बिहार में 21 दिन बाद मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं? लेट फाइन और प्रक्रिया
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंअपनों को खोने का दुख बहुत बड़ा होता है और उस समय किसी का भी ध्यान कागजी कार्रवाई पर नहीं जाता। लेकिन जब हमें बैंक अकाउंट ट्रांसफर, जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) या एलआईसी (LIC) क्लेम करना होता है, तब मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) की सबसे ज्यादा जरुरत पड़ती है। नियम के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के निधन के 21 दिन के अंदर यह प्रमाण पत्र बनवा लेना चाहिए। लेकिन अगर आप 21 दिन के अंदर इसे नहीं बनवा पाए हैं, तो घबराने की कोई बात नहीं है।
पटना और सभी बिहार के डिस्ट्रिक्ट में सरकार ने इसके लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया बनाई है। समय बीत जाने के बाद लेट फाइन (Late Fine) और कुछ अतिरिक्त डाक्यूमेंट्स की मदद से आप इसे आसानी से बनवा सकते हैं। इस आर्टिकल में मैं आपको ग्राउंड लेवल की सच्चाई के साथ बताऊंगा कि ब्लॉक से लेकर एसडीओ (SDO) ऑफिस तक आपको क्या-क्या करना होगा, ताकि आपका काम बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके।
मृत्यु प्रमाण पत्र 21 दिन के अंदर क्यों जरुरी है?
कानून के मुताबिक, जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन 21 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य है। अगर आप इस समय सीमा के भीतर अप्लाई करते हैं, तो यह प्रक्रिया पूरी तरह से मुफ्त होती है। आपको अपने पंचायत सचिव, नगर निगम या नगर पंचायत में सिर्फ एक फॉर्म और मृतक के आधार कार्ड की कॉपी देनी होती है। लेकिन 21 दिन पार होते ही यह मामला 'लेट रजिस्ट्रेशन' (Delay Registration) में चला जाता है और फिर आपको आरटीपीएस (RTPS) काउंटर के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
21 दिन बाद अप्लाई करने पर कितना लेट फाइन लगता है?
बिहार में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लेट फाइन की राशि बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन असली मेहनत अधिकारियों से परमिशन (अनुमति) लेने में लगती है। समय के हिसाब से लेट फाइन और परमिशन का नियम अलग-अलग होता है।
| समय सीमा (Time Limit) | लेट फाइन (Late Fee) | किसकी परमिशन जरुरी है? (Required Permission) |
| 21 दिन से 30 दिन तक | ₹2 (दो रुपये) | रजिस्ट्रार (पंचायत सचिव या नगर निगम अधिकारी) |
| 30 दिन से 1 साल तक | ₹5 (पांच रुपये) | बीडीओ (BDO) / प्रखंड विकास पदाधिकारी |
| 1 साल से ज्यादा समय | ₹10 (दस रुपये) | फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट (SDO/SDM) का आदेश |
नोट: यह सरकारी फीस है। हालांकि, कोर्ट से एफिडेविट (शपथ पत्र) बनवाने और अन्य कागजी कामों में आपका अतिरिक्त खर्च हो सकता है।
21 दिन बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जरुरी डाक्यूमेंट्स
अगर आप लेट हो चुके हैं, तो आपको अपने ब्लॉक या आरटीपीएस काउंटर पर जाने से पहले ये सभी डाक्यूमेंट्स तैयार रखने होंगे:
मृतक का आधार कार्ड: (अगर उपलब्ध हो)
आवेदक का पहचान पत्र: (अप्लाई करने वाले का आधार कार्ड या वोटर आईडी)
हॉस्पिटल का डेथ सर्टिफिकेट या रसीद: (अगर मृत्यु अस्पताल में हुई है)
श्मशान घाट / कब्रिस्तान की रसीद: (अंतिम संस्कार का प्रमाण)
