BRICS Summit आखिर क्या है? जानिए दुनिया के इस बड़े समूह की पूरी कहानी

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BRICS Summit आखिर क्या है? जानिए दुनिया के इस बड़े समूह की पूरी कहानी

 

दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में BRICS Summit का महत्व लगातार बढ़ रहा है। BRICS Summit सिर्फ कुछ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का बड़ा मंच बन चुका है। आज इसमें 11 पूर्ण सदस्य देश हैं और इसका एजेंडा व्यापार से लेकर वित्त, तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य, जलवायु, विकास और वैश्विक संस्थाओं में सुधार तक फैल चुका है।

2026 में BRICS इसलिए भी खास है क्योंकि भारत के पास इसकी अध्यक्षता है। भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है और इस साल 18वां BRICS Summit नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है। भारत की अध्यक्षता का थीम “Building Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास पर आधारित है।

लेकिन आखिर BRICS क्या है, इसका नाम कैसे पड़ा, इसमें कौन-कौन से देश हैं और भारत के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइए आसान भाषा में पूरी कहानी समझते हैं।

BRICS क्या है?

BRICS एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंच है, जिसमें प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं और ग्लोबल साउथ के देश शामिल हैं।

शुरुआत में इसका नाम BRIC था। इसमें चार देश—Brazil, Russia, India और China शामिल थे।

बाद में 2011 में South Africa के शामिल होने के बाद इसमें “S” जुड़ा और इसका नाम BRICS हो गया।

इसके बाद समूह का विस्तार तेजी से हुआ। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात पूर्ण सदस्य बने। जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य बन गया। इस तरह वर्तमान में BRICS के 11 पूर्ण सदस्य हैं।

BRICS को किसी सैन्य गठबंधन की तरह नहीं समझना चाहिए। यह NATO जैसा सुरक्षा गठबंधन नहीं है। यह मुख्य रूप से राजनीतिक और आर्थिक समन्वय का मंच है।

BRICS नाम का मतलब क्या है?

BRICS शब्द पांच शुरुआती देशों के अंग्रेजी नामों से बना था।

  • B – Brazil
  • R – Russia
  • I – India
  • C – China
  • S – South Africa

हालांकि अब BRICS में 11 सदस्य हैं, लेकिन समूह का मूल नाम BRICS ही बना हुआ है।

BRIC शब्द का इस्तेमाल पहली बार 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री Jim O'Neill के एक आर्थिक अध्ययन में हुआ था। उस समय इसका इस्तेमाल भविष्य की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह के रूप में किया गया था।

यानी शुरुआत में BRICS कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं था। बाद में इन देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ा और यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया।

BRICS की शुरुआत कब हुई?

BRICS की औपचारिक यात्रा 2006 के आसपास शुरू हुई।

रूस, भारत और चीन के नेताओं की मुलाकात के बाद इस समूह के बीच औपचारिक समन्वय बढ़ा। 2006 में BRIC के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई।

इसके बाद 16 जून 2009 को रूस के Yekaterinburg में पहला BRIC Summit आयोजित हुआ।

उस बैठक में चार देशों के शीर्ष नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

2011 में South Africa के शामिल होने के बाद यह BRICS बन गया।

इसके बाद हर साल अलग-अलग सदस्य देश इसकी अध्यक्षता करते हुए Summit की मेजबानी करते हैं।

BRICS में अभी कितने देश हैं?

वर्तमान व्यवस्था में BRICS के 11 पूर्ण सदस्य हैं:

  1. Brazil
  2. Russia
  3. India
  4. China
  5. South Africa
  6. Egypt
  7. Ethiopia
  8. Iran
  9. United Arab Emirates
  10. Saudi Arabia
  11. Indonesia

BRICS की आधिकारिक वेबसाइट भी इन 11 देशों को पूर्ण सदस्य के रूप में सूचीबद्ध करती है। समूह में निर्णय आम तौर पर सहमति यानी consensus के आधार पर लिए जाते हैं।

यह विस्तार BRICS को पहले के मुकाबले काफी बड़ा और विविध बनाता है।

अब इसमें एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व, यूरोप और लैटिन अमेरिका से जुड़े महत्वपूर्ण देश शामिल हैं।

BRICS में Partner Countries क्या हैं?

