बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप पर घमासान, रोहिणी के आरोपों पर BJP का बड़ा पलटवार

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 बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राजद नेता रोहिणी आचार्य ने सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को किसान विरोधी बताते हुए सरकार पर उपजाऊ कृषि भूमि जबरन लेने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में बिहार भाजपा ने राजद को फेक न्यूज फैलाने वाला बताते हुए विकास की राह में बाधा बनने का आरोप लगाया है। बीजेपी का कहना है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली NDA सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि किसी किसान की जमीन उसकी सहमति के बिना नहीं ली जाएगी। पार्टी ने दावा किया कि जिन किसानों की जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित होगी, उन्हें विकसित जमीन का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा वापस देने की योजना है।

रोहिणी आचार्य ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?

रोहिणी आचार्य ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बिहार में प्रस्तावित टाउनशिप योजना को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह परियोजना आम लोगों और किसानों के हित से ज्यादा रियल एस्टेट बिल्डरों और निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लाई गई है। उन्होंने कहा कि कृषि योग्य और उपजाऊ जमीन पर बड़े पैमाने पर निर्माण होने से पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। रोहिणी ने हरित क्षेत्रों में कमी, भूजल स्तर गिरने और स्थानीय पर्यावरण को संभावित नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई। रोहिणी आचार्य का आरोप है कि सरकार किसानों की खेती योग्य जमीन को जबरन अधिग्रहित कर सकती है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने सरकार की नीति और प्रस्तावित परियोजना पर सवाल उठाए। उनके इस पोस्ट के बाद बिहार की राजनीति में टाउनशिप परियोजना को लेकर बहस तेज हो गई है।

BJP ने कहा- RJD की फेक न्यूज फैक्ट्री का पर्दाफाश

रोहिणी आचार्य के आरोपों पर भाजपा ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए त्वरित प्रतिक्रिया दी। बीजेपी ने राजद पर परियोजना को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि RJD की ओर से सैटेलाइट टाउनशिप योजना के बारे में गलत जानकारी फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। भाजपा के मुताबिक, NDA सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के खिलाफ भ्रम फैलाना बिहार के विकास और समृद्धि के रास्ते में रुकावट पैदा करने जैसा है। भाजपा ने अपने जवाब में दोहराया कि सरकार की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि जो किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते, उनकी जमीन नहीं ली जाएगी। पार्टी ने यह भी कहा कि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों के हितों की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है और जमीन से जुड़े फैसलों में किसानों की सहमति महत्वपूर्ण होगी।

55 प्रतिशत विकसित जमीन वापस देने का दावा

भाजपा ने नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें किसानों से जबरन जमीन नहीं लेने का आश्वासन दिया गया था। सरकार की ओर से बताए गए प्रस्ताव के अनुसार, परियोजना के लिए जिन किसानों की जमीन ली जाएगी, उन्हें जमीन विकसित करने के बाद उसका करीब 55 प्रतिशत हिस्सा वापस दिया जा सकता है। यानी सरकार का दावा है कि किसान केवल जमीन गंवाने वाले पक्ष नहीं होंगे, बल्कि विकसित टाउनशिप परियोजना में उन्हें हिस्सेदारी का लाभ भी मिल सकता है। हालांकि, इस पूरी योजना के विभिन्न पहलुओं और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे जारी हैं। बीजेपी ने कहा कि किसी भी किसान के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा और बिना सहमति जमीन लेने का सवाल नहीं है।

पाटलिपुत्र टाउनशिप की बैठक में किसानों ने किया था हंगामा

इसी महीने 22 तारीख को पटना में पाटलिपुत्र टाउनशिप के स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा भी मौजूद थे। बैठक के दौरान कुछ किसानों ने अपनी जमीन और अधिग्रहण की आशंकाओं को लेकर हंगामा किया था। किसानों की चिंताओं के बीच मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि किसी भी भूधारी से उसकी सहमति के बिना जमीन नहीं ली जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा था कि परियोजना के लिए ली जाने वाली जमीन के बदले विकसित हिस्से का करीब 55 प्रतिशत भाग संबंधित किसानों को वापस देने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार की ओर से दिए गए इस आश्वासन के बावजूद विपक्षी दल इस परियोजना को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जमीन, किसानों के अधिकार और विकास मॉडल को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना

बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए राज्य सरकार ने आधुनिक शहरी सुविधाओं से लैस 12 टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है। इन प्रस्तावित टाउनशिप में सड़क, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सीवरेज, स्कूल, अस्पताल, पार्क और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके लिए राज्य के 12 बड़े और महत्वपूर्ण जिलों में जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार का उद्देश्य बढ़ते शहरों पर दबाव कम करने के साथ लोगों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। हालांकि, इस योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन और किसानों की सहमति का मुद्दा बना हुआ है। सरकार इसे विकास और आधुनिक शहरीकरण से जोड़कर देख रही है, जबकि विपक्ष जमीन, पर्यावरण और किसानों के हितों को लेकर सवाल उठा रहा है। फिलहाल, बिहार सैटेलाइट टाउनशिप योजना पर रोहिणी आचार्य और भाजपा के बीच शुरू हुई यह तकरार राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गई है। अब इस परियोजना के क्रियान्वयन, भूमि अधिग्रहण की अंतिम प्रक्रिया और किसानों की भागीदारी पर आगे की तस्वीर साफ होने का इंतजार रहेगा।

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