बिहार में UCC पर घमासान के बीच मांझी का बड़ा बयान, ट्रिपल तलाक और 370 पर भी बोले
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
बिहार में UCC यानी समान नागरिक संहिता को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। UCC पर केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने खुलकर समर्थन जताया है। उनके बयान के बाद बिहार में एनडीए के भीतर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग रुख एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। दूसरी ओर, जेडीयू नेता और आरजेडी की ओर से यूसीसी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
अमित शाह के ऐलान के बाद बढ़ी बहस
यूसीसी को लेकर ताजा विवाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद तेज हुआ। अमित शाह ने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। यूसीसी का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों के लिए धर्म से अलग एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। हालांकि, इसके स्वरूप और लागू करने के तरीके को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। बिहार में जेडीयू विधायक श्याम रजक ने इस मुद्दे पर कहा था कि राज्य में यूसीसी को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पार्टी यूसीसी के प्रावधानों पर विमर्श के बाद अपना निर्णय लेगी।
जीतन राम मांझी ने क्या कहा?
अब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूसीसी को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने इसे संविधान में दिए गए समानता के अधिकार से जोड़ते हुए समर्थन की बात कही। मांझी ने अपने पोस्ट में कहा कि बाबा साहेब का संविधान देश की धर्मनिरपेक्ष नीति पर आधारित है और नागरिकों को समानता का अधिकार देता है। उनके मुताबिक यूसीसी के अनुपालन को लेकर किसी तरह के दांव-पेच की बात करना उनकी समझ में संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। मांझी ने तीन तलाक और अनुच्छेद 370 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार संवैधानिक व्यवस्थाओं को लागू करने के पक्ष में है, चाहे मामला तीन तलाक का हो या अनुच्छेद 370 का। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी का चेहरा देखकर या किसी खास व्यक्ति को खुश करने के लिए काम नहीं करेगी। अपने बयान में मांझी ने समानता के अधिकार को यूसीसी से जोड़ते हुए इसे राष्ट्रहित में लिए जा रहे फैसलों का हिस्सा बताया।
बिहार में एनडीए के अंदर क्या है स्थिति?
यूसीसी पर बिहार में एनडीए के अलग-अलग नेताओं के बयान सामने आने से राजनीतिक बहस और बढ़ गई है। एक तरफ जीतन राम मांझी ने समर्थन किया है, वहीं जेडीयू नेताओं की ओर से अभी इस मुद्दे पर अंतिम फैसला स्पष्ट नहीं किया गया है। जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी का कहना है कि यूसीसी के प्रावधानों पर चर्चा के बाद पार्टी अपना रुख तय करेगी। इससे यह संकेत मिलता है कि बिहार में इस मुद्दे पर सहयोगी दलों के बीच विचार-विमर्श की स्थिति बनी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी एनडीए के कुछ सहयोगियों की ओर से यूसीसी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। 15 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी एनडीए के भीतर यूसीसी पर आम सहमति को लेकर सवाल उठाए थे।
तेजस्वी यादव ने जेडीयू पर साधा निशाना
यूसीसी को लेकर बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी जेडीयू पर हमला बोल चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जेडीयू इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने से बच रही है और भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। तेजस्वी यादव ने जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय झा के नेतृत्व में जेडीयू की राजनीतिक दिशा बदल गई है। तेजस्वी ने कहा था कि उनकी पार्टी यूसीसी जैसे कानून के विरोध में रही है और आगे भी इसके खिलाफ राजनीतिक स्तर पर अपना विरोध जारी रखेगी।
UCC को लेकर आगे क्या होगा?
बिहार में यूसीसी को लेकर फिलहाल तीन अलग-अलग राजनीतिक रुख दिखाई दे रहे हैं। जीतन राम मांझी ने स्पष्ट रूप से इसके समर्थन की बात कही है। जेडीयू ने प्रावधानों पर विचार-विमर्श के बाद फैसला लेने की बात कही है, जबकि तेजस्वी यादव ने इसके विरोध की स्थिति दोहराई है। राष्ट्रीय स्तर पर अमित शाह के 2029 से पहले 21 एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने के बयान के बाद यह मुद्दा आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल बिहार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूसीसी के प्रावधानों पर जेडीयू अंतिम रूप से क्या रुख अपनाती है और एनडीए के भीतर इस मुद्दे पर किस तरह की सहमति बनती है। राज्य की राजनीति में इस मुद्दे पर आगे आने वाले बयान और फैसले अहम रहेंगे।