बिहार में विकलांगता प्रमाण पत्र (Divyang Certificate): सिविल सर्जन ऑफिस में क्या-क्या डॉक्यूमेंट लगते हैं?

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एक दिव्यांग (Divyang) व्यक्ति के लिए सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों के चक्कर काटना कितना मुश्किल होता है, यह ग्राउंड लेवल पर हम सबने देखा है। चाहे रेलवे में छूट लेनी हो, बस का पास बनवाना हो, सरकारी नौकरी में आरक्षण का लाभ लेना हो या फिर बिहार सरकार की विकलांग पेंशन योजना का फायदा उठाना हो—इन सबके लिए सबसे जरुरी कागज है 'विकलांगता प्रमाण पत्र' (Disability Certificate)।

पहले के समय में यह सर्टिफिकेट सिर्फ एक पीले या सफेद रंग के कागज पर हाथ से लिखकर सदर अस्पताल से मिलता था। लेकिन अब पटना और सभी बिहार के डिस्ट्रिक्ट में सिस्टम बदल गया है। अब पूरे देश में UDID (Unique Disability ID) कार्ड चलता है। इसे बनवाने के लिए आपको ऑनलाइन अप्लाई करने के बाद अपने जिले के सिविल सर्जन (Civil Surgeon) ऑफिस या सदर अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना पड़ता है। अगर आपके पास सही डाक्यूमेंट्स नहीं हैं, तो बाबू लोग आपको कई बार अस्पताल के चक्कर लगवा सकते हैं। इस आर्टिकल में, मैं आपको बिल्कुल साफ और सीधी भाषा में बताऊंगा कि सिविल सर्जन ऑफिस जाने से पहले आपको अपनी फाइल में कौन-कौन से डाक्यूमेंट्स रखने हैं और पूरी प्रक्रिया क्या है, ताकि आपका काम एक ही बार में हो जाए।

सिविल सर्जन ऑफिस (मेडिकल बोर्ड) ही क्यों जाना पड़ता है?

कई लोगों को लगता है कि ऑनलाइन फॉर्म भर दिया, तो अब सर्टिफिकेट सीधे घर आ जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं है। विकलांगता कोई ऐसा सर्टिफिकेट नहीं है जो सिर्फ फॉर्म भरने से बन जाए। आपकी विकलांगता कितने प्रतिशत (Percentage) है, इसका फैसला केवल एक सरकारी डॉक्टरों की टीम ही कर सकती है।

हर जिले के सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के नेतृत्व में एक 'मेडिकल बोर्ड' (Medical Board) बैठता है। इस बोर्ड में हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic), नेत्र रोग विशेषज्ञ (Eye Specialist), ईएनटी (ENT), और मनोरोग विशेषज्ञ (Psychiatrist) शामिल होते हैं। यह बोर्ड आपकी जांच करता है और तय करता है कि विकलांगता 40%, 60% या 100% है। बिना बोर्ड की जांच और सिविल सर्जन के हस्ताक्षर के आपका सर्टिफिकेट पोर्टल से अप्रूव नहीं होता।

सिविल सर्जन ऑफिस में लगने वाले जरुरी डाक्यूमेंट्स की पूरी लिस्ट

अगर आप पटना में हैं या बिहार के किसी भी जिले में रहते हैं, तो मेडिकल बोर्ड के सामने जाने से पहले आपको एक पक्की फाइल तैयार करनी होगी। नीचे दिए गए डाक्यूमेंट्स के बिना बोर्ड आपका असेसमेंट (Assessment) नहीं करेगा।

  • UDID ऑनलाइन फॉर्म की रसीद (Acknowledgement Slip): सबसे पहले आपको swavlambancard.gov.in पर ऑनलाइन अप्लाई करना होता है। अप्लाई करने के बाद जो रसीद (Printout) निकलती है, वह सबसे ज्यादा जरुरी है। इसी में आपका एनरोलमेंट नंबर होता है।