BRICS ने 2024 के Kazan Summit में Partner Country की नई श्रेणी बनाई।

इसका उद्देश्य उन देशों को BRICS के साथ ज्यादा गहराई से जोड़ना है जो पूर्ण सदस्य नहीं हैं, लेकिन समूह के साथ सहयोग करना चाहते हैं।

2025 में बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर देशों के रूप में शामिल किया गया। बाद में वियतनाम भी Partner Country बना।

Partner Country को BRICS Summit और विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने का निमंत्रण मिल सकता है। हालांकि उनकी भागीदारी पूर्ण सदस्य देशों के बराबर नहीं होती।

इससे BRICS का प्रभाव केवल 11 देशों तक सीमित नहीं रहता।

BRICS Summit में क्या होता है?

BRICS Summit समूह की सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक बैठक होती है।

इसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख शामिल होते हैं।

Summit में कई तरह के मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, जैसे:

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार
  • निवेश
  • ऊर्जा सुरक्षा
  • खाद्य सुरक्षा
  • जलवायु परिवर्तन
  • स्वास्थ्य
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
  • आतंकवाद
  • वैश्विक शांति
  • बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार
  • विकासशील देशों की वित्तीय जरूरतें

Summit से पहले विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, शेरपा, विशेषज्ञ और अलग-अलग क्षेत्रों के अधिकारी बैठकें करते हैं।

भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के आधिकारिक कार्यक्रम में Summit के अलावा विदेश मंत्रियों, NSA, Sherpa, मंत्री स्तर की बैठकों, विशेषज्ञ समूहों, बिजनेस फोरम, संसदीय संवाद और Track-II बैठकों सहित बड़ी संख्या में गतिविधियां शामिल हैं।

BRICS का मुख्य उद्देश्य क्या है?

BRICS का सबसे बड़ा उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज को अधिक प्रभावी बनाना है।

BRICS देशों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की आर्थिक और जनसंख्या शक्ति के अनुरूप प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है।

इसीलिए BRICS में UN Security Council, IMF और World Bank जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग प्रमुख मुद्दों में रहती है।

समूह बहुध्रुवीय यानी multipolar world order की अवधारणा पर भी जोर देता है।

भारत भी BRICS को किसी एक देश या समूह के खिलाफ सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के रूप में नहीं देखता। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी BRICS को सहयोग और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में रेखांकित किया है।

BRICS का आर्थिक महत्व कितना बड़ा है?

BRICS का सबसे बड़ा प्रभाव इसकी संयुक्त आर्थिक और जनसांख्यिकीय ताकत से आता है।

भारत के विदेश मंत्रालय के 2025 के BRICS Brief के अनुसार, 11 सदस्य देश मिलकर दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, करीब 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और लगभग 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इन देशों के पास बड़ी आबादी, प्राकृतिक संसाधन, ऊर्जा संसाधन, औद्योगिक क्षमता और तेजी से बढ़ते बाजार हैं।

यही कारण है कि BRICS की बैठक में लिया गया कोई बड़ा आर्थिक फैसला वैश्विक व्यापार और निवेश पर प्रभाव डाल सकता है।

BRICS का New Development Bank क्या है?

BRICS की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक New Development Bank यानी NDB है।

इस बैंक की स्थापना BRICS देशों ने विकासशील देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर और टिकाऊ विकास परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की।

2014 में Fortaleza Summit के दौरान NDB का समझौता हुआ और 2015 में बैंक ने काम शुरू किया। इसका मुख्यालय Shanghai में है।

NDB सड़क, रेल, ऊर्जा, जल, स्वच्छता, शहरी विकास और अन्य टिकाऊ विकास परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध करा सकता है।

बैंक ने समय के साथ BRICS के बाहर के देशों में भी सदस्यता बढ़ाई है। वर्तमान NDB सदस्यता में Bangladesh, UAE, Egypt और Algeria जैसे देश भी शामिल हैं, जबकि Uzbekistan, Colombia और Ethiopia को 2025 में नए सदस्य के रूप में स्वीकार किया गया।

भारत के लिए NDB इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे विकास परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक बहुपक्षीय वित्त का रास्ता मजबूत होता है।

क्या BRICS अपनी अलग करेंसी लॉन्च कर रहा है?

यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है।

सोशल मीडिया पर कई बार दावा किया जाता है कि BRICS अपनी एक साझा मुद्रा या “BRICS Currency” लॉन्च करने वाला है।

लेकिन BRICS की मौजूदा दिशा को समझना जरूरी है।

BRICS के भीतर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान बढ़ाने पर चर्चा होती रही है। 2025 के BRICS दस्तावेजों में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल, भुगतान प्रणालियों की interoperability और Cross-Border Payments Initiative पर काम जारी रखने की बात कही गई।

इसका मतलब यह नहीं है कि BRICS ने कोई नई साझा मुद्रा लॉन्च कर दी है।

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना और एक साझा BRICS currency बनाना दो अलग-अलग बातें हैं।

भारत भी इस मुद्दे पर अपनी आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के अनुसार सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण रखता है।

क्या BRICS डॉलर को खत्म करना चाहता है?

