बिहार NDA में बड़ा बदलाव! JDU को मिल सकती है विधान परिषद सभापति की कुर्सी

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 बिहार NDA में सत्ता संतुलन को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। बिहार NDA में अब विधान परिषद सभापति का पद जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में जाने की चर्चा है। बिहार NDA के मौजूदा सत्ता समीकरण में बीजेपी के पास मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद हैं, ऐसे में विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी JDU को देने की संभावित तैयारी को अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक बीजेपी और JDU के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनने की बात सामने आई है। मौजूदा सभापति अवधेश नारायण सिंह के पद छोड़ने के बाद JDU के लिए परिषद की शीर्ष जिम्मेदारी का रास्ता खुल सकता है।

JDU को क्यों मिल सकती है विधान परिषद सभापति की कुर्सी?

बिहार में नई सत्ता व्यवस्था बनने के बाद NDA के भीतर शीर्ष संवैधानिक पदों के बंटवारे को लेकर चर्चा लगातार होती रही है। फिलहाल मुख्यमंत्री पद बीजेपी के सम्राट चौधरी के पास है, जबकि विधानसभा अध्यक्ष का पद भी बीजेपी के प्रेम कुमार संभाल रहे हैं। ऐसे में विधान परिषद सभापति का पद JDU को मिलने से दोनों सहयोगी दलों के बीच प्रमुख पदों का संतुलन बदल सकता है। जागरण की 20 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी विधान परिषद सभापति का पद JDU को सौंपने पर सहमत हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा सभापति अवधेश नारायण सिंह जल्द इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, इस तरह के राजनीतिक बदलाव की अंतिम स्थिति औपचारिक इस्तीफे और उसके बाद होने वाली संवैधानिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

अवधेश नारायण सिंह के बाद क्या होगा?

विधान परिषद के मौजूदा सभापति अवधेश नारायण सिंह बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। सितंबर की शुरुआत से ही उनके पद से हटने और सभापति की कुर्सी JDU को मिलने की अटकलें चल रही थीं। 20 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी नेतृत्व ने अवधेश नारायण सिंह को पद छोड़ने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके इस्तीफे के बाद JDU के उपसभापति रामवचन राय कार्यकारी सभापति की भूमिका संभाल सकते हैं। ABP की रिपोर्ट ने हालांकि यह स्पष्ट किया था कि 17 सितंबर तक इस बदलाव की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी और विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर अवधेश नारायण सिंह ही सभापति के रूप में दर्ज थे। इसलिए अभी इसे राजनीतिक सहमति और संभावित बदलाव के रूप में देखना उचित होगा, जब तक औपचारिक आदेश सामने नहीं आता।

पहले भी JDU के पास रह चुका है यह पद

बिहार विधान परिषद के सभापति का पद JDU के लिए नया नहीं है। बीजेपी के अवधेश नारायण सिंह से पहले JDU नेता देवेश चंद्र ठाकुर इस पद पर करीब दो वर्षों तक रहे थे। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद देवेश चंद्र ठाकुर ने विधान परिषद की सदस्यता और सभापति पद छोड़ दिया था। इसके बाद अवधेश नारायण सिंह ने यह जिम्मेदारी संभाली। यही वजह है कि मौजूदा राजनीतिक समीकरण में JDU की ओर से इस पद की दावेदारी को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हुई है।

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बदला समीकरण

नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा गया और परिषद सचिवालय ने इसे स्वीकार किया। इसके बाद बिहार की सत्ता व्यवस्था में बदलाव हुआ और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने। विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के प्रेम कुमार के पास है। ऐसे में परिषद सभापति का पद JDU को मिलने की स्थिति में NDA के दोनों प्रमुख घटक दलों के बीच शीर्ष विधायी पदों का नया बंटवारा दिखाई देगा।

क्या यह NDA के भीतर पावर बैलेंस का संकेत है?

विधान परिषद सभापति पद को लेकर चल रही चर्चा को बिहार NDA के भीतर सत्ता संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। JDU लंबे समय से इस पद पर अपनी दावेदारी को लेकर चर्चा में रहा है। कुछ रिपोर्टों में इसे दोनों दलों के बीच जिम्मेदारियों के संतुलन की दिशा में कदम बताया गया है। वहीं, सितंबर के मध्य की कुछ रिपोर्टों में बदलाव को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए थे। इससे साफ है कि औपचारिक निर्णय तक राजनीतिक स्थिति को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 20 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी और JDU के बीच विधान परिषद सभापति पद को लेकर सहमति बनने की बात कही गई है। अगर प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो बिहार NDA की सत्ता संरचना में एक महत्वपूर्ण संस्थागत बदलाव देखने को मिलेगा।

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