मुखिया या वार्ड पार्षद का लेटर: (जिसमें मृत्यु की तारीख और कारण लिखा हो)
कोर्ट का एफिडेविट (शपथ पत्र): (यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें आपको बताना होगा कि 21 दिन के अंदर प्रमाण पत्र क्यों नहीं बनवाया गया)
चालान की रसीद: (लेट फाइन बैंक में जमा करने की रसीद)
मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)
समय अवधि के अनुसार प्रक्रिया बदल जाती है। नीचे मैंने हर स्थिति के लिए अलग-अलग स्टेप्स बताए हैं।
केस 1: अगर मृत्यु हुए 21 दिन से 30 दिन हुए हैं
यह सबसे आसान प्रक्रिया है।
फॉर्म भरें: अपने ग्राम पंचायत या नगर निगम ऑफिस से जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन का फॉर्म लें।
डाक्यूमेंट्स लगाएं: फॉर्म के साथ मृतक का आधार कार्ड और मुखिया/वार्ड पार्षद का लेटर लगाएं।
लेट फाइन जमा करें: रजिस्ट्रार को मात्र ₹2 का लेट फाइन जमा करें।
सर्टिफिकेट प्राप्त करें: कुछ ही दिनों में आपको आपका सर्टिफिकेट मिल जाएगा।
केस 2: अगर मृत्यु को 30 दिन से ज्यादा और 1 साल से कम हुआ है
अब आपको ब्लॉक के चक्कर लगाने होंगे।
एफिडेविट बनवाएं: सबसे पहले किसी वकील से मिलकर एक एफिडेविट (शपथ पत्र) बनवाएं जिसमें देरी का सही कारण लिखा हो।
परमिशन लें: यह एफिडेविट और सभी जरुरी डाक्यूमेंट्स लेकर अपने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के पास जाएं और उनसे लिखित अनुमति (Permission) लें।
चालान जमा करें: ₹5 का सरकारी चालान बैंक या ट्रेजरी में जमा करें।
RTPS काउंटर पर जाएं: BDO के आर्डर और चालान की कॉपी के साथ आरटीपीएस (RTPS) काउंटर पर जाकर फॉर्म जमा करें या ServiceOnline Bihar पोर्टल से ऑनलाइन अप्लाई करें।
सर्टिफिकेट जारी: वेरिफिकेशन के बाद आपका प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।
केस 3: अगर मृत्यु को 1 साल से ज्यादा समय हो गया है (मजिस्ट्रेट प्रोसेस)
यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती है। पटना और सभी बिहार के डिस्ट्रिक्ट में जब मामला 1 साल से पुराना हो जाता है, तो बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के सर्टिफिकेट नहीं बन सकता।
SDO/SDM कोर्ट में आवेदन: आपको अपने अनुमंडल (Sub-Division) के फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट (SDO/SDM) के पास वकील के माध्यम से एक आवेदन देना होगा।
एफिडेविट और सबूत: आपको एक मजबूत एफिडेविट देना होगा और साबित करना होगा कि मृत्यु उसी तारीख को हुई थी। इसके लिए वार्ड पार्षद का लेटर, वोटर लिस्ट से नाम कटने का प्रमाण या चौकीदार की रिपोर्ट लगेगी।
पुलिस या हल्का कर्मचारी का वेरिफिकेशन: मजिस्ट्रेट आपके आवेदन को वेरिफिकेशन के लिए आपके थाने या अंचल (CO) ऑफिस भेज सकते हैं। हल्का कर्मचारी या पुलिस जांच करेगी कि मृत्यु वास्तव में हुई है या नहीं।
मजिस्ट्रेट का आदेश (Order): जांच रिपोर्ट सही पाए जाने पर मजिस्ट्रेट रजिस्ट्रार को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश (Order) देंगे।
RTPS पर फाइनल सबमिशन: मजिस्ट्रेट का आदेश (Court Order) मिलने के बाद, ₹10 का चालान कटवाएं और सभी पेपर्स को आरटीपीएस काउंटर पर या ऑनलाइन पोर्टल पर सबमिट कर दें। इसके कुछ दिनों बाद आप ऑनलाइन अपना सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं।
बिहार में ऑनलाइन अप्लाई (RTPS) कैसे करें?
