बिहार MLC चुनाव में BJP के गढ़ पर प्रशांत किशोर की नजर, दिव्या ज्योति पर बड़ा दांव?
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बिहार की राजनीति में बिहार MLC चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बिहार MLC चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट करने के संकेत दे दिए हैं। दिव्या ज्योति के पार्टी में शामिल होने के बाद चर्चा तेज है कि जन सुराज उन्हें भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है। इस सीट पर भाजपा समर्थित नवल किशोर यादव का लंबे समय से प्रभाव रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर की पार्टी की ओर से दिव्या ज्योति की संभावित उम्मीदवारी को भाजपा के पुराने गढ़ में नई राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
जन सुराज में शामिल हुईं दिव्या ज्योति
दिव्या ज्योति ने मंगलवार को पटना में जन सुराज की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती भी मौजूद रहे। पार्टी में शामिल होने के बाद दिव्या ज्योति ने शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि वह महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों से प्रेरित होकर शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए काम करती रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर की विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने जन सुराज का हिस्सा बनने का फैसला किया है। हालांकि, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने सीधे तौर पर अपनी उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की। उनका कहना था कि पार्टी नेतृत्व और प्रशांत किशोर की ओर से जो जिम्मेदारी दी जाएगी, वह उसी के अनुसार काम करेंगी।
पटना शिक्षक सीट पर क्यों है सबकी नजर?
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र बिहार विधान परिषद की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है। इस सीट पर लंबे समय से भाजपा समर्थित नवल किशोर यादव का दबदबा रहा है। जानकारी के मुताबिक, नवल किशोर यादव 1996 से लगातार इस सीट पर चुनाव जीतते आ रहे हैं। यही वजह है कि यहां जन सुराज की संभावित एंट्री को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिव्या ज्योति को उम्मीदवार बनाए जाने की स्थिति में जन सुराज सीधे भाजपा के स्थापित प्रभाव को चुनौती दे सकती है। इससे चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना बन सकती है। खास बात यह है कि प्रशांत किशोर पहले भी भाजपा के मजबूत माने जाने वाले इलाकों में जन सुराज को सक्रिय करने की कोशिश कर चुके हैं। ऐसे में पटना शिक्षक सीट पर पार्टी की रणनीति को उसी राजनीतिक विस्तार की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
कौन हैं दिव्या ज्योति?
दिव्या ज्योति पटना की रहने वाली हैं और मूल रूप से बाढ़ की निवासी बताई जाती हैं। वह चाणक्य कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करती हैं। इसके अलावा वह चाणक्य फाउंडेशन की सीईओ भी हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सक्रियता को उनकी संभावित राजनीतिक भूमिका के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिव्या ज्योति के अनुसार, उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों, बालिका शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान जैसे मुद्दों पर लंबे समय से काम किया है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उनका पुराना जुड़ाव भी है। वह पहले निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इस सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं, हालांकि उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली थी। अब जन सुराज से जुड़ने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति बदल गई है। पार्टी का समर्थन मिलने की स्थिति में उनके पास संगठन और चुनावी अभियान के लिहाज से पहले की तुलना में अलग आधार हो सकता है।
क्या BJP के गढ़ में सेंध लगा पाएगी जन सुराज?
जन सुराज ने बिहार की आठ विधान परिषद सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत दिए हैं। ऐसे में पटना शिक्षक सीट पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक हो सकती है। दिव्या ज्योति को मैदान में उतारने का फैसला होता है तो जन सुराज शिक्षा और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को चुनावी अभियान का प्रमुख आधार बना सकती है। वहीं भाजपा के सामने अपने पुराने प्रभाव को बरकरार रखने की चुनौती होगी। नवल किशोर यादव की लंबे समय से चली आ रही चुनावी पकड़ भाजपा के लिए मजबूत पक्ष है। दूसरी ओर, महागठबंधन की संभावित रणनीति भी इस चुनाव को त्रिकोणीय बना सकती है। ऐसे में मतदाताओं के बीच अलग-अलग राजनीतिक विकल्पों के कारण मुकाबला और रोचक होने की संभावना है।
प्रशांत किशोर की रणनीति पर भी रहेगी नजर
दिव्या ज्योति के जन सुराज में शामिल होने को सिर्फ एक राजनीतिक नियुक्ति के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका संबंध पार्टी की व्यापक चुनावी रणनीति से भी जोड़ा जा रहा है। प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार की राजनीति में नए राजनीतिक विकल्प को मजबूत करने की बात करते रहे हैं। विधान परिषद चुनाव में आठ सीटों पर उतरने की तैयारी इसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। पटना शिक्षक सीट पर पार्टी किसी ऐसे चेहरे को आगे बढ़ा सकती है, जिसका शिक्षा क्षेत्र से सीधा जुड़ाव हो। दिव्या ज्योति की प्रोफेशनल पृष्ठभूमि इस लिहाज से जन सुराज के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि, अंतिम उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम पर आधिकारिक मुहर लगना अभी बाकी है। इसलिए फिलहाल उनकी उम्मीदवारी को संभावित दावेदारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बिहार की 8 MLC सीटों पर होने वाला है मुकाबला
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होने वाला है। इनमें पटना शिक्षक के अलावा पटना स्नातक, सारण शिक्षक, तिरहुत शिक्षक, तिरहुत स्नातक, कोसी स्नातक और दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इन सीटों पर चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जन सुराज ने भी इन सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पटना, नवादा और नालंदा जिले शामिल हैं। यहां सामान्य लोकसभा या विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता मतदान नहीं करते, बल्कि संबंधित शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के पंजीकृत शिक्षक मतदाता वोट डालते हैं। यही कारण है कि उम्मीदवार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि, शिक्षक समुदाय के बीच पकड़ और स्थानीय मुद्दे इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जन सुराज दिव्या ज्योति को आधिकारिक तौर पर पटना शिक्षक सीट से उम्मीदवार बनाएगी। अगर ऐसा होता है, तो भाजपा के लंबे समय से मजबूत रहे इस निर्वाचन क्षेत्र में 2026 का मुकाबला खासा दिलचस्प हो सकता है।