बिहार UCC पर BJP-JDU में अलग सुर, सरावगी बोले- बातचीत से निकलेगा हल

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बिहार UCC को लेकर NDA के भीतर अलग-अलग बयान सामने आने के बाद सियासी चर्चा तेज हो गई है। बिहार UCC पर बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा है कि गठबंधन के सभी सहयोगी दल साथ बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई सवाल या समस्या सामने आती है तो बातचीत के जरिए उसका समाधान निकाला जाएगा। सरावगी ने यह भी कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में 2029 तक UCC लागू करने का लक्ष्य है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब जेडीयू की तरफ से बिहार में UCC लागू करने को लेकर अलग रुख सामने आ चुका है। जेडीयू नेता श्याम रजक ने पहले कहा था कि पार्टी संसद में UCC से जुड़े कानून का समर्थन कर चुकी है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है।

2029 तक UCC लागू करने की बात

संजय सरावगी ने एक निजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में UCC को लेकर सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में इसे लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। उनके मुताबिक इसके लिए 2029 तक का समय है। सरावगी ने कहा कि NDA के सहयोगी दलों के साथ बैठकर बातचीत होगी। अगर किसी सहयोगी को किसी प्रावधान को लेकर आपत्ति या समस्या है, तो उस पर चर्चा करके आगे का रास्ता तलाशा जाएगा। गौरतलब है कि UCC को लेकर केंद्र की राजनीति के बीच बिहार में भी यह मुद्दा चर्चा में है। हाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से 2029 तक NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की बात कही गई थी। इसके बाद बिहार में सहयोगी दलों की अलग-अलग राय सामने आई।

'पांचों पांडव' वाले बयान से क्या समझें?

संजय सरावगी ने अपने बयान में महाभारत के पांच पांडवों का उदाहरण दिया। उन्होंने NDA के सहयोगी दलों को एक साथ बताते हुए कहा कि गठबंधन के सभी सहयोगी मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालेंगे। उनके मुताबिक जिस तरह संसद में UCC को लेकर सहयोगी दलों के साथ मिलकर काम किया गया, उसी तरह बिहार में भी बातचीत का रास्ता अपनाया जाएगा। सरावगी ने यह संकेत दिया कि किसी मुद्दे पर मतभेद होने का मतलब यह नहीं है कि गठबंधन के भीतर बातचीत की गुंजाइश खत्म हो गई है। सरावगी का 'पांचों पांडव' वाला उदाहरण इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बिहार में UCC पर NDA के अलग-अलग सहयोगियों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है।

श्याम रजक पहले क्या कह चुके हैं?

UCC को लेकर जेडीयू नेता श्याम रजक ने 14 सितंबर को स्पष्ट तौर पर कहा था कि पार्टी संसद में UCC से जुड़े विधेयक का समर्थन कर चुकी है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा था कि पार्टी अपने पुराने रुख पर कायम है। रजक ने बिहार की सरकार को गठबंधन सरकार बताते हुए कहा था कि राज्य में केवल बीजेपी की सरकार नहीं है। उनके मुताबिक NDA में कई सहयोगी दल शामिल हैं और इसलिए किसी एक दल के रुख के आधार पर राज्य में UCC लागू करने का फैसला नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि सरावगी का ताजा बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी की ओर से UCC लागू करने की बात कही जा रही है, जबकि जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने बिहार में इसके कार्यान्वयन का विरोध जताया है।

धारा 370 का भी दिया उदाहरण

UCC पर अपनी बात रखते हुए संजय सरावगी ने धारा 370 का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एक समय धारा 370 को खत्म करना मुश्किल माना जाता था, लेकिन बाद में इसे खत्म किया गया। इसी संदर्भ में उन्होंने UCC को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस का जिक्र किया। सरावगी के मुताबिक जिस तरह पहले असंभव माने जाने वाले मुद्दों पर भी राजनीतिक स्तर पर निर्णय हुए, उसी तरह बातचीत और सहयोग के जरिए UCC पर भी आगे बढ़ा जा सकता है। हालांकि, UCC का बिहार में वास्तविक क्रियान्वयन कैसे होगा और सहयोगी दलों के बीच इस पर क्या सहमति बनती है, यह आगे की राजनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगा।

नीतीश कुमार पर कांग्रेस-RJD को घेरा

संजय सरावगी ने इस दौरान कांग्रेस और आरजेडी की ओर से नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल होने के दिए जा रहे संकेतों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि NDA सरकार के पास तीन-चौथाई बहुमत है और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार जनहित में काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस और आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि NDA के सहयोगी एकजुट हैं। सरावगी ने दोहराया कि NDA के 'पांचों पांडव' साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। उनके बयान में UCC और गठबंधन की एकजुटता, दोनों मुद्दे एक साथ दिखाई दिए।

अब बिहार में UCC पर आगे क्या?

बिहार में UCC को लेकर फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि NDA के अलग-अलग सहयोगी दलों के रुख के बीच सहमति कैसे बनेगी। बीजेपी की तरफ से सरावगी ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है। वहीं जेडीयू के श्याम रजक पहले ही बिहार में UCC लागू करने के खिलाफ पार्टी का रुख बता चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सहयोगी दलों के बीच बातचीत और नेताओं के बयानों पर नजर रहेगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बिहार में UCC का मुद्दा NDA के भीतर राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। 

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