आजकल बिहार सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ी कई सेवाएं आरटीपीएस (RTPS) पोर्टल पर लाइव कर दी हैं। आप घर बैठे भी इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं:
सबसे पहले serviceonline.bihar.gov.in पर जाएं।
अपने मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी से एक अकाउंट बनाएं (Log in करें)।
'Apply for Services' पर क्लिक करें और 'View all available services' में जाएं।
सर्च बॉक्स में 'Death Certificate' टाइप करें।
अपने काम के अनुसार फॉर्म चुनें (जैसे कि Delay Registration of Death)।
फॉर्म में मृतक की सारी डिटेल्स भरें।
मांगे गए सभी डाक्यूमेंट्स (एफिडेविट, परमिशन लेटर आदि) की पीडीऍफ़ (PDF) फाइल अपलोड करें।
फाइनल सबमिट करें और रिसीविंग (Acknowledgement slip) को प्रिंट करके रख लें। इसी स्लिप में दिए गए एप्लीकेशन नंबर से आप बाद में सर्टिफिकेट डाउनलोड कर पाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या 21 दिन बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं?
हाँ, आप RTPS बिहार पोर्टल (serviceonline.bihar.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको पहले एफिडेविट और अधिकारी (BDO या SDO) का परमिशन लेटर ऑफलाइन ही बनवाना होगा।
2. 5 साल पुरानी मृत्यु का प्रमाण पत्र कैसे बनेगा?
अगर मृत्यु 1 साल से ज्यादा पुरानी है (चाहे वह 5 साल हो या 10 साल), तो आपको फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट (SDO/SDM) के कोर्ट से आदेश (Court Order) लेना होगा। बिना इसके सर्टिफिकेट नहीं बनेगा।
3. क्या बिना आधार कार्ड के मृत्यु प्रमाण पत्र बन सकता है?
अगर मृतक का आधार कार्ड नहीं बना था, तो आपको इसका कारण एफिडेविट में देना होगा और वोटर आईडी या राशन कार्ड जैसे अन्य पहचान पत्र लगाने होंगे।
4. मृत्यु प्रमाण पत्र बनने में कितने दिन का समय लगता है?
अगर आपके सारे डाक्यूमेंट्स और परमिशन लेटर सही हैं, तो आरटीपीएस काउंटर या ऑनलाइन अप्लाई करने के 15 से 21 कार्य दिवस (Working days) के अंदर प्रमाण पत्र बन जाता है।
5. एफिडेविट (शपथ पत्र) बनवाने में कितना खर्च आता है?
सरकारी फीस के अलावा, कोर्ट से नोटरी या मजिस्ट्रेट एफिडेविट बनवाने में वकील की फीस और स्टाम्प पेपर का खर्च मिलाकर 200 से 500 रुपये तक का खर्च आ सकता है।
अंतिम विचार
चाहे मामला इंश्योरेंस क्लेम का हो या पारिवारिक जमीन के बंटवारे का, मृत्यु प्रमाण पत्र एक बहुत ही जरुरी दस्तावेज है। अगर 21 दिन का समय पार हो चुका है, तो थोड़ी भागदौड़ जरूर है, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। पटना और सभी बिहार के डिस्ट्रिक्ट में अब आरटीपीएस (RTPS) की मदद से यह काम पहले से काफी व्यवस्थित हो गया है। सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप बिना किसी बिचौलिए के सीधे अपने ब्लॉक या अनुमंडल कार्यालय में जाएं, सही जानकारी लें और अपना काम करवाएं। समय पर एफिडेविट और मजिस्ट्रेट का आदेश बनवा लेने से आपका काम बहुत आसान हो जाएगा।
