहार के एक प्रशासनिक सुधार संबंधी कार्यक्रम में उन्हें इसी पद पर वरिष्ठ अधिकारी के रूप में शामिल किया गया था।
उनका प्रशासनिक अनुभव केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रहा है। केंद्र और राज्य स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियों में काम करने का अनुभव भी उनके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज है।
BPSC अध्यक्ष के तौर पर सामने होंगी ये चुनौतियां
BPSC की जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है जब आयोग की परीक्षाओं और परिणामों को लेकर अभ्यर्थियों की निगाहें लगातार बनी रहती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण चुनौती परीक्षा प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना होगी। इसमें परीक्षा कार्यक्रम, परिणाम, इंटरव्यू और अंतिम चयन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
BPSC ने 2026 के परीक्षा कैलेंडर में कई प्रतियोगी परीक्षाओं की संभावित तारीखें जारी की हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कैलेंडर में दी गई तारीखें संभावित हैं।
ऐसे में अध्यक्ष के सामने परीक्षा कैलेंडर के अनुसार प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना और अभ्यर्थियों को समय पर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराना अहम काम रहेगा।
अभ्यर्थियों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
BPSC की परीक्षाओं में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होते हैं। इसलिए आयोग के शीर्ष स्तर पर किसी भी प्रशासनिक बदलाव का असर उसकी कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
हरजोत कौर बम्हरा के सामने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना, प्रशासनिक प्रक्रिया को समयबद्ध रखना और अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों पर आयोग की आधिकारिक व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
हालांकि, इन जिम्मेदारियों के परिणामों को लेकर अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। उनकी भूमिका और आयोग के फैसलों का आकलन आगे लिए जाने वाले आधिकारिक निर्णयों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
2022 में एक बयान को लेकर भी चर्चा में आई थीं
हरजोत कौर बम्हरा के प्रशासनिक करियर से जुड़ा एक चर्चित विवाद सितंबर 2022 का है। उस समय बिहार महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक के तौर पर एक कार्यक्रम में छात्राओं के साथ बातचीत के दौरान सैनिटरी पैड को लेकर उनका एक बयान सामने आया था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम में एक छात्रा ने लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने से जुड़ा सवाल पूछा था। जवाब के दौरान हरजोत कौर ने सरकारी सुविधाओं की मांग को लेकर कई उदाहरण दिए, जिनमें परिवार नियोजन से जुड़ी टिप्पणी भी शामिल थी। बाद में इस बयान को लेकर विवाद हुआ।
मामला बढ़ने के बाद हरजोत कौर ने अपने बयान को लेकर माफी मांगी थी। उस समय राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से भी मामले को लेकर प्रतिक्रिया सामने आई थी।
यह विवाद उनके लंबे प्रशासनिक करियर की अलग-अलग घटनाओं में से एक है और इसे उनकी वर्तमान BPSC जिम्मेदारी से अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
अब BPSC की कमान संभालना क्यों महत्वपूर्ण?
BPSC अध्यक्ष का पद बिहार की भर्ती और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आयोग के माध्यम से विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षाएं और चयन प्रक्रियाएं आयोजित होती हैं।
हरजोत कौर बम्हरा को अतिरिक्त जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब BPSC के मौजूदा अध्यक्ष रवि मनुभाई परमार अवकाश पर हैं। रिपोर्टों के अनुसार उनका अवकाश 15 सितंबर से 9 अक्टूबर तक बताया गया है। इस दौरान BPSC की अध्यक्षीय जिम्मेदारी हरजोत कौर बम्हरा संभालेंगी।
अब उनकी भूमिका पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी। खास तौर पर परीक्षा कैलेंडर, लंबित प्रक्रियाओं, परिणाम और आयोग से जारी होने वाली आधिकारिक सूचनाओं को लेकर उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होगी।