यह भी एक महत्वपूर्ण लेकिन जटिल सवाल है।

BRICS के कुछ सदस्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की बात करते रहे हैं।

लेकिन इसे सीधे “डॉलर खत्म करने की योजना” कहना बहुत सरल निष्कर्ष होगा।

BRICS में अलग-अलग देशों की आर्थिक परिस्थितियां, मुद्राएं और नीतियां अलग हैं। इसलिए स्थानीय मुद्रा व्यापार बढ़ाना एक व्यावहारिक वित्तीय सहयोग का मुद्दा है, जबकि वैश्विक आरक्षित मुद्रा व्यवस्था बदलना बहुत बड़ा और जटिल विषय है।

यही वजह है कि BRICS में इस मुद्दे पर चर्चा को साझा मुद्रा की घोषणा से अलग समझना चाहिए।

Contingent Reserve Arrangement यानी CRA क्या है?

BRICS के वित्तीय सहयोग का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा Contingent Reserve Arrangement (CRA) है।

इसका उद्देश्य सदस्य देशों को संभावित भुगतान संतुलन यानी balance-of-payments संकट जैसी परिस्थितियों में वित्तीय सुरक्षा का एक अतिरिक्त तंत्र उपलब्ध कराना है।

यह व्यवस्था BRICS के वित्तीय सहयोग को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है।

2025 BRICS Leaders’ Declaration में CRA को अधिक प्रभावी और लचीला बनाने तथा नई सदस्य देशों की भागीदारी से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का उल्लेख किया गया।

BRICS किन-किन क्षेत्रों में काम करता है?

BRICS का काम केवल राष्ट्राध्यक्षों की बैठक तक सीमित नहीं है।

इसके कई अलग-अलग क्षेत्र हैं।

1. आर्थिक सहयोग

व्यापार, निवेश, बैंकिंग और वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होती है।

2. विज्ञान और तकनीक

Research, innovation, digital technology और emerging technologies में सहयोग बढ़ाने की कोशिश होती है।

3. स्वास्थ्य

महामारी, वैक्सीन, स्वास्थ्य प्रणालियों और चिकित्सा सहयोग जैसे विषयों पर काम होता है।

4. ऊर्जा

तेल, गैस, renewable energy, nuclear energy और energy transition महत्वपूर्ण विषय हैं।

5. कृषि

खाद्य सुरक्षा, कृषि तकनीक और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सहयोग किया जाता है।

6. शिक्षा और संस्कृति

People-to-people contact, शिक्षा, युवा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी BRICS एजेंडे में जगह मिलती है।

7. सुरक्षा

आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सदस्य देश संवाद करते हैं।

भारत के लिए BRICS इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

भारत के लिए BRICS कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है।

पहला, इससे भारत को Global South की आवाज को मजबूत करने का मंच मिलता है।

दूसरा, भारत रूस और चीन जैसे देशों के साथ एक ही बहुपक्षीय मंच पर संवाद कर सकता है।

तीसरा, Brazil और South Africa जैसे देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने का अवसर मिलता है।

चौथा, NDB जैसी संस्थाओं के जरिए विकास वित्त का विकल्प मजबूत होता है।

पांचवां, भारत वैश्विक संस्थाओं में सुधार की अपनी मांग को व्यापक समर्थन दिलाने की कोशिश कर सकता है।

भारत के लिए BRICS की खासियत यह भी है कि वह पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए BRICS जैसे मंचों पर भी सक्रिय रह सकता है।

यानी भारत की विदेश नीति में BRICS और पश्चिमी देशों के साथ सहयोग एक-दूसरे के विरोधी विकल्प जरूरी नहीं हैं।

2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता क्यों खास है?

भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली।

भारत ने इस वर्ष के लिए “Building Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम को आगे रखा है।

भारत की प्राथमिकताओं में वैश्विक चुनौतियों के बीच resilience, technology और innovation, sustainable development तथा सदस्य देशों के बीच practical cooperation जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं।

2026 में नई दिल्ली में होने वाला 18वां BRICS Summit भारत के लिए कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण अवसर होगा। आधिकारिक भारतीय स्रोतों के अनुसार Summit सितंबर 2026 में नई दिल्ली में प्रस्तावित है।

भारत की अध्यक्षता में केवल Summit ही नहीं, बल्कि पूरे साल कई मंत्रीस्तरीय और विशेषज्ञ स्तर की बैठकें हो रही हैं।

2026 BRICS Summit में किन मुद्दों पर नजर रहेगी?

2026 के Summit में कई बड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

वैश्विक शासन सुधार:
भारत विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में ज्यादा प्रतिनिधित्व दिलाने के मुद्दे को आगे बढ़ा सकता है।

डिजिटल और AI सहयोग:
Artificial Intelligence और नई तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए AI governance और डिजिटल सहयोग महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन:
विकासशील देशों के लिए climate finance और sustainable development महत्वपूर्ण हैं।

व्यापार और भुगतान:
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और cross-border payment systems पर बातचीत जारी रह सकती है।

स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा:
महामारी के अनुभव के बाद health security और food security भी अहम बने हुए हैं।

ऊर्जा सुरक्षा:
BRICS में दुनिया के बड़े ऊर्जा उत्पादक और उपभोक्ता देश शामिल हैं। इसलिए ऊर्जा सहयोग का महत्व काफी अधिक है।

BRICS और G20 में क्या अंतर है?

BRICS और G20 को एक जैसा समझना गलत होगा।

G20 दुनिया की प्रमुख विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का व्यापक आर्थिक मंच है। इसमें 19 देश और European Union शामिल हैं।

वहीं BRICS मुख्य रूप से ग्लोबल साउथ और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग पर केंद्रित है।

G20 का आर्थिक दायरा ज्यादा व्यापक है, जबकि BRICS विकासशील देशों की सामूहिक आवाज, आर्थिक सहयोग और वैश्विक शासन में सुधार जैसे मुद्दों पर अधिक जोर देता है।

भारत दोनों मंचों में सक्रिय है।

यही भारत की विदेश नीति की एक खास विशेषता है कि वह अलग-अलग समूहों के साथ अपने हितों के अनुसार सहयोग करता है।

क्या BRICS NATO जैसा सैन्य संगठन है?

नहीं।

BRICS कोई सैन्य गठबंधन नहीं है।

इसके सदस्य देशों के बीच सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर चर्चा जरूर होती है, लेकिन BRICS का कोई NATO जैसा सामूहिक सैन्य कमांड या Article 5 जैसा रक्षा प्रावधान नहीं है।

इसे मुख्य रूप से राजनीतिक-आर्थिक सहयोग और कूटनीतिक समन्वय का मंच समझना ज्यादा सही है।

BRICS की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

BRICS की सबसे बड़ी ताकत इसके सदस्यों की संयुक्त आर्थिक, जनसंख्या और संसाधन क्षमता है।

इन देशों के पास बड़ी आबादी, ऊर्जा संसाधन, कृषि क्षमता, औद्योगिक आधार और विशाल उपभोक्ता बाजार हैं।

इसके अलावा चीन और भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तथा रूस, सऊदी अरब और UAE जैसे ऊर्जा क्षेत्र के महत्वपूर्ण देश इसे आर्थिक रूप से प्रभावशाली बनाते हैं।

BRICS का विस्तार भी यह संकेत देता है कि कई देश ग्लोबल साउथ के साथ अधिक मजबूत सहयोग चाहते हैं।

BRICS की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

BRICS के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं।

सभी सदस्य देशों की विदेश नीति एक जैसी नहीं है।

भारत और चीन के बीच सीमा और रणनीतिक मतभेद हैं। रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव है। अलग-अलग सदस्य देशों की आर्थिक प्राथमिकताएं भी अलग हैं।

ऐसे में हर मुद्दे पर एक जैसी राय बनाना आसान नहीं है।

इसके अलावा BRICS का निर्णय consensus के आधार पर होता है। इसलिए किसी भी बड़े फैसले के लिए सभी सदस्यों के बीच सहमति बनाना जरूरी हो सकता है।

यही वजह है कि BRICS की सफलता केवल सदस्य देशों की संख्या बढ़ाने से तय नहीं होगी। असली चुनौती यह होगी कि यह समूह कितने ठोस और व्यावहारिक फैसले लागू कर पाता है।

क्या BRICS एक नई विश्व व्यवस्था बना सकता है?

