बिहार बाढ़ पीड़ितों को आज मिलेंगे 7000 रुपये, 8.27 लाख परिवारों को राहत
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बिहार बाढ़ पीड़ितों के लिए मंगलवार का दिन राहत भरा साबित हो सकता है। बिहार बाढ़ पीड़ित 8 लाख 27 हजार 472 परिवारों को सरकार की ओर से 7-7 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। बिहार बाढ़ पीड़ित परिवारों के बैंक खातों में यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मंगलवार को इस सहायता राशि के हस्तांतरण की शुरुआत करेंगे। आपदा प्रबंधन विभाग ने सोमवार देर शाम तक संबंधित जिलों से प्रभावित परिवारों की पूरी विवरणी जुटा ली थी। सरकार के इस फैसले के तहत कुल 579.23 करोड़ रुपये अनुग्रह सहायता के तौर पर वितरित किए जाएंगे। बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सीधे बैंक खाते में मिलने वाली यह राशि तत्काल आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है।
8.27 लाख परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
इस साल बिहार में गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर बढ़ने से बड़े इलाके में बाढ़ की स्थिति बनी। इसका असर 15 जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों तक पहुंचा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से करीब 49.36 लाख आबादी किसी न किसी रूप में प्रभावित हुई है। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय और बक्सर जैसे जिले शामिल हैं। इसके अलावा समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल भी प्रभावित जिलों में शामिल हैं। प्रभावित परिवारों को इस वर्ष पहली बार 7 हजार रुपये की नकद सहायता दी जा रही है। DBT के जरिए भुगतान होने से राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में पहुंचेगी।
किन जिलों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर?
बाढ़ का असर अलग-अलग जिलों में नदियों के जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रहा है। गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी नदियों का जलस्तर कई जगह अब भी चिंता का कारण बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर घट रहा है। हालांकि कई स्थानों पर नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कोसी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में और गंगा पटना के दीघा घाट, गांधीघाट और हाथीदह समेत कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर है। भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में भी गंगा की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वहीं श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती और दरौली में घाघरा नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
1260 सामुदायिक रसोई में मिल रहा खाना
बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए सरकार ने राहत व्यवस्था को भी जारी रखा है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार प्रभावित जिलों में 1260 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन सामुदायिक रसोई के जरिए अब तक करीब 1.19 करोड़ लोगों को सुबह और शाम भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इससे बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों को तत्काल भोजन की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा राज्य में 13 राहत शिविर भी बनाए गए हैं। इन शिविरों में रहने वाले बाढ़ पीड़ितों को भोजन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार के सामने फिलहाल राहत व्यवस्था को बनाए रखने के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में स्थिति सामान्य करने की चुनौती है।
बाढ़ से नुकसान का आकलन करेगी केंद्रीय टीम
बिहार में बाढ़ से हुई क्षति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम बुधवार को राज्य का दौरा करेगी। यह टीम बाढ़ से हुए नुकसान और मौजूदा स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को अभिलेख भवन में आयोजित हिन्दी दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय टीम के बिहार आने की जानकारी दी। यह टीम केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बिहार आएगी। टीम प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ से हुई क्षति और राहत कार्यों की स्थिति का आकलन करेगी। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से बिहार की बाढ़ स्थिति पर ध्यान दिए जाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री ने भी फोन पर बिहार की बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली है। उन्होंने बताया कि केंद्र की टीम बाढ़ से जुड़ी स्थिति और नुकसान का अध्ययन करने के लिए राज्य का दौरा कर रही है।
स्थायी समाधान पर सरकार का जोर
बाढ़ राहत के साथ सरकार अब लंबे समय के समाधान पर भी जोर देने की बात कह रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बाढ़ के कारण होने वाली जन-धन की क्षति को कम करना है। बिहार में नदियां कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सरकार के सामने बाढ़ नियंत्रण के साथ नदियों के संरक्षण का संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। मुख्यमंत्री ने नदियों को जोड़ने और उन्हें बचाने, दोनों की जरूरत पर जोर दिया। इसका उद्देश्य बाढ़ की समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान तलाशना बताया गया है। फिलहाल प्रभावित परिवारों की प्राथमिक जरूरत राहत और आर्थिक सहायता है। मंगलवार को 8.27 लाख से अधिक परिवारों के खातों में 7 हजार रुपये की राशि पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू होना इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।