पुराना केवाला ऑनलाइन नहीं दिख रहा? रजिस्ट्री ऑफिस से ऐसे निकालें
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जमीन का पुराना केवाला (Deed) ऑनलाइन पोर्टल पर न दिखे तो रजिस्ट्री ऑफिस से कैसे निकालें?
बिहार में जमीन का मतलब सिर्फ एक टुकड़ा नहीं होता, यह लोगों के लिए जीवन भर की पूंजी, मान-सम्मान और कई बार विवादों की जड़ भी होती है। अगर आपके घर में जमीन को लेकर कोई बंटवारा हो रहा है, किसी ने आपकी जमीन पर दावा ठोक दिया है, या आप अपनी पुश्तैनी जमीन बेचना चाहते हैं, तो सबसे पहले जिस कागज की मांग होती है, वह है— केवाला (Land Deed)।
आजकल बिहार सरकार ने 'भूमि जानकारी' (Bhumijankari) पोर्टल बना दिया है, जहां से लोग अपनी जमीन के दस्तावेज ऑनलाइन सर्च कर लेते हैं। लेकिन असली दर्द तब शुरू होता है जब आप पोर्टल पर अपनी जमीन का डिटेल्स डालते हैं और स्क्रीन पर "No Record Found" लिखा आ जाता है। आप परेशान हो जाते हैं कि आखिर दादा-परदादा के समय का या 15-20 साल पुराना केवाला मिलेगा कैसे?
पटना और सभी बिहार के जिलों में यह एक बहुत ही आम समस्या है। ऑनलाइन डाटा नहीं दिखने का मतलब यह नहीं है कि आपका केवाला गायब हो गया है या आपकी जमीन खतरे में है। आज मैं आपको एक दम जमीनी हकीकत और स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस बताऊंगा कि अगर आपका केवाला ऑनलाइन नहीं दिख रहा है, तो आप अपने जिले या अनुमंडल के निबंधन कार्यालय (Registry Office) से उसकी सर्टिफाइड कॉपी (नकल) कैसे निकाल सकते हैं। इसमें आपको दलालों के चक्कर में पड़ने की भी कोई जरूरत नहीं है।
पुराना केवाला ऑनलाइन पोर्टल पर क्यों नहीं दिखता है?
रजिस्ट्री ऑफिस की दौड़ लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपका केवाला ऑनलाइन क्यों नहीं चढ़ा है। इसके पीछे मुख्य रूप से ये कारण होते हैं:
डिजिटाइजेशन की देरी: बिहार में जमीन के दस्तावेजों को ऑनलाइन करने का काम मुख्य रूप से 2005 के बाद तेजी से हुआ। 2016 के बाद से तो सब कुछ कंप्यूटराइज्ड है। लेकिन 1970, 1980 या 1990 के दशक के जो केवाले हैं, वे आज भी मोटे-मोटे रजिस्टरों (Volume) में रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड रूम में बंद हैं। सबका डाटा अभी तक पोर्टल पर पूरी तरह अपलोड नहीं हो पाया है।
रजिस्टर के पन्ने फटे होना: कई बार पुराने रजिस्टर इतने जर्जर हो चुके होते हैं कि उन्हें स्कैन करना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में उन केवालों का ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं बन पाता।
इंडेक्सिंग (Indexing) में स्पेलिंग मिस्टेक: कई बार डाटा एंट्री ऑपरेटर नाम की स्पेलिंग गलत टाइप कर देते हैं। जैसे 'राम प्रसाद' को 'रमा प्रसाद' लिख दिया, जिसके कारण आप जब ऑनलाइन सर्च करते हैं तो वह मैच नहीं करता और रिकॉर्ड नहीं दिखता।
मैनुअल रिकॉर्ड: पुराने समय में सारा काम हाथ से होता था। इसलिए सरकार के पास उनका डिजिटल बैकअप मौजूद नहीं है।
रजिस्ट्री ऑफिस से पुराना केवाला निकालने के लिए जरूरी जानकारी
अगर आप खाली हाथ रजिस्ट्री ऑफिस चले जाएंगे तो कोई भी कर्मचारी आपकी मदद नहीं कर पाएगा। वहां लाखों दस्तावेजों का अंबार होता है। अपने केवाला की कॉपी (नकल) निकालने के लिए आपके पास इनमें से कुछ बुनियादी जानकारी (Basic Details) होना बहुत जरूरी है:
डीड नंबर (Deed Number): यह सबसे जरूरी चीज है। अगर आपके पास पुराना डीड नंबर है, तो काम 10 मिनट में हो जाएगा।
रजिस्ट्री का साल (Year of Registration): जमीन किस साल खरीदी गई थी? 1985, 1992, या 2001?
