DUSU Election 2026: NSUI की हार ने बढ़ाई कन्हैया कुमार की चुनौती
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👉 WhatsApp से जुड़ेंDUSU Election 2026 के नतीजों ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में NSUI के प्रदर्शन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। DUSU Election 2026 में कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन NSUI को केंद्रीय पैनल के चारों पदों में से एक भी सीट नहीं मिली। यह 2015 के बाद पहली बार हुआ, जब NSUI DUSU के शीर्ष चार पदों में अपना खाता नहीं खोल सकी।
चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के खाते में गया। खास बात यह रही कि शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे थे और टिकट को लेकर विवाद के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे।
DUSU के चार पदों में NSUI का खाता नहीं खुला
DUSU केंद्रीय पैनल के चार प्रमुख पदों पर इस बार मुकाबला काफी चर्चा में रहा। अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों से हराया।
सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी ने 21,650 वोट हासिल किए, जबकि NSUI की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले।
संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए। इस सीट पर समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव को 15,778 वोट मिले और NSUI के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट प्राप्त हुए।
उपाध्यक्ष पद का परिणाम सबसे अलग रहा। निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट लेकर जीत दर्ज की। ABVP के इशु मौर्य को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर चतरथ 4,313 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
कौन हैं दीपांशु शौकीन और क्यों चर्चा में है उनका चुनाव?
दीपांशु शौकीन का मामला इस चुनाव में इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उनका NSUI से पहले जुड़ाव रहा था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने संगठन से DUSU चुनाव का टिकट मांगा था।
टिकट को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग बातें सामने आईं। शौकीन के अनुसार उन्हें उपाध्यक्ष पद के लिए NSUI टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
वहीं कांग्रेस नेता अमिताभ दुबे ने कहा कि शौकीन को NSUI की ओर से अध्यक्ष पद का टिकट देने की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया और उपाध्यक्ष पद से निर्दलीय चुनाव लड़ा।
इसलिए टिकट विवाद की पूरी तस्वीर को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है। चुनाव परिणाम हालांकि स्पष्ट है कि शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर NSUI और ABVP दोनों के उम्मीदवारों से अधिक वोट हासिल किए।
विशेष यादव का प्रदर्शन भी बना चर्चा का विषय
संयुक्त सचिव पद पर विशेष यादव का प्रदर्शन भी NSUI के लिए चर्चा का विषय रहा। यादव NSUI से जुड़े टिकट दावेदारों में शामिल थे और बाद में समाजवादी छात्र सभा के समर्थन से चुनाव मैदान में उतरे।
उन्हें 15,778 वोट मिले। यह संख्या NSUI के आधिकारिक उम्मीदवार गोपाल चौधरी के 15,206 वोट से 572 अधिक थी।
हालांकि, ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल कर यह सीट जीत ली। यानी विशेष यादव जीत से पीछे रहे, लेकिन उन्होंने NSUI के आधिकारिक उम्मीदवार से ज्यादा वोट हासिल किए।
कन्हैया कुमार की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?
कन्हैया कुमार को जुलाई 2023 में AICC की ओर से NSUI का प्रभारी बनाया गया था। उनके कार्यकाल में छात्र संगठन की चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक कामकाज को लेकर चर्चा होती रही है।
DUSU 2026 के परिणामों के बाद कुछ रिपोर्टों ने इस प्रदर्शन को कन्हैया कुमार की जिम्मेदारी के संदर्भ में देखा है। हालांकि, किसी एक चुनाव के नतीजे से किसी नेता की पूरी राजनीतिक या संगठनात्मक भूमिका का अंतिम आकलन करना अलग विषय है।
कन्हैया कुमार से जुड़े सूत्रों ने टिकट विवाद की कुछ व्याख्याओं को खारिज किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके करीबी सूत्रों का कहना था कि शौकीन को अध्यक्ष पद का विकल्प दिया गया था, लेकिन वह उपाध्यक्ष पद से चुनाव लड़ना चाहते थे।
यानी इस पूरे विवाद में टिकट चयन को लेकर अलग-अलग दावे हैं और उन्हें अलग-अलग स्रोतों के हवाले से ही देखा जाना चाहिए।
पंजाब यूनिवर्सिटी में भी सामने आया था ऐसा विवाद
DUSU का मामला NSUI के लिए उम्मीदवार चयन से जुड़े विवादों का पहला उदाहरण नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में NSUI से अलग होकर अनुराग दलाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और अध्यक्ष पद जीत लिया था।
दलाल को 3,433 वोट मिले थे, जबकि NSUI के आधिकारिक उम्मीदवार राहुल नैन को 501 वोट मिले और वह छठे स्थान पर रहे।
इस उदाहरण का उल्लेख इसलिए किया जा रहा है क्योंकि DUSU में भी टिकट से जुड़े विवाद के बाद एक पूर्व NSUI सदस्य ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
हालांकि, अलग-अलग विश्वविद्यालयों के चुनावों की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए इन घटनाओं को सीधे एक ही पैटर्न मानने के बजाय संबंधित चुनाव के संदर्भ में देखना जरूरी है।
DUSU 2026 के नतीजे क्या बताते हैं?
DUSU 2026 के परिणाम में तीन बातें खास तौर पर सामने आईं।
पहली, NSUI केंद्रीय पैनल के चारों पदों में कोई सीट नहीं जीत सकी।
दूसरी, उपाध्यक्ष पद पर NSUI से जुड़े रहे निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने बड़ी बढ़त से जीत दर्ज की।
तीसरी, संयुक्त सचिव पद पर विशेष यादव ने NSUI के आधिकारिक उम्मीदवार से अधिक वोट हासिल किए, हालांकि वह चुनाव जीत नहीं सके।
ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के तीन पद जीते। पिछले साल भी ABVP ने इन तीन पदों पर जीत दर्ज की थी, जबकि NSUI ने उपाध्यक्ष पद जीता था। इस बार उपाध्यक्ष पद भी NSUI के खाते में नहीं गया।
DUSU परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि छात्र राजनीति में उम्मीदवार चयन, संगठन की जमीनी पकड़ और स्थानीय कैंपेन जैसे कई कारक एक साथ काम करते हैं। केवल केंद्रीय चुनाव परिणाम से इन सभी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
फिलहाल DUSU 2026 का नतीजा NSUI के लिए संगठन और उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा का विषय जरूर बना है। आने वाले छात्र चुनावों में संगठन किस तरह उम्मीदवारों का चयन करता है और स्थानीय स्तर पर अपनी रणनीति कैसे आगे बढ़ाता है, यह आगे देखने वाली बात होगी।
