पटना में सुबह से तेज बारिश, 31 जिलों में येलो अलर्ट; 5 सितंबर तक बरसेंगे बादल

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पटना: बिहार में बारिश ने एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल दिया है। बुधवार सुबह से राजधानी पटना में झमाझम बारिश हो रही है, जबकि मंगलवार को भी पटना समेत कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही बिहार में बारिश से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं कई निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या भी सामने आने लगी है। मौसम विभाग ने बुधवार को पटना समेत राज्य के 31 जिलों के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में तेज बारिश के साथ मेघगर्जन और वज्रपात की संभावना जताई गई है। विभाग के अनुसार, 5 सितंबर तक राज्य में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

पटना में सुबह से झमाझम बारिश, सड़कों पर जमा हुआ पानी

राजधानी पटना में बुधवार सुबह से आसमान में घने बादल छाए रहे और कई इलाकों में तेज बारिश हुई। लगातार बारिश के कारण कुछ सड़कों और निचले इलाकों में पानी जमा होने की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने दिनभर रुक-रुककर बारिश होने की संभावना जताई है। बारिश से तापमान में कुछ कमी आने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बारिश रुकने के बाद वातावरण में नमी बढ़ने से उमस लोगों को परेशान कर सकती है। ऐसे में मौसम का असर अगले कुछ दिनों तक बना रहने की संभावना है।

पटना समेत इन 31 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दरभंगा, वैशाली और समस्तीपुर में बारिश की संभावना है। इसके अलावा बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, पटना, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, जमुई और बांका भी अलर्ट वाले जिलों में शामिल हैं। इन जिलों में कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। इसके साथ ही मेघगर्जन और बिजली चमकने की भी आशंका जताई गई है। लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है।

5 सितंबर तक क्यों जारी रह सकता है बारिश का दौर?

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का एक क्षेत्र सक्रिय है। इस मौसमी सिस्टम का प्रभाव ओडिशा और झारखंड के साथ बिहार के मौसम पर भी पड़ रहा है। अनुमान है कि यह सिस्टम अगले करीब 48 घंटे तक सक्रिय रह सकता है। इसके प्रभाव से बिहार के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, मेघगर्जन और वज्रपात की गतिविधियां 5 सितंबर तक जारी रहने की संभावना है। इसके बाद बारिश की तीव्रता और दायरा कुछ कम हो सकता है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव होने के कारण अलग-अलग जिलों में स्थिति अलग रह सकती है।

लगातार बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ा

बारिश का असर अब राज्य की नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। कई नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी की खबर है, जिससे नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ सकती है। जहानाबाद में दरधा नदी उफान पर बताई गई है। जाफरगंज पुल के ऊपर करीब दो फीट पानी बहने से आसपास के लोगों के आवागमन पर असर पड़ा है। वहीं, बक्सर में गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। कर्मनाशा नदी का पानी सिकरौल गांव की ओर जाने वाले रास्ते पर करीब तीन फीट तक पहुंचने की जानकारी है, जिससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।

कैमूर में उफान पर नदियां, दुकानों को हुआ नुकसान

कैमूर की पहाड़ियों में हुई तेज बारिश के बाद दुर्गावती, सुगवा और काव नदियों में पानी बढ़ गया है। कई इलाकों में नदी का बहाव तेज होने की स्थिति बनी हुई है। सुगवा नदी का पानी प्रसिद्ध गुप्ता धाम के मुख्य द्वार तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। धाम के बाहर लगीं 12 से अधिक दुकानों के बाढ़ के पानी में बहने की बात कही गई है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय चेतावनियों का पालन करना भी जरूरी है।

किसानों के लिए राहत, बिहार में अब भी बारिश की कमी

मौजूदा मानसून सीजन में बिहार में अब तक सामान्य से करीब 40 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। 2 सितंबर तक राज्य में सामान्य तौर पर करीब 782.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। इसके मुकाबले इस अवधि तक लगभग 487.6 मिमी बारिश ही दर्ज की गई। ऐसे में पिछले कुछ दिनों से मानसून के सक्रिय होने और लगातार बारिश होने से बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद जगी है। किसानों के लिए यह बारिश राहत की खबर हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेती प्रभावित हो रही थी। खेतों में नमी बढ़ने से खरीफ फसलों को फायदा मिलने की संभावना है। हालांकि, जिन इलाकों में बहुत तेज बारिश हो रही है, वहां जलजमाव फसलों के लिए समस्या भी पैदा कर सकता है। इसलिए मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों और आम लोगों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है। 

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