क्रेता और विक्रेता का नाम (Buyer and Seller Name): किसने जमीन बेची और किसने खरीदी, उनका सही नाम।
मौजा और थाना नंबर (Mauza and Thana No): जमीन किस गांव/मोहल्ले में है और उसका थाना नंबर क्या है।
खाता, खसरा और रकबा: जमीन का प्लॉट नंबर और कितनी जमीन है (डेसिमल या कट्ठा में)।
अगर आपके पास डीड नंबर नहीं है, तो घबराएं नहीं। सिर्फ नाम, साल और मौजा के आधार पर भी 'तलाशी' (Search) करवाई जा सकती है।
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: रजिस्ट्री ऑफिस से केवाला की नकल कैसे निकालें
अब आते हैं मुख्य मुद्दे पर। पटना हो, मुजफ्फरपुर, गया या बिहार का कोई भी अनुमंडल, रजिस्ट्री ऑफिस का काम करने का तरीका एक ही होता है। बस इन स्टेप्स को फॉलो करें:
स्टेप 1: सही निबंधन कार्यालय (Registry Office) का पता लगाएं
सबसे पहले यह जान लें कि आपकी जमीन की रजिस्ट्री कहां हुई थी। पुरानी रजिस्ट्रियां अक्सर जिला मुख्यालय (District Sub-Registrar Office) में होती थीं, जबकि अब अनुमंडल (Sub-Division) स्तर पर भी रजिस्ट्री ऑफिस खुल गए हैं। आपको उसी ऑफिस में जाना होगा जहां मूल रूप से रजिस्ट्री हुई थी।
स्टेप 2: ऑफिस के बाहर 'कातिब' (Deed Writer) से मिलें
आप सीधे ऑफिस के अंदर जाकर क्लर्क से पुरानी फाइल नहीं मांग सकते। हर रजिस्ट्री ऑफिस के बाहर लाइसेंसी कातिब (Deed Writer) या मुंशी बैठते हैं। इनके पास पुराने रजिस्टरों का एक प्राइवेट 'इंडेक्स' (Index) होता है।
आप उनके पास जाएं और कहें कि मुझे 'तलाशी' (Search) करवानी है। आप उन्हें नाम, साल और मौजा बताएंगे, तो वे अपने इंडेक्स रजिस्टर में चेक करके आपको आपका डीड नंबर (Deed Number), वॉल्यूम नंबर (Volume Number) और पेज नंबर (Page Number) खोज कर दे देंगे। इस काम के लिए वे कुछ मामूली फीस लेते हैं।
स्टेप 3: सर्च आवेदन (Search Application) फॉर्म भरें
डीड नंबर और वॉल्यूम नंबर मिल जाने के बाद, आपको रजिस्ट्री ऑफिस के काउंटर से एक 'तलाशी फॉर्म' (Search Form) लेना होगा। इस फॉर्म में क्रेता-विक्रेता का नाम, डीड नंबर, वर्ष और मौजा भरें।
स्टेप 4: सरकारी फीस का चालान (Challan) जमा करें
पुराना केवाला निकालने की एक सरकारी फीस होती है, जो पेज की संख्या और साल के हिसाब से तय होती है। आजकल यह फीस ऑनलाइन ई-चालान (e-Receipt) के माध्यम से या ऑफिस के काउंटर पर जमा होती है। आपको यह चालान कटवाकर उसकी रसीद अपने सर्च आवेदन के साथ लगानी होगी।
स्टेप 5: मुहाफ़िज़ (Record Keeper) के पास फॉर्म जमा करें
रजिस्ट्री ऑफिस में एक 'रिकॉर्ड रूम' होता है, जिसका इंचार्ज मुहाफ़िज़ (Muhafiz) कहलाता है। आपको अपना भरा हुआ फॉर्म और चालान की रसीद मुहाफ़िज़ या संबंधित क्लर्क के पास जमा करनी होगी।
मुहाफ़िज़ आपके फॉर्म के आधार पर रिकॉर्ड रूम से वह पुराना रजिस्टर (Volume) निकालेगा जिसमें आपका केवाला दर्ज है।
स्टेप 6: सर्टिफाइड कॉपी (Certified Copy) प्राप्त करें
जब मूल रजिस्टर मिल जाता है, तो ऑफिस के कर्मचारी उस हाथ से लिखे केवाले की हूबहू नकल तैयार करते हैं (आजकल फोटोकॉपी भी की जाती है)। उस कॉपी पर सब-रजिस्ट्रार (Sub-Registrar) की मुहर और दस्तखत होते हैं। इसे ही सर्टिफाइड कॉपी या 'नकल' कहा जाता है।
आवेदन जमा करने के बाद यह कॉपी मिलने में आमतौर पर 3 से 7 दिन का समय लग सकता है, जो ऑफिस के वर्कलोड पर निर्भर करता है। यह सर्टिफाइड कॉपी हर कोर्ट और सरकारी काम में 100% मान्य होती है।
टेबल: पुराना केवाला निकालने के लिए जरूरी बनाम वैकल्पिक जानकारी
| जानकारी का प्रकार | विवरण | अहमियत |
| डीड नंबर (Deed No.) | वह नंबर जिससे रजिस्ट्री दर्ज हुई थी | सबसे जरूरी (सीधे कॉपी मिल जाएगी) |
| वॉल्यूम और पेज नंबर | रजिस्टर की संख्या और पन्ना | बहुत जरूरी (खोजने में आसानी) |
| रजिस्ट्री का साल | किस वर्ष जमीन खरीदी/बेची गई | जरूरी (अगर डीड नंबर नहीं है तो) |
| खाता/खेसरा नंबर | जमीन का प्लॉट डिटेल्स | सहायक (तलाशी को पक्का करने के लिए) |
| चौहद्दी (Boundaries) | जमीन के चारों तरफ क्या है | वैकल्पिक (Optional) |
दलालों और फ्रॉड से कैसे बचें?
रजिस्ट्री ऑफिस के आस-पास बहुत से ऐसे लोग घूमते रहते हैं जो दावा करते हैं कि वे 1 घंटे में पुराना केवाला निकाल देंगे और बदले में हजारों रुपये मांगते हैं।
आपको यह समझना होगा कि सरकारी प्रक्रिया का एक तय सिस्टम है। मुहाफ़िज़ को रिकॉर्ड रूम से रजिस्टर निकालने में समय लगता है। दलाल भी उसी कातिब और मुहाफ़िज़ के पास जाते हैं जिसके पास आप खुद जा सकते हैं। इसलिए, अपना काम खुद करवाएं। सही कातिब से इंडेक्स सर्च करवाएं और सीधे काउंटर पर चालान जमा करें। आपका काम बहुत ही कम खर्चे में और पूरी तरह से लीगल तरीके से हो जाएगा।
अगर रिकॉर्ड रूम का रजिस्टर ही फट गया हो, तो क्या होगा?
यह एक बहुत ही गंभीर और जमीनी सवाल है जो कई लोगों के सामने आता है। अगर आपका केवाला 1950 या 1960 का है और मुहाफ़िज़ बताता है कि वह रजिस्टर (Volume) पानी से गल गया है, दीमक खा गया है या पन्ने फट चुके हैं, तो क्या होगा?
ऐसी स्थिति में आपको मायूस होने की जरूरत नहीं है। अगर रजिस्टर खराब हो गया है, तो सब-रजिस्ट्रार ऑफिस आपको एक लिखित प्रमाण पत्र (Certificate) दे सकता है कि "संबंधित रजिस्टर फटने/नष्ट होने के कारण नकल देना संभव नहीं है।" इस प्रमाण पत्र के आधार पर, आप अपने पुराने म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की रसीद, खतियान या सिविल कोर्ट के माध्यम से अपनी जमीन का मालिकाना हक साबित कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. रजिस्ट्री ऑफिस से सर्टिफाइड केवाला निकालने में कितना खर्चा आता है?
सरकारी फीस बहुत मामूली होती है, जो पेजों की संख्या पर निर्भर करती है (आमतौर पर 100 से 500 रुपये के बीच)। इसके अलावा कातिब को इंडेक्स खोजने (तलाशी) के लिए कुछ मेहनताना देना पड़ सकता है।
2. अगर मुझे साल (Year) याद नहीं है, तो क्या पुराना केवाला मिल सकता है?
यह थोड़ा मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं। अगर आपको साल नहीं पता, तो कातिब को 10-15 सालों के इंडेक्स रजिस्टर (जैसे 1980 से 1995 तक) मैन्युअली चेक करने होंगे। इसमें समय और मेहनत ज्यादा लगती है, इसलिए 'तलाशी' का खर्च बढ़ सकता है।
3. क्या सर्टिफाइड कॉपी (नकल) की कानूनी अहमियत मूल केवाला (Original Deed) जितनी होती है?
जी हां, बिल्कुल। निबंधन कार्यालय द्वारा मुहर और हस्ताक्षर के साथ जारी की गई सर्टिफाइड कॉपी (Nakal) कोर्ट, बैंक लोन, दाखिल-खारिज और हर सरकारी काम में मूल केवाला के बराबर ही मान्य होती है।
4. ऑनलाइन 'भूमि जानकारी' पोर्टल पर मेरे नाम की स्पेलिंग गलत है, क्या रजिस्ट्री ऑफिस में भी गलत होगी?
पोर्टल पर डाटा एंट्री ऑपरेटर टाइप करते हैं, इसलिए वहां गलती हो सकती है। लेकिन रजिस्ट्री ऑफिस के मूल रजिस्टर में वही स्पेलिंग होगी जो जमीन खरीदते समय मूल दस्तावेज पर लिखी गई थी। इसलिए ऑफिस से सर्टिफाइड कॉपी निकलवाने पर आपको सही जानकारी मिलेगी।
5. केवाला निकालने के आवेदन के कितने दिन बाद कॉपी मिल जाती है?
सामान्य तौर पर चालान और फॉर्म जमा करने के 3 से 7 कार्य दिवस (Working Days) के भीतर आपको सर्टिफाइड कॉपी मिल जानी चाहिए। पुराने रिकॉर्ड खोजने में अगर ज्यादा समय लगता है तो थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
आपकी बारी
जमीन के कागजात आपकी पुश्तैनी अमानत हैं। अगर कोई पुराना केवाला पोर्टल पर नहीं मिल रहा है, तो बिना घबराए आज ही अपने संबंधित रजिस्ट्री ऑफिस जाएं। पटना और सभी बिहार के जिलों में प्रक्रिया लगभग एक जैसी और पारदर्शी है। बस सही जानकारी जुटाएं, सही काउंटर पर फॉर्म भरें और अपनी जमीन के लीगल डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित करें। अगर आपका कागजात सही है, तो कोई भी आपसे आपका हक नहीं छीन सकता। सिस्टम को समझें और अपना काम पूरे आत्मविश्वास के साथ पूरा करवाएं।
