फर्जी IPS विकास कुमार गिरफ्तार, पुलिस की वर्दी और वसूली का खेल

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बिहार के औरंगाबाद में फर्जी IPS विकास कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उसके कथित नेटवर्क की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। फर्जी IPS विकास कुमार पर आरोप है कि वह खुद को प्रशिक्षु IPS अधिकारी बताकर लोगों और पुलिसकर्मियों पर प्रभाव जमाता था। ताजा मामले में जसोइया मोड़ पर पुलिस के पहुंचने के बाद वह पुलिसकर्मियों से ही उलझ गया। पुलिस के अनुसार, उसने एक अधिकारी की वर्दी का कॉलर पकड़ा। ब्रेथ एनालाइजर जांच में शराब पीने की पुष्टि होने की बात भी पुलिस ने कही है।

मामले की जांच अब केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पुलिस उसके मोबाइल, संपर्कों और पहले सामने आए कथित फर्जीवाड़े की कड़ियों को जोड़ रही है।

जसोइया मोड़ पर कैसे खुला फर्जी IPS का राज?

पुलिस के मुताबिक, जसोइया मोड़ के पास एक युवक शराब के नशे में राहगीरों से गाली-गलौज कर रहा था। वह खुद को प्रशिक्षु IPS अधिकारी बताकर लोगों पर रौब जमाने की कोशिश कर रहा था।

सूचना मिलने के बाद नगर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर भी युवक ने सामान्य तरीके से सहयोग करने के बजाय खुद को अधिकारी बताते हुए पुलिसकर्मियों से बहस शुरू कर दी।

पुलिस का आरोप है कि थाना ले जाने की कोशिश के दौरान विकास कुमार ने एक पुलिस पदाधिकारी से गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की। इसी दौरान उसने अधिकारी की वर्दी का कॉलर पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस ने उसे काबू में लेकर गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद उसकी ब्रेथ एनालाइजर जांच कराई गई। पुलिस ने बताया कि जांच में शराब पीने की पुष्टि हुई है। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

गाड़ी में रखता था पुलिस की वर्दी

जांच में पुलिस को विकास कुमार की गाड़ी से पुलिस की वर्दी मिलने की बात सामने आई है। यही वजह है कि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह इस वर्दी का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में करता था।

इससे पहले भी उसके बारे में सामने आई जांच में आरोप लगा था कि वह पुलिस अधिकारी की पहचान बनाकर लोगों और वाहनों पर प्रभाव डालता था।

सितंबर में सामने आए मामले के अनुसार, कथित फर्जी IPS ने पुलिस के सरकारी मोबाइल नंबर पर WhatsApp कॉल कर खुद को प्रशिक्षु IPS अधिकारी बताया था। उसने पुलिस से छापेमारी के लिए सहयोग मांगा और असली पुलिसकर्मियों को अपने साथ ले जाकर वाहन जांच भी कराई थी।

पुलिस के मुताबिक, इस दौरान फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके कुछ लोगों को रोककर पूछताछ की गई थी। बाद में शक बढ़ने पर पुलिस ने उसकी पहचान की जांच शुरू की और उसका फर्जीवाड़ा सामने आया।

असली पुलिस को भी कैसे झांसे में लिया?

रिपोर्टों के अनुसार, विकास ने खुद को पलामू का प्रशिक्षु IPS अधिकारी बताते हुए पुलिस को फोन किया था। उसके WhatsApp प्रोफाइल पर पुलिस की वर्दी में तस्वीर लगी होने की बात भी सामने आई।

पुलिस के मुताबिक, इसी पहचान के आधार पर उसने नगर थाना से गश्ती पुलिसकर्मी का नंबर हासिल किया। इसके बाद पुलिस टीम उसके बताए स्थान पर पहुंची और उसके साथ वाहन जांच में शामिल हो गई।

मामला तब संदिग्ध हुआ जब पुलिस अधिकारियों को उसके व्यवहार और गतिविधियों पर शक हुआ। बाद में वाहन और उससे जुड़े लोगों की जांच की गई।

इस मामले में पुलिस ने विकास के कथित चालक और सहयोगी को भी गिरफ्तार किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने स्कॉर्पियो, मोबाइल फोन, फर्जी पहचान पत्र और दूसरे दस्तावेज भी जब्त किए थे।

बिहार से झारखंड तक नेटवर्क की जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कथित तौर पर कितने लोगों को प्रभावित किया गया और इस काम में उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े थे।

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने उसके कथित नेटवर्क के बिहार से झारखंड तक फैले होने की जांच की है। पूछताछ में वाहन चालकों से कथित वसूली और दूसरे चेकपोस्टों का भी जिक्र सामने आने की बात कही गई है।

हालांकि, किसी व्यक्ति को इस नेटवर्क का सदस्य या किसी अपराध में दोषी बताने से पहले पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। फिलहाल ये बातें जांच में सामने आए पुलिस के दावों के तौर पर ही देखी जानी चाहिए।

पहले भी फर्जी अधिकारी बनने का आरोप

पुलिस को विकास कुमार की पृष्ठभूमि से जुड़े पुराने मामलों की जानकारी भी मिलने की बात कही गई है। रिपोर्टों में उसके खिलाफ पहले फर्जी अधिकारी की पहचान इस्तेमाल करने से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है।

इसी वजह से पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड, संपर्कों और मोबाइल में मौजूद जानकारी की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अलग-अलग घटनाओं में इस्तेमाल की गई पहचान और तरीका एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।

मोबाइल से खुलेगा कथित नेटवर्क का राज?

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने विकास कुमार का मोबाइल जब्त किया है। अब उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसके साथ दूसरे लोग भी काम करते थे।

पुलिस कार्रवाई और जब्ती की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य प्रणाली के जरिए किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। आगे की जांच में मोबाइल डेटा, दस्तावेज और दूसरे सबूतों के आधार पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

क्या है पूरा मामला?

संक्षेप में समझें:

  • विकास कुमार पर खुद को प्रशिक्षु IPS बताने का आरोप है।
  • जसोइया मोड़ पर पुलिस से उलझने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
  • पुलिस के अनुसार, उसने अधिकारी की वर्दी का कॉलर पकड़ा।
  • ब्रेथ एनालाइजर जांच में शराब पीने की पुष्टि की बात कही गई।
  • उसकी गाड़ी से पुलिस की वर्दी मिलने की जानकारी सामने आई।
  • पहले भी फर्जी पुलिस पहचान इस्तेमाल करने के आरोपों की जांच हुई है।
  • पुलिस अब उसके मोबाइल और कथित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

औरंगाबाद का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहां आरोपी पर केवल आम लोगों को प्रभावित करने का नहीं, बल्कि कथित तौर पर असली पुलिस व्यवस्था को भी भ्रमित करने का आरोप है। अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि इस पूरे नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं।

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