बिहार में 5 साल में लगेंगे 10 हजार उद्योग, महिलाओं के लिए भी बड़ा लक्ष्य
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में 10 हजार उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अगले पांच वर्षों में 10 हजार उद्योग बिहार में लगाए जाएंगे और इसके जरिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर जोर रहेगा। उन्होंने यह बात शनिवार को पटना के तारामंडल में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान कही। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पांच साल में 10 हजार उद्योग लगाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री के मुताबिक बिहार में औद्योगिक गतिविधियों के लिए माहौल तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि करीब एक हजार उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। अब अगले पांच वर्षों में 10 हजार उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का जोर उद्योगों के साथ-साथ उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा, तकनीकी क्षमता और कारोबारी सोच को जोड़कर राज्य के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाना और राज्य से बाहर जाकर काम करने वाले लोगों की संख्या कम करना बताया गया है।
12 लाख लोगों के पलायन का किया जिक्र
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के करीब 12 लाख लोग मजदूरी के लिए राज्य से बाहर जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां लोगों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
इसके लिए सरकार उद्योगों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की बात कह रही है। मुख्यमंत्री ने युवा उद्यमियों और स्टार्टअप को बिहार की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया।
उन्होंने कहा कि नए स्टार्टअप और स्थानीय स्तर पर शुरू होने वाले कारोबार राज्य के विकास की दिशा बदलने में मदद कर सकते हैं। सरकार की ओर से ऐसे प्रयासों को सहयोग देने की बात भी कही गई।
एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य
कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण को भी विकास की रणनीति का अहम हिस्सा बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
यह लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने की व्यापक योजना से जुड़ा है। इससे पहले राज्य सरकार की ओर से जीविका के जरिए बड़ी संख्या में महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की जानकारी दी गई है। जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार बिहार में 1 करोड़ 81 लाख से अधिक महिलाएं जीविका के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी थीं और 30 लाख से अधिक लखपति दीदी तैयार हो चुकी थीं।
महिला रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर सरकार ने हाल के महीनों में कई घोषणाएं भी की हैं। अगस्त 2026 में सरकार ने एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बनाने का लक्ष्य भी बताया था।
आईटी और इनोवेशन पर भी फोकस
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज कार्यक्रम की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने नेशनल इनोवेशन चैलेंज पोर्टल का लोकार्पण भी किया।
सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य युवाओं में नवाचार और तकनीकी सोच को बढ़ावा देना है। बिहार टेक पोर्टल फॉर इनोवेशन इन आईटी सेक्टर के जरिए आईटी क्षेत्र में नए प्रयोगों और विचारों को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।
सम्राट चौधरी ने विकास के लिए सेवा, नवाचार, तकनीक और उद्यमिता को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि बिहार की बड़ी युवा आबादी को विकास की ताकत के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार की विकास यात्रा में युवाओं और उद्यमियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
कार्यक्रम के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी कार रैली के तहत 25 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, मंत्री नंद किशोर राम, सांसद डॉ. संजय जायसवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज की प्रदेश संयोजक डॉ. अमृता भूषण राठौर समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
बिहार के लिए इन घोषणाओं का क्या मतलब?
सरकार की घोषित योजनाओं का फोकस तीन बड़े क्षेत्रों पर दिखाई देता है—उद्योग, रोजगार और महिला आर्थिक सशक्तीकरण।
10 हजार उद्योगों का लक्ष्य पूरा होने पर नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा करने की कोशिश होगी। वहीं एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर केंद्रित है।
इन लक्ष्यों को जमीन पर लागू करने की गति, उद्योगों की वास्तविक स्थापना, निवेश और रोजगार सृजन जैसे पहलू आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण रहेंगे।
