दाखिल-खारिज में कर्मचारी की रिपोर्ट पेंडिंग? ऐसे करें शिकायत
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दाखिल-खारिज (Mutation) में हल्का कर्मचारी की रिपोर्ट पेंडिंग होने पर ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें?
जमीन खरीदने के बाद सबसे बड़ा सिरदर्द अगर कुछ है, तो वह है दाखिल-खारिज (Mutation) करवाना। आपने सारी प्रक्रिया पूरी कर ली, सारे पेपर्स ऑनलाइन अपलोड कर दिए, लेकिन जब आप अपना स्टेटस चेक करते हैं तो महीनों से एक ही लाइन स्क्रीन पर दिखती है— "Pending at Halka Karamchari"। अंचल कार्यालय (Block Office) के चक्कर लगाते-लगाते चप्पलें घिस जाती हैं, लेकिन बाबू साहब या तो सीट पर मिलते नहीं या फिर "कल आना" कह कर टाल देते हैं।
चाहे आप पटना में बैठे हों या बिहार के किसी भी अन्य जिले में, यह समस्या लगभग हर अंचल की कहानी बन चुकी है। लेकिन आपको यह जानकर राहत मिलेगी कि अब आपको किसी कर्मचारी के आगे हाथ जोड़ने की या अंचल कार्यालय में दलालों के चक्कर में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है। बिहार सरकार ने अब सिस्टम को काफी हद तक डिजिटल कर दिया है। अगर आपका दाखिल-खारिज बिना किसी ठोस कारण के हल्का कर्मचारी के पास पेंडिंग है, तो आप घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से इसकी सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
आज मैं आपको एक दम सीधी भाषा में बताऊंगा कि यह शिकायत कैसे करनी है, कहाँ करनी है और इस पूरी प्रक्रिया में आपको किन बातों का ध्यान रखना है ताकि आपका काम तेजी से हो सके।
हल्का कर्मचारी के पास फाइल पेंडिंग क्यों रहती है?
शिकायत करने से पहले हमें यह समझना होगा कि आखिर हमारी फाइल एक ही जगह पर अटकती क्यों है। ग्राउंड लेवल पर काम करने के दौरान जो मुख्य कारण सामने आते हैं, वो इस प्रकार हैं:
कागजातों में गड़बड़ी या कमी: कई बार आपके द्वारा अपलोड किए गए जमीन के कागजात (केवाला, खतियान या वंशावली) स्पष्ट नहीं होते। कर्मचारी को कुछ शंका होती है, लेकिन वो आपको बताते नहीं हैं और फाइल पेंडिंग छोड़ देते हैं।
वर्कलोड और मैनपावर की कमी: बिहार के कई अंचलों में एक हल्का कर्मचारी के पास कई-कई पंचायतों का प्रभार होता है। प्रतिदिन सैकड़ों आवेदन आते हैं, जिससे बैकलॉग बढ़ता जाता है।
सुविधा शुल्क (Bribe) की उम्मीद: यह एक कड़वी सच्चाई है जिसे नकारा नहीं जा सकता। कई जगहों पर बिना चढ़ावे के फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाती। कर्मचारी जानबूझकर रिपोर्ट पेंडिंग रखते हैं ताकि आवेदक खुद चलकर उनके पास आए।
तकनीकी खराबी (Server Issues): कभी-कभी सर्वर या पोर्टल में गड़बड़ी के कारण भी कर्मचारी रिपोर्ट को CI (Circle Inspector) या CO (Circle Officer) को फॉरवर्ड नहीं कर पाते।
कारण चाहे जो भी हो, अगर 35-40 दिन बीत चुके हैं और आपकी फाइल वहीं अटकी है, तो अब आपको एक्शन लेना ही पड़ेगा।
ऑनलाइन शिकायत कहाँ करें? (सबसे असरदार तरीका)
बिहार में सरकारी काम में हो रही देरी की शिकायत करने का सबसे बड़ा और असरदार हथियार है— बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम (Bihar Lok Shikayat Nivaran Adhikar Adhiniyam)।
कई लोग सीधे CO को ईमेल करते हैं या पोर्टल पर फीडबैक देते हैं, जिसका कोई खास असर नहीं होता। लेकिन जब आप 'लोक शिकायत निवारण' (PGRO) पोर्टल पर परिवाद (Complaint) दर्ज करते हैं, तो यह एक कानूनी प्रक्रिया बन जाती है। इसमें अंचल अधिकारी और कर्मचारी को एक तय समय सीमा के भीतर जवाब देना ही पड़ता है कि आखिर उन्होंने फाइल क्यों रोक रखी है।
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: हल्का कर्मचारी के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें
आइए जानते हैं कि बिना एक रुपया खर्च किए, आप अपने मोबाइल या लैपटॉप से शिकायत कैसे दर्ज कर सकते हैं।
स्टेप 1: लोक शिकायत पोर्टल पर जाएं
सबसे पहले अपने ब्राउज़र (Google Chrome) में बिहार लोक शिकायत निवारण का आधिकारिक पोर्टल खोलें। इसके लिए lokshikayat.nic.in टाइप करें।
स्टेप 2: 'नया परिवाद दर्ज करें' पर क्लिक करें
होमपेज खुलने के बाद आपको बाईं तरफ (Left Side) "नया परिवाद दर्ज करें" (File a New Complaint) का एक बड़ा सा बटन दिखेगा। उस पर क्लिक करें।
स्टेप 3: मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन (OTP)
अगले पेज पर आपको अपना चालू मोबाइल नंबर डालना होगा और कैप्चा (Captcha) कोड भरना होगा। 'Generate OTP' पर क्लिक करें। आपके फोन पर एक ओटीपी आएगा, उसे भरकर 'Submit' करें। अब शिकायत फॉर्म खुल जाएगा।
स्टेप 4: परिवादी (शिकायतकर्ता) का विवरण भरें
यहाँ आपको अपनी बेसिक जानकारी भरनी है:
अपना पूरा नाम
पिता/पति का नाम
पूरा पता (गाँव, पंचायत, ब्लॉक, जिला)
ईमेल आईडी (अगर है तो जरूर डालें, इस पर अपडेट आते हैं)
स्टेप 5: परिवाद का विवरण (शिकायत की मुख्य जानकारी)
यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे बहुत ध्यान से भरें:
विभाग का नाम: ड्रॉपडाउन लिस्ट में से 'राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग' (Revenue and Land Reforms Department) चुनें।
विषय: यहाँ आपको "दाखिल-खारिज में अनावश्यक देरी" या "हल्का कर्मचारी द्वारा रिपोर्ट नहीं भेजना" से जुड़ा विकल्प चुनना है।
शिकायत का संक्षिप्त विवरण: यहाँ आपको अपनी बात साफ और सीधी भाषा में लिखनी है। उदाहरण के लिए:
"महोदय, मैंने दिनांक [तारीख डालें] को दाखिल-खारिज के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। मेरा वाद संख्या (Case/Mutation Number) [नंबर डालें] है। आज 45 दिन बीत जाने के बाद भी मेरा आवेदन हल्का कर्मचारी के स्तर पर पेंडिंग (Pending) दिखा रहा है। मेरे सारे कागजात सही हैं। अंचल कार्यालय जाने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। कृपया मेरी फाइल को आगे बढ़ाने की कृपा करें।"
स्टेप 6: सबूत अपलोड करें (Document Upload)
यहाँ आपको दो मुख्य चीजें अपलोड करनी हैं (PDF या JPG फॉर्मेट में):
दाखिल-खारिज की रिसिप्ट: जो रसीद आपको ऑनलाइन अप्लाई करते वक्त मिली थी।
करंट स्टेटस का स्क्रीनशॉट: बिहार भूमि पोर्टल से स्टेटस चेक करें जहाँ "Pending at Halka Karamchari" लिखा आ रहा है, उसका प्रिंटआउट या स्क्रीनशॉट लेकर अपलोड करें।
स्टेप 7: फॉर्म सबमिट करें और ट्रैकिंग आईडी लें
सारी जानकारी चेक करने के बाद Submit बटन पर क्लिक करें। सबमिट होते ही आपकी स्क्रीन पर एक अनुश्रवण संख्या (Tracking Number) आ जाएगी और आपके मोबाइल पर कन्फर्मेशन मैसेज भी आ जाएगा। इस नंबर को डायरी में लिखकर सुरक्षित रख लें।
शिकायत दर्ज होने के बाद क्या होता है?
जैसे ही आपकी शिकायत दर्ज होती है, सिस्टम द्वारा एक तारीख (Hearing Date) तय कर दी जाती है। यह शिकायत सीधे आपके अनुमंडल (Sub-Division) के लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी (PGRO) के पास जाती है।
PGRO तुरंत आपके अंचल अधिकारी (CO) को नोटिस भेजते हैं और पूछते हैं कि फलां केस पेंडिंग क्यों है। इसके बाद CO की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह हल्का कर्मचारी से रिपोर्ट मांगे। ज्यादातर मामलों में, नोटिस मिलते ही कर्मचारी तुरंत फाइल को CI के पास फॉरवर्ड कर देते हैं ताकि उन्हें PGRO के सामने पेश होकर जवाब न देना पड़े।
टेबल: दाखिल-खारिज शिकायत से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ
| विवरण (Details) | जानकारी (Information) |
| शिकायत के लिए वेबसाइट | lokshikayat.nic.in |
| जरूरी दस्तावेज | म्यूटेशन आवेदन की रसीद, वर्तमान ऑनलाइन स्टेटस |
| किस विभाग को चुनें | राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग |
| शिकायत की फीस (Charge) | 0 रुपये (बिल्कुल मुफ्त) |
| पहली सुनवाई का समय | लगभग 15 से 20 दिनों के भीतर |
| शिकायत का माध्यम | ऑनलाइन, टोल-फ्री नंबर (1800 345 6284) या अनुमंडल कार्यालय जाकर |
क्या कर्मचारी खुन्नस में आकर मेरा आवेदन Reject कर सकता है?
यह डर बहुत से लोगों के मन में होता है। कई लोग सोचते हैं कि अगर हमने शिकायत कर दी, तो कर्मचारी गुस्सा होकर फाइल को रिजेक्ट (Reject) कर देगा।
सच्चाई यह है कि कर्मचारी बिना किसी ठोस और कानूनी कारण के आपकी फाइल को रिजेक्ट नहीं कर सकता। अगर वह रिजेक्ट करता है, तो उसे पोर्टल पर स्पष्ट कारण (Reason) लिखना होता है। अगर वह गलत कारण देकर फाइल रिजेक्ट करता है, तो आप उसी लोक शिकायत निवारण अधिकारी के सामने अपील कर सकते हैं कि आपका आवेदन दुर्भावना से रिजेक्ट किया गया है। ऐसे मामलों में कर्मचारी पर भारी जुर्माना लग सकता है और विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए डरे नहीं, अपने हक के लिए सिस्टम का इस्तेमाल करें।
कुछ अन्य उपाय जिन्हें आप आजमा सकते हैं:
जनता दरबार का सहारा: अगर आप लोक शिकायत के अलावा दूसरा रास्ता अपनाना चाहते हैं, तो आप अपने जिले के जिलाधिकारी (DM) द्वारा लगाए जाने वाले 'जनता दरबार' में जा सकते हैं। वहां आप सीधे DM साहब को अपना म्यूटेशन नंबर और स्टेटस दिखाकर गुहार लगा सकते हैं। पटना और सभी बिहार के जिलों में हर हफ्ते जनता दरबार लगता है।
परिमार्जन (Parimarjan) पोर्टल: अगर आपके दाखिल-खारिज में नाम, खाता या खसरा नंबर की गलती के कारण फाइल अटकी है, तो आप बिहार भूमि के परिमार्जन पोर्टल पर जाकर पहले सुधार (Correction) के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
FAQs: आपके मन में उठने वाले कुछ आम सवाल (Frequently Asked Questions)
1. दाखिल-खारिज का आवेदन किए कितने दिन बाद शिकायत करनी चाहिए?
नियमों के अनुसार दाखिल-खारिज की प्रक्रिया 35 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए। अगर आपका आवेदन 30-35 दिन से ज्यादा समय से सिर्फ हल्का कर्मचारी के पास अटका है, तो आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
2. क्या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए मुझे कोई पैसा देना होगा?
बिल्कुल नहीं। लोक शिकायत पोर्टल पर परिवाद दर्ज करना पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है। अगर कोई साइबर कैफे वाला फॉर्म भरने के लिए मामूली चार्ज (30-50 रुपये) लेता है तो वो अलग बात है, लेकिन सरकारी फीस जीरो है।
3. अगर मैं ऑनलाइन शिकायत नहीं कर पाऊं तो क्या करूं?
अगर आप इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते, तो आप अपने अनुमंडल कार्यालय (Sub-Divisional Office) में बने 'लोक शिकायत निवारण केंद्र' में जाकर सादे कागज पर आवेदन देकर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
4. लोक शिकायत में मेरी शिकायत पर कितने दिनों में फैसला आ जाता है?
अधिनियम के तहत, शिकायत का निवारण अधिकतम 60 कार्य दिवसों के भीतर किया जाना अनिवार्य है। लेकिन दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में नोटिस जाते ही 10-15 दिनों में काम आगे बढ़ जाता है।
5. अगर PGRO के फैसले से भी काम नहीं हुआ तो क्या विकल्प है?
अगर अनुमंडलीय लोक शिकायत अधिकारी के स्तर से भी आपको न्याय नहीं मिलता, तो आप उसी पोर्टल पर 'प्रथम अपील' (First Appeal) कर सकते हैं, जो सीधे जिला पदाधिकारी (DM) या अपर समाहर्ता स्तर के अधिकारी के पास जाती है।
आखिरी बात
अंचल कार्यालयों में होने वाली परेशानी कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब समय बदल रहा है। बिहार के हर जिले में, चाहे वह पटना हो, मुजफ्फरपुर हो, या समस्तीपुर, डिजिटल प्रणाली मजबूत हो रही है। अपनी जमीन के कागजात को लेकर जागरूक रहें। अगर आपका काम बेवजह लटकाया जा रहा है, तो दलालों को पैसे देने के बजाय सरकार द्वारा बनाए गए ऑनलाइन कंप्लेंट सिस्टम का फायदा उठाएं। जब आप कानूनी तरीके से शिकायत करते हैं, तो अधिकारियों को जवाबदेही लेनी ही पड़ती है। जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। अपने केस का स्टेटस ऑनलाइन ट्रैक करते रहें और सही समय पर सही जगह शिकायत करें।
