बिहार में ऑनलाइन जमीन का नक्शा कैसे मंगाएं? (डोरस्टेप डिलीवरी)

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बिहार में जमीन का एक बीता भी नापना हो या खेत की मेड़ का कोई पुराना विवाद सुलझाना हो, बिना 'सरकारी नक्शे' के कोई अमीन भी आपकी मदद नहीं कर सकता। पहले के समय में अपने मौजे (गांव) का असली नक्शा निकलवाना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता था। पटना के गुलजारबाग स्थित सर्वे कार्यालय में सुबह से लाइन लगानी पड़ती थी और दलालों के चक्कर काटने पड़ते थे। अगर आप किसी दूसरे जिले से आ रहे हैं, तो पूरा दिन और पैसा दोनों बर्बाद होता था।

लेकिन अब आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक बेहद शानदार सिस्टम तैयार किया है। अब आप पटना और सभी बिहार के डिस्ट्रिक्ट का जमीन का नक्शा सीधा अपने मोबाइल या कंप्यूटर से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं और इंडिया पोस्ट (Speed Post) के जरिए यह नक्शा कुछ ही दिनों में सुरक्षित आपके घर के दरवाजे पर पहुंच जाएगा।

इस लेख में, हम आपको एक-एक बारीकी समझाएंगे कि बिहार सरकार के 'डोरस्टेप डिलीवरी पोर्टल' का इस्तेमाल कैसे करना है, इसमें कितना खर्च आता है, और ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आपको किन बातों का खास ख्याल रखना है ताकि आपका पैसा न फंसे।

जमीन के नक्शे (Bhu-Naksha) की जरूरत कब और क्यों पड़ती है?

इससे पहले कि हम ऑनलाइन नक्शा मंगाने का तरीका जानें, यह समझना जरूरी है कि असली सरकारी नक्शा आपके पास क्यों होना चाहिए।

  • जमीन की मापी (Measurement): जब भी आप अमीन को अपनी जमीन नापने के लिए बुलाते हैं, तो वह सबसे पहले उस इलाके का प्रमाणित नक्शा मांगता है। इंटरनेट पर दिखने वाला डिजिटल नक्शा कोर्ट या मापी में मान्य नहीं होता।

  • पारिवारिक बंटवारा: भाइयों या पाटीदारों के बीच जमीन का बंटवारा करते समय अगर सही नक्शा न हो, तो रास्ता और चौहद्दी तय करने में हमेशा विवाद होता है।

  • जमीन की खरीद-बिक्री: नया प्लॉट या खेत खरीदते समय आपको नक्शे से यह मिलाना होता है कि जो चौहद्दी (Boundary) कागज पर लिखी है, असल में जमीन वहीं पर है या नहीं।

  • सरकारी योजनाओं का लाभ: कई बार कृषि लोन या सरकारी मुआवजे के लिए बैंक और अधिकारी जमीन के नक्शे की मांग करते हैं।

बिहार में नक्शे कितने प्रकार के होते हैं?

ऑनलाइन पोर्टल पर जाने पर आपसे पूछा जाएगा कि आपको कौन सा नक्शा चाहिए। बिहार में मुख्य रूप से तीन तरह के सर्वे के नक्शे मौजूद हैं:

  1. CS Map (Cadastral Survey - कैडस्ट्रल सर्वे): यह अंग्रेजों के जमाने (1890 से 1920 के बीच) का सबसे पुराना सर्वे है। अगर आपके यहां नया सर्वे पूरा नहीं हुआ है, तो यही नक्शा सबसे ज्यादा मान्य होता है। इसे खतियानी नक्शा भी कहते हैं।

  2. RS Map (Revisional Survey - रिविजनल सर्वे): आजादी के बाद कई जिलों में दोबारा सर्वे कराया गया ताकि जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट किया जा सके। इसे रिविजनल सर्वे कहते हैं। अगर आपके गांव का RS सर्वे फाइनल हो चुका है, तो आप यह नक्शा मंगा सकते हैं।

  3. Chakbandi Map (चकबंदी नक्शा): चकबंदी के दौरान छोटे-छोटे खेतों को मिलाकर एक बड़ा चक बनाया गया था। जहां चकबंदी लागू है, वहां चकबंदी नक्शे का इस्तेमाल होता है।

ऑनलाइन नक्शा मंगाने के लिए जरूरी डिटेल्स

फॉर्म भरने से पहले अपने पास कुछ जरूरी जानकारियां लिखकर रख लें:

  • जिले का नाम: वह जिला जहां जमीन स्थित है।

  • थाना नंबर (Thana Code): हर राजस्व गांव (मौजा) का एक कोड होता है जिसे थाना नंबर कहते हैं। यह आपके पुराने केवाला, खतियान या लगान रसीद पर लिखा मिल जाएगा।