BRICS के विस्तार ने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की बहस को जरूर तेज किया है।

समूह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और अधिक प्रतिनिधित्व वाली वैश्विक संस्थाओं की बात करता है।

लेकिन नई विश्व व्यवस्था बनाना केवल किसी एक संगठन के विस्तार से संभव नहीं है।

इसके लिए आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता, व्यापार, वित्त, कूटनीति, सैन्य संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे कई कारकों की जरूरत होती है।

इसलिए BRICS को मौजूदा वैश्विक व्यवस्था का तुरंत विकल्प मानना जल्दबाजी होगी।

इसे अधिक सही तरीके से वैश्विक शक्ति संतुलन में बढ़ते प्रभाव वाले मंच के रूप में समझा जा सकता है।

BRICS Summit से आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?

यह सवाल भी जरूरी है।

BRICS की बैठकें भले ही राष्ट्राध्यक्षों और विदेश मंत्रियों के स्तर पर होती हैं, लेकिन इसके फैसलों का असर आम लोगों तक पहुंच सकता है।

व्यापार बढ़ने से नए बाजार खुल सकते हैं।

निवेश बढ़ने से उद्योग और रोजगार के अवसर बन सकते हैं।

NDB जैसी संस्थाओं के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को वित्त मिल सकता है।

तकनीकी सहयोग से डिजिटल सेवाओं और innovation को बढ़ावा मिल सकता है।

ऊर्जा सहयोग से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग से दवाओं और चिकित्सा तकनीक तक पहुंच बेहतर हो सकती है।

हालांकि, इन संभावित लाभों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि BRICS के फैसले कितने प्रभावी ढंग से लागू होते हैं।

BRICS से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में

1. BRICS का मूल नाम क्या था?
BRIC

2. BRIC में शुरुआती देश कौन-कौन से थे?
ब्राजील, रूस, भारत और चीन

3. South Africa BRICS में कब शामिल हुआ?
2011 में

4. पहला BRIC Summit कब हुआ था?
2009 में, येकातेरिनबर्ग (रूस) में

5. वर्तमान में BRICS के कितने पूर्ण सदस्य हैं?
11 देश

6. Indonesia BRICS का पूर्ण सदस्य कब बना?
2025 में

7. BRICS में Partner Country व्यवस्था कब शुरू हुई?
2024 में

8. BRICS की प्रमुख वित्तीय संस्था कौन-सी है?
New Development Bank (NDB)

9. New Development Bank की स्थापना कब हुई?
2015 में

10. NDB का मुख्यालय कहां है?
शंघाई, चीन

11. BRICS में निर्णय कैसे लिए जाते हैं?
आम सहमति (Consensus) के आधार पर

12. 2026 में BRICS की अध्यक्षता किस देश के पास है?
भारत के पास

13. 2026 BRICS का थीम क्या है?
Building Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability

14. 2026 BRICS Summit कहां आयोजित होना है?
नई दिल्ली में, सितंबर 2026 में

15. BRICS का मुख्य फोकस क्या है?
Global South के देशों के बीच सहयोग, आर्थिक विकास, वैश्विक शासन में सुधार और टिकाऊ विकास।

एक लाइन में समझें

BRICS एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंच है, जिसमें प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक, राजनीतिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करती हैं।

BRICS सिर्फ एक Summit नहीं, बदलती दुनिया का संकेत है

BRICS को केवल साल में होने वाली एक बैठक समझना सही नहीं होगा।

यह पिछले दो दशकों में एक छोटे आर्थिक समूह से बढ़कर एक बड़े बहुपक्षीय सहयोग मंच में बदल चुका है। आज इसके 11 पूर्ण सदस्य हैं और Partner Country व्यवस्था के जरिए इसका दायरा और बढ़ा है।

BRICS की सबसे बड़ी ताकत इसकी जनसंख्या, अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक संसाधन और ग्लोबल साउथ में मौजूदगी है।

वहीं इसकी सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक मतभेद हैं।

भारत के लिए BRICS इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसे रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मध्य पूर्व और अफ्रीका के महत्वपूर्ण देशों के साथ एक ही मंच पर संवाद करने का अवसर मिलता है।

2026 में भारत की अध्यक्षता इस मंच को और महत्वपूर्ण बनाती है। नई दिल्ली में होने वाला 18वां BRICS Summit वैश्विक शासन, आर्थिक सहयोग, तकनीक, जलवायु, ऊर्जा और विकासशील देशों की आवाज जैसे मुद्दों पर भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखने का बड़ा अवसर होगा।

इसलिए आने वाले समय में BRICS की असली परीक्षा यह नहीं होगी कि इसमें कितने देश शामिल होते हैं, बल्कि यह होगी कि क्या यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका को वास्तव में मजबूत कर पाता है।

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