2 अक्टूबर को मुंबई से CJP का आंदोलन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज
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ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद अब सड़क पर उतरने की तैयारी तक पहुंच गया है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। यह अभियान धीरे-धीरे देश के अन्य शहरों तक ले जाने की बात कही गई है।
48 घंटे का अल्टीमेटम, 2 अक्टूबर से आंदोलन
CJP ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने की मांग की थी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आंदोलन की तारीख और शुरुआती स्थान की घोषणा की। दीपके के मुताबिक, अगर 26 सितंबर तक इस्तीफा नहीं दिया जाता है, तो CJP 2 अक्टूबर को मुंबई से अपना राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। पार्टी का कहना है कि आंदोलन को देश के अलग-अलग शहरों तक ले जाया जाएगा। इसके बाद दिल्ली में भी प्रदर्शन करने और अनिश्चितकालीन धरना देने की योजना बताई गई है।
'इलेक्शन कमीशन ठीक करो' अभियान क्या है?
CJP ने इसी विवाद के बीच 'इलेक्शन कमीशन ठीक करो' अभियान शुरू किया है। पार्टी ने इसे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बड़े बदलावों से जोड़ा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, SIR के तीन चरणों में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13.37 करोड़ नाम हटे हैं। रिपोर्ट में इसे पूर्व-SIR मतदाता सूची की तुलना में 14.1 प्रतिशत की कमी बताया गया है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रारूप सूची से नाम हटना अंतिम रूप से मतदान के अधिकार से वंचित होना नहीं माना जाता। संबंधित प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने तथा पात्र मतदाताओं के नाम शामिल कराने के प्रावधान मौजूद हैं। CJP ने हालांकि इन बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही जरूरी है। ये CJP के आरोप हैं, जिन्हें चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति के साथ अलग-अलग समझना जरूरी है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से क्यों बढ़ा विवाद?
विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में Form 6, मतदाता नाम जोड़ने और हटाने, वोटर डेटाबेस तक पहुंच तथा SIR से जुड़े फैसलों जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर CJP ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तेज की है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट की। आयोग के अनुसार, अलग-अलग सदस्यों की ओर से सुझाव, टिप्पणियां और आपत्तियां किसी संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं। आयोग ने यह भी कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत प्रक्रिया के तहत लिए गए। इसलिए मौजूदा विवाद में एक तरफ CJP और अन्य आलोचकों की ओर से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल हैं, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
'जंतर-मंतर 2.0' की चेतावनी
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी की जाएगी। उन्होंने इसे 'जंतर-मंतर 2.0' नाम दिया है। CJP का कहना है कि पहले मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू होगा और बाद में दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरना दिया जा सकता है। पार्टी ने SIR से संबंधित फैसलों की स्वतंत्र जांच, प्रारूप मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की समीक्षा और संबंधित रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने जैसी मांगें भी उठाई हैं।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम 48 घंटे की समयसीमा खत्म होने के बाद सामने आएगा। CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई से आंदोलन शुरू करने की तारीख घोषित की है। दूसरी ओर, SIR से जुड़े मतदाता सूची विवाद पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और दावे-आपत्तियों का निपटारा भी महत्वपूर्ण रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनाव आयोग, मतदाता सूची और CJP के प्रस्तावित आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रहेगी।