दिल्ली हादसे के बाद बिहार के 400 हॉस्टल रडार पर, होगी कड़ी कार्रवाई

📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!

👉 WhatsApp से जुड़ें

 


दिल्ली में हॉस्टल की इमारत गिरने के हादसे के बाद बिहार हॉस्टल जांच तेज हो गई है। बिहार हॉस्टल जांच के तहत राज्यभर में करीब 400 ऐसे PG, लॉज और हॉस्टल चिन्हित किए गए हैं, जो बिना पंजीकरण संचालित हो रहे हैं। प्रशासन अब इन संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, भवन की स्थिति और जरूरी मानकों की जांच करेगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर जुर्माना, सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।

यह कार्रवाई खासतौर पर उन इलाकों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों छात्र निजी हॉस्टल और लॉज में रहते हैं।

पटना समेत पूरे बिहार में 400 संस्थान चिन्हित

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के.एस. अनुपम के अनुसार, पटना हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हॉस्टल और लॉज की स्थिति की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग टीम बनाई गई थी।

टीम ने अलग-अलग जिलों में जाकर संस्थानों की स्थिति का जायजा लिया और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर अब जिलों में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

जांच में करीब 400 PG, हॉस्टल और लॉज ऐसे मिले हैं, जिनके पास जरूरी पंजीकरण नहीं था। इनकी सूची संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को भेजी जा चुकी है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल पंजीकरण की कमी होने पर हर संस्थान को तुरंत बंद नहीं किया जाएगा। यदि कोई संस्थान बुनियादी सुरक्षा मानकों को पूरा करता है, तो उस पर जुर्माना लगाकर पंजीकरण कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

सुरक्षा नियम तोड़े तो सील हो सकता है हॉस्टल

प्रशासन का फोकस केवल रजिस्ट्रेशन पर नहीं है। भवन की मजबूती और छात्रों की सुरक्षा को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है।

यदि किसी हॉस्टल या लॉज में गंभीर सुरक्षा खामी मिलती है या भवन रहने के लिहाज से असुरक्षित पाया जाता है, तो उसे सील करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पुराने और जर्जर भवनों को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक किसी भवन की उम्र और उसकी मौजूदा संरचनात्मक स्थिति हादसे के जोखिम को प्रभावित कर सकती है।

इसी वजह से पुराने भवनों का तकनीकी सेफ्टी ऑडिट कराने पर जोर दिया जा रहा है।

पटना के इन इलाकों पर खास नजर

राजधानी पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की बड़ी संख्या निजी लॉज और हॉस्टलों में रहती है। ऐसे में शहर के प्रमुख कोचिंग क्षेत्रों में सुरक्षा जांच का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है।

बोरिंग रोड, कंकड़बाग, अशोक राजपथ और नया टोला जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र किराये के कमरों, PG और हॉस्टल में रहते हैं।

प्रशासन ने ऐसे क्षेत्रों में भवन की मजबूती के साथ-साथ आपात स्थिति में बाहर निकलने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुरक्षा मानकों की जांच पर विशेष ध्यान देने को कहा है।

किसी आपात स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रास्ते और अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं कितनी कारगर हैं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल रहेगा।

बिहार में हजारों कोचिंग संस्थानों का बड़ा नेटवर्क

उपलब्ध सर्वेक्षण के मुताबिक बिहार में करीब 6,383 कोचिंग संस्थान संचालित हैं। इनमें पटना में लगभग 1,256, मुजफ्फरपुर में 578 और गया में 428 कोचिंग संस्थान बताए गए हैं।

इन कोचिंग संस्थानों के आसपास बड़ी संख्या में हॉस्टल, PG और लॉज भी संचालित होते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बिहार के अलावा झारखंड और दूसरे राज्यों के छात्र भी इन सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं।

पटना में छात्रों के हॉस्टल और लॉज से जुड़े कारोबार का सालाना आकार करीब 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान भी बताया गया है।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोचिंग और छात्र आवास का नेटवर्क बिहार की शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय अर्थव्यवस्था में कितना बड़ा हिस्सा रखता है।

DM और SP मिलकर करेंगे जांच

ADG के मुताबिक सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को संयुक्त रूप से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस जांच में संस्थान का पंजीकरण, भवन की स्थिति और सुरक्षा मानकों का पालन जैसे प्रमुख बिंदु शामिल होंगे। जहां नियमों का पालन नहीं मिलेगा, वहां परिस्थितियों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की कोशिश यह है कि छात्रों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित और रहने योग्य वातावरण मिले। केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर किसी भवन को हॉस्टल या PG के रूप में चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, यदि वह जरूरी मानकों को पूरा नहीं करता।

छात्रों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती

बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की संख्या लगातार बड़ी रही है। ऐसे में हॉस्टल और PG की सुरक्षा व्यवस्था सीधे हजारों परिवारों की चिंता से जुड़ी हुई है।

दिल्ली की घटना के बाद बिहार में शुरू हुई यह जांच केवल तत्काल कार्रवाई तक सीमित रहती है या नियमित सेफ्टी ऑडिट की व्यवस्था बनती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल प्रशासन का संदेश साफ है कि बिना पंजीकरण चल रहे संस्थानों की पहचान की जाएगी और गंभीर सुरक्षा खामियां मिलने पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। छात्रों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करना अब जिला प्रशासन के सामने एक अहम जिम्मेदारी बन गया है।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
"ताज़ा ख़बरें पाएं"
1