  • आवेदन फॉर्म का प्रिंट (Application Form): ऑनलाइन भरा गया पूरा फॉर्म प्रिंट करके साथ रखें।

  • आधार कार्ड की ओरिजिनल और फोटोकॉपी: यह पहचान और पते का सबसे मुख्य प्रमाण है। फोटोकॉपी पर अपना हस्ताक्षर (Self-attested) जरूर करें। अगर आधार कार्ड नहीं है, तो वोटर आईडी या पैन कार्ड दे सकते हैं, लेकिन आधार सबसे बेस्ट है।

  • पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो: 4 से 5 हाल ही में खींची गई पासपोर्ट साइज फोटो। ध्यान रखें कि अगर विकलांगता शरीर के किसी बाहरी हिस्से में (जैसे हाथ या पैर में) स्पष्ट रूप से दिख रही है, तो फोटो ऐसी होनी चाहिए जिसमें वह हिस्सा साफ नजर आए।

  • पुरानी मेडिकल रिपोर्ट या पुर्जे (Medical History): अगर आपका पहले से किसी बड़े अस्पताल (जैसे PMCH, NMCH या AIIMS) में इलाज चल रहा है, तो इलाज की पुरानी पर्ची, एक्स-रे रिपोर्ट, MRI या कोई भी टेस्ट रिपोर्ट फाइल में जरूर लगाएं। इससे डॉक्टरों को आपकी स्थिति समझने में आसानी होती है।

  • पुराना विकलांगता प्रमाण पत्र (अगर रिन्यू करवाना हो): अगर आपके पास पहले से ऑफलाइन वाला सर्टिफिकेट है और आप उसे डिजिटल (UDID) में बदलवा रहे हैं, तो पुराने सर्टिफिकेट की ओरिजिनल और फोटोकॉपी दोनों साथ ले जाएं।

  • जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate): अगर आप SC/ST या OBC केटेगरी से आते हैं, तो जाति प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी लगाना फायदेमंद रहता है, खासकर तब जब आप भविष्य में किसी स्कॉलरशिप या योजना का लाभ लेना चाहते हैं।

  • ब्लड ग्रुप की रिपोर्ट: फॉर्म भरते समय ब्लड ग्रुप की जानकारी मांगी जाती है। अगर आपके पास कोई पैथोलॉजी रिपोर्ट है जिसमें ब्लड ग्रुप लिखा है, तो उसे साथ रख लें।

डाक्यूमेंट्स समरी टेबल (Quick Info):

डॉक्यूमेंट का नामक्यों चाहिए? (Purpose)ओरिजिनल या फोटोकॉपी?
ऑनलाइन आवेदन की रसीदएनरोलमेंट नंबर और फाइल ट्रैकिंग के लिएप्रिंटआउट
आधार कार्डपहचान और पता वेरीफाई करने के लिएदोनों (ओरिजिनल साथ रखें)
पासपोर्ट साइज फोटोफॉर्म और मेडिकल बोर्ड के रिकॉर्ड के लिए4-5 कॉपी
मेडिकल जांच की पुरानी रिपोर्टबीमारी/विकलांगता की स्थिति साबित करने के लिएदोनों
पुराना सर्टिफिकेट (अगर हो)ऑफलाइन से ऑनलाइन (UDID) अपडेट करने के लिएदोनों

पटना और बिहार के सभी जिलों में ऑनलाइन अप्लाई कैसे करें? (Step-by-Step Guide)

सिविल सर्जन ऑफिस जाने से पहले आपका ऑनलाइन फॉर्म भरा होना अनिवार्य है। आप अपने मोबाइल से या किसी नजदीकी वसुधा केंद्र (CSC Center) से इसे आसानी से भर सकते हैं। प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल swavlambancard.gov.in पर जाएं।

  2. रजिस्ट्रेशन शुरू करें: होमपेज पर 'Apply for Disability Certificate & UDID Card' वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।

  3. पर्सनल डिटेल्स भरें: अपना नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, ब्लड ग्रुप, और पूरा पता (आधार कार्ड के अनुसार) दर्ज करें।

  4. विकलांगता की जानकारी (Disability Details): आपको किस प्रकार की विकलांगता है (जैसे आँखों से कम दिखना, चलने में परेशानी, सुनने में दिक्कत आदि) उसे लिस्ट में से चुनें। यह भी बताएं कि यह जन्म से है या किसी एक्सीडेंट/बीमारी के कारण बाद में हुई है।

  5. डाक्यूमेंट्स अपलोड करें: अपनी फोटो, हस्ताक्षर (या अंगूठे का निशान), और आधार कार्ड को स्कैन करके अपलोड करें।

  6. फाइनल सबमिट: सभी डिटेल्स को एक बार चेक करें और फॉर्म सबमिट कर दें। सबमिट करते ही आपको एक 'Enrollment Number' मिल जाएगा। इस रसीद को डाउनलोड करके प्रिंट कर लें।

मेडिकल बोर्ड के सामने जाने का प्रोसेस (ग्राउंड लेवल की जानकारी)

ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद तुरंत अस्पताल न दौड़ें। बिहार के सदर अस्पतालों में विकलांगता की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के बैठने का एक निश्चित दिन होता है। ज्यादातर जिलों में मेडिकल बोर्ड हर हफ्ते बुधवार या गुरुवार को बैठता है। अपने जिले के सदर अस्पताल या सिविल सर्जन ऑफिस में जाकर पहले यह पता कर लें कि बोर्ड किस दिन बैठता है।

अस्पताल में आपको क्या करना होगा?

  1. काउंटर पर फाइल जमा करना: तय दिन पर सुबह-सुबह सदर अस्पताल पहुंचें। सिविल सर्जन ऑफिस के विकलांगता प्रमाण पत्र वाले काउंटर (UDID Counter) पर अपनी फाइल (ऑनलाइन रसीद और सभी डाक्यूमेंट्स) जमा करें।

  2. टोकन या सीरियल नंबर: फाइल जमा करने के बाद आपको एक टोकन नंबर या सीरियल नंबर दिया जाएगा।

  3. डॉक्टर के सामने पेशी: जब आपका नंबर आएगा, तो आपको संबंधित डॉक्टर के पास भेजा जाएगा। अगर आँखों की समस्या है, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ जांच करेंगे। अगर हड्डी की समस्या है, तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर जांच करेंगे।

  4. असेसमेंट (Percentage तय करना): डॉक्टर आपकी जांच करेंगे, पुरानी रिपोर्ट्स देखेंगे और तय करेंगे कि आपकी विकलांगता कितने प्रतिशत है। 40% या उससे ऊपर होने पर ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। डॉक्टर आपके फॉर्म पर प्रतिशत लिखकर अपने हस्ताक्षर और मुहर लगा देंगे।

  5. सिविल सर्जन का अप्रूवल: सभी डॉक्टरों की रिपोर्ट सिविल सर्जन के पास जाती है। उनके फाइनल अप्रूवल के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर आपका डेटा पोर्टल पर अपडेट (Update) कर देता है।

प्रमाण पत्र बनने में कितना समय लगता है और फीस कितनी है?

यहाँ एक बात बिल्कुल स्पष्ट समझ लें कि सरकारी नियम के अनुसार विकलांगता प्रमाण पत्र और UDID कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है। सिविल सर्जन ऑफिस या मेडिकल बोर्ड में इसके लिए एक भी रुपया फीस नहीं लगती है। अगर कोई कर्मचारी आपसे पैसे मांगता है, तो यह बिल्कुल गलत है।

समय की बात करें तो, मेडिकल बोर्ड द्वारा ऑनलाइन पोर्टल पर अप्रूवल देने के बाद आपका सर्टिफिकेट जनरेट होने में 15 से 30 दिन का समय लग सकता है। जब आपका ई-सर्टिफिकेट (e-Disability Certificate) पोर्टल पर बन जाता है, तो आप उसे अपने एनरोलमेंट नंबर से डाउनलोड कर सकते हैं। इसके कुछ महीनों बाद भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा प्लास्टिक का स्मार्ट UDID कार्ड आपके आधार कार्ड वाले पते पर डाक (Post) द्वारा भेज दिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. अगर मेरा पुराना विकलांगता प्रमाण पत्र खो गया है, तो नया कैसे बनवाएं?

अगर पुराना सर्टिफिकेट खो गया है, तो आपको सबसे पहले अपने नजदीकी थाने में एक एफआईआर (FIR) या सनहा दर्ज करानी होगी। उसके बाद ऑनलाइन UDID पोर्टल पर फ्रेश अप्लाई करें और पुलिस स्टेशन की रिसीविंग के साथ मेडिकल बोर्ड के सामने जाएँ।

2. विकलांगता कम से कम कितने प्रतिशत होनी चाहिए?

सरकारी नौकरियों में आरक्षण, रेलवे पास और बिहार सरकार की पेंशन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए विकलांगता कम से कम 40% होनी चाहिए। 40% से कम होने पर प्रमाण पत्र तो बन जाता है, लेकिन विशेष लाभ नहीं मिलते।

3. क्या प्राइवेट अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट से सर्टिफिकेट बन सकता है?

नहीं। प्राइवेट अस्पताल की रिपोर्ट सिर्फ डॉक्टरों को आपकी स्थिति समझने में मदद कर सकती है, लेकिन फाइनल सर्टिफिकेट केवल सरकारी सदर अस्पताल (सिविल सर्जन) के मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद ही मान्य होता है।

4. मेरा ऑनलाइन आवेदन रिजेक्ट (Reject) क्यों हो जाता है?

आवेदन रिजेक्ट होने के सबसे बड़े कारण हैं—आधार कार्ड और फॉर्म में नाम या पते की स्पेलिंग अलग होना, फोटो साफ़ न होना, या मेडिकल बोर्ड के बुलाने पर अस्पताल में उपस्थित न होना।

5. अगर मैं चलने-फिरने में बिल्कुल असमर्थ हूँ, तो अस्पताल कैसे जाऊं?

नियम के अनुसार, विकलांग व्यक्ति को मेडिकल बोर्ड के सामने एक बार उपस्थित होना अनिवार्य है ताकि डॉक्टर खुद स्थिति देख सकें। हालांकि, कुछ विशेष गंभीर मामलों (Bedridden patients) में, जिला प्रशासन या CMO के आदेश पर विशेष व्यवस्था की जा सकती है, जिसके लिए आपको पहले सिविल सर्जन ऑफिस में लिखित आवेदन देना होगा।

आपका अगला कदम क्या होना चाहिए?

दिव्यांगजनों के लिए यह प्रमाण पत्र सिर्फ एक कागज नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की चाबी है। पटना और बिहार के सभी डिस्ट्रिक्ट में अब UDID का सिस्टम पूरी तरह से लागू हो चुका है। अगर आपके या आपके परिवार में किसी भी सदस्य को इसकी आवश्यकता है, तो सबसे पहले swavlambancard.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करें। अपनी पुरानी सभी मेडिकल रिपोर्ट्स, आधार कार्ड और फोटो की एक मजबूत फाइल बनाएं और अपने जिले के सिविल सर्जन ऑफिस में जाकर मेडिकल बोर्ड से संपर्क करें।

याद रखें, सही जानकारी ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। अगर आपके कागजात पूरे हैं, तो आपको दफ्तरों के फालतू चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और आपका डिजिटल विकलांगता प्रमाण पत्र आसानी से बन जाएगा। इसे डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख लें और अपने हक़ की सभी योजनाओं का लाभ उठाएं।

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