कविवर उमाकांत वर्मा जन्मशताब्दी पर सुनील कुमार को मिला बड़ा सम्मान

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मुजफ्फरपुर में कविवर उमाकांत वर्मा जन्मशताब्दी समारोह से जुड़ा आयोजन साहित्य और लोकसंस्कृति के क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा। कविवर उमाकांत वर्मा जन्मशताब्दी समारोह के दौरान सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन के सचिव और कठपुतली कलाकार सुनील कुमार को विशेष सम्मान दिया गया। हाजीपुर के जयप्रकाश इवनिंग इंटर कॉलेज में आयोजित समारोह में पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजकुमार ने उन्हें अंगवस्त्र, स्मृतिचिह्न और मेडल प्रदान किया।

समारोह में साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान बज्जिका साहित्य और क्षेत्रीय संस्कृति के लिए योगदान देने वाले कई लोगों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

हाजीपुर में हुआ जन्मशताब्दी समारोह

कविवर प्रो. उमाकांत वर्मा की जन्मशताब्दी के अवसर पर हाजीपुर, वैशाली स्थित जयप्रकाश इवनिंग इंटर कॉलेज में विशेष समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही।

समारोह में पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजकुमार, बिहार महिला परिषद की अध्यक्ष चंदना सहाय, कविवर प्रो. उमाकांत वर्मा की पुत्री डॉ. किरण वर्मा और कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अनीता सहाय सहित कई अतिथि शामिल हुए।

कवि अखौरी चंद्रशेखर समेत साहित्य जगत से जुड़े लोगों ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आयोजन के माध्यम से कविवर उमाकांत वर्मा के साहित्यिक योगदान और उनकी स्मृतियों को याद किया गया।

कठपुतली कलाकार सुनील कुमार को मिला सम्मान

समारोह में सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन के सचिव एवं कठपुतली कलाकार सुनील कुमार को ‘कविवर प्रो. उमाकांत वर्मा जन्मशताब्दी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजकुमार ने सुनील कुमार को अंगवस्त्र, स्मृतिचिह्न और मेडल प्रदान किया। सम्मान समारोह के दौरान लोककला और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनके योगदान को रेखांकित किया गया।

सम्मान मिलने के बाद सुनील कुमार ने जन्मशताब्दी समारोह समिति, हाजीपुर के अध्यक्ष संजय वर्मा के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान लोककला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

साहित्य और बज्जिका संस्कृति से जुड़े लोगों का सम्मान

कार्यक्रम में केवल एक सम्मान तक आयोजन सीमित नहीं रहा। बज्जिका साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाले कई लोगों को अलग-अलग सम्मान प्रदान किए गए।

बज्जिका साहित्य के दिवंगत विद्वानों के परिजनों को ‘बज्जि-रत्न शाश्वत सम्मान’ दिया गया। वहीं साहित्यकारों को ‘बज्जि-रत्न शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

इसके अलावा बज्जिका कला, पुस्तक सेवा, संस्कृति, नाटक और सिनेमा समेत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को ‘बज्जि कला-संस्कृति सेवा सम्मान’ प्रदान किया गया।

इस पहल ने क्षेत्रीय भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति से जुड़े योगदान को सार्वजनिक मंच पर पहचान देने का काम किया।

लोककला को बढ़ावा देने पर जोर

कठपुतली कला भारतीय लोक परंपरा की महत्वपूर्ण विधाओं में शामिल रही है। आधुनिक मनोरंजन के दौर में ऐसी लोककलाओं को जीवित रखने के लिए कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रयास महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

सुनील कुमार का सम्मान इसी व्यापक सांस्कृतिक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। सम्मान के जरिए लोककला से जुड़े प्रयासों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई गई।

सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन लंबे समय से सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। संस्था की संरक्षक एवं कठपुतली कलाकार कांता देवी की अध्यक्षता में मालीघाट स्थित संस्थान में हुई बैठक के दौरान हाजीपुर में आयोजित जन्मशताब्दी समारोह की जानकारी साझा की गई।

सम्मान मिलने पर लोगों ने दी बधाई

सुनील कुमार को कविवर उमाकांत वर्मा जन्मशताब्दी सम्मान मिलने के बाद सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई दी।

शांति सेना के संयोजक सोनू सरकार, सामाजिक कार्यकर्ता शम्भू मोहन प्रसाद, साईं सेवादार अविनाश कुमार और परफेक्ट सोलुशन सोसाइटी के सचिव अनिल कुमार ठाकुर ने शुभकामनाएं दीं।

इसके अलावा पथ परिवर्तन के विक्रम जयनारायण निषाद, समसी युवा विकास मंच के मोहम्मद हसीब, अमन चिल्ड्रेन स्कूल की प्राचार्या बबिता ठाकुर और सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने भी सुनील कुमार को बधाई दी।

साहित्य और लोकसंस्कृति के लिए क्या है संदेश?

कविवर उमाकांत वर्मा की जन्मशताब्दी के अवसर पर आयोजित यह समारोह साहित्य के साथ-साथ क्षेत्रीय संस्कृति और लोककलाओं को सम्मान देने का मंच बना।

बज्जिका साहित्य, कला, नाटक, सिनेमा और पुस्तक सेवा से जुड