  • मौजे का नाम (Mauza Name): आपके गांव या उस इलाके का सरकारी नाम जहां आपका खेत या प्लॉट है।

  • शीट नंबर (Sheet Number): अगर गांव बड़ा है, तो उसका नक्शा एक पन्ने पर नहीं आता। उसे कई शीट (Sheet 1, Sheet 2...) में बांटा जाता है। आपको पता होना चाहिए कि आपकी जमीन किस शीट में आती है।

पोर्टल के जरिए ऑनलाइन नक्शा ऑर्डर करने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

अब अपना मोबाइल या लैपटॉप खोलें और नीचे दिए गए स्टेप्स को बिल्कुल वैसे ही फॉलो करें जैसे बताया गया है।

स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं

सबसे पहले अपने ब्राउज़र में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की वेबसाइट dlrs.bihar.gov.in या dirslr.bihar.gov.in टाइप करें। होमपेज पर आपको 'Door Step Delivery' (डोर स्टेप डिलीवरी) का एक बड़ा सा बटन दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें।

स्टेप 2: एरिया और नक्शे का प्रकार चुनें

एक नया पेज (smb.bihar.gov.in) खुलेगा। यहां आपको सबसे पहले यह चुनना है कि आपका इलाका Rural (ग्रामीण) है या Urban (शहरी)। इसके ठीक नीचे आपको नक्शे का प्रकार (CS, RS, या Chakbandi) चुनना होगा।

स्टेप 3: अपनी लोकेशन दर्ज करें

अब ड्रॉपडाउन मेनू से अपना District (जिला) चुनें। फिर अपना Thana / Block (थाना) चुनें और अंत में अपने Mauza (मौजा) का चयन करें। जैसे ही आप मौजा चुनेंगे, सिस्टम आपको दिखा देगा कि उस गांव के कितने शीट उपलब्ध हैं।

स्टेप 4: शीट नंबर चुनें और कार्ट में डालें

अगर आपके गांव का नक्शा 3 शीट में है, तो आपको वह शीट चुनना होगा जिसमें आपका खेत है। अगर आपको जानकारी नहीं है, तो आप एक-एक करके सभी शीट देख सकते हैं। सही शीट बॉक्स पर टिक करें और 'Add to Cart' (कार्ट में जोड़ें) बटन पर क्लिक करें।

स्टेप 5: अपना एड्रेस (Shipping Details) भरें

अब कार्ट में जाने के बाद 'Checkout' पर क्लिक करें। यहां आपको एक फॉर्म भरना होगा जिसमें आपका नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, और पूरा पता (जिस पते पर आप नक्शा मंगाना चाहते हैं) डालना होगा। पिन कोड (PIN Code) बिल्कुल सही डालें, क्योंकि इसी आधार पर डाकिया आपके घर पहुंचेगा।

स्टेप 6: पेमेंट पूरा करें (Payment Process)

सबमिट करने के बाद आपको पेमेंट गेटवे पर भेज दिया जाएगा।

  • एक शीट (नक्शे) की सरकारी कीमत 150 रुपये है।

  • नक्शे को सुरक्षित भेजने के लिए एक प्लास्टिक कंटेनर (Tube) का इस्तेमाल होता है, जिसका चार्ज 35 रुपये है।

  • इसके अलावा इंडिया पोस्ट का स्पीड पोस्ट चार्ज (वजन के हिसाब से) जुड़ता है।

    आप UPI, डेबिट कार्ड, या नेट बैंकिंग के जरिए यह पेमेंट कर सकते हैं। पेमेंट सफल होने के बाद स्क्रीन पर एक एक्नॉलेजमेंट स्लिप (रसीद) आ जाएगी। इसे सेव या प्रिंट कर लें।

नक्शा डिलीवरी शुल्क और समय सीमा (Quick-Info Summary Table)

ऑनलाइन मंगाए जाने वाले नक्शे का खर्च और डिलीवरी का अनुमानित समय नीचे दी गई टेबल में आसानी से समझें:

विवरण (Description)लागू शुल्क (Charges)
नक्शे की कीमत (प्रति शीट)150 रुपये (हर अतिरिक्त शीट पर 150 रुपये जुड़ेंगे)
पैकेजिंग / कंटेनर चार्ज35 रुपये (एक ट्यूब में अधिकतम 5 शीट आ सकते हैं)
पोस्टल चार्ज (बिहार के अंदर)लगभग 50 से 100 रुपये (शीट के वजन के आधार पर)
डिलीवरी का समयपेमेंट के बाद 7 से 15 कार्य दिवस (Working Days)
नक्शे की क्वालिटीहाई-क्वालिटी वाटरप्रूफ और फटने से सुरक्षित कागज (प्लास्टिक कोटेड)

अगर पेमेंट कट जाए और रसीद न मिले तो क्या करें?

बिहार के पोर्टल पर अक्सर पेमेंट के समय सर्वर डाउन हो जाता है। अगर आपके खाते से पैसा कट गया है और रसीद नहीं मिली है, तो घबराएं नहीं।

  • दोबारा तुरंत पेमेंट न करें।

  • 24 से 48 घंटे का इंतजार करें।

  • वेबसाइट पर 'Track Status' या 'Payment Verification' का विकल्प होता है। वहां अपना मोबाइल नंबर या ट्रांजैक्शन आईडी डालकर स्टेटस चेक करें।

  • अगर पैसा पोर्टल पर अपडेट नहीं होता है, तो वह अपने आप आपके बैंक खाते में 5-7 दिनों के भीतर रिफंड हो जाएगा।

नक्शा डिस्पैच होने के बाद उसे ट्रैक कैसे करें?

राजस्व विभाग जैसे ही आपका नक्शा प्रिंट करके इंडिया पोस्ट को सौंपता है, आपके द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर एक SMS आता है। इस SMS में एक 'Consignment Number' (कंसाइनमेंट नंबर) होता है।

आप भारतीय डाक (India Post) की वेबसाइट पर जाकर 'Track Consignment' वाले सेक्शन में यह नंबर डालकर बिल्कुल सटीक जानकारी ले सकते हैं कि आपका नक्शा अभी किस शहर के डाकघर में पहुंचा है और आपके घर कब तक डिलीवर होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या मैं एक साथ कई गांवों या अलग-अलग जिलों के नक्शे ऑर्डर कर सकता हूं?

हां, आप एक ही कार्ट में अलग-अलग मौजे और अलग-अलग शीट के नक्शे जोड़ सकते हैं। बस आपको हर शीट के लिए 150 रुपये का भुगतान करना होगा। एक कंटेनर (ट्यूब) में अधिकतम 5 शीट ही पैक किए जा सकते हैं, उससे ज्यादा होने पर पैकिंग चार्ज अलग से लगेगा।

Q2. अगर मुझे नहीं पता कि मेरी जमीन किस 'शीट नंबर' में है, तो क्या करूं?

अगर आपका मौजा बड़ा है और उसमें कई शीट हैं, तो आप पोर्टल पर मौजूद डिजिटल 'व्यू' ऑप्शन से हल्का सा अंदाजा लगा सकते हैं, या फिर अपने हल्का कर्मचारी / अमीन से पूछ सकते हैं कि आपका खाता-खेसरा किस शीट में आता है।

Q3. क्या मैं यह नक्शा बिहार के बाहर (जैसे दिल्ली, मुंबई) मंगा सकता हूं?

हां, डोरस्टेप डिलीवरी सर्विस पूरे भारत के लिए उपलब्ध है। आप शिपिंग एड्रेस में देश का कोई भी पिन कोड डाल सकते हैं। बस बिहार के बाहर के पते पर स्पीड पोस्ट का पोस्टल चार्ज थोड़ा ज्यादा (वजन और दूरी के हिसाब से) लगता है।

Q4. क्या यह ऑनलाइन मंगाया गया नक्शा कोर्ट में या मापी में कानूनी रूप से मान्य है?

बिल्कुल। यह डिजिटल प्रिंटेड नक्शा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (DLRS) द्वारा प्रमाणित होता है। यह हुबहू गुलजारबाग प्रेस से मिलने वाले नक्शे के समान है और हर कानूनी प्रक्रिया, सरकारी काम या अमीन द्वारा मापी में 100% मान्य है।

Q5. अगर मुझे गलत नक्शा मिल जाए या कंटेनर टूटा हुआ हो, तो क्या शिकायत कर सकते हैं?

अगर डाक से डिलीवरी के समय ट्यूब पूरी तरह डैमेज हो, तो आप उसे लेने से मना (Reject) कर सकते हैं। गलत नक्शा आने की स्थिति में आप DLRS पोर्टल के शिकायत या संपर्क अनुभाग (Contact Us) में अपने ऑर्डर आईडी के साथ ईमेल भेजकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

अपनी जमीन, अपनी पहचान

जमीन के कागजात और नक्शा दुरुस्त रखना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। अब वह दौर चला गया जब हर छोटे काम के लिए सरकारी दफ्तरों के बाबुओं की चिरौरी करनी पड़ती थी। बिहार सरकार की इस डिजिटल पहल से पटना से लेकर राज्य के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति का काम आसान हो गया है। आज ही पोर्टल खोलें, अपने गांव और खेत का प्रमाणित नक्शा ऑर्डर करें, और अपनी जमीन के हकों को सुरक्षित करें। ऑनलाइन ऑर्डर करते समय बस अपना पता और पिनकोड दो बार चेक करना न भूलें ताकि डाकिया बिना किसी परेशानी के आपके घर तक पहुंच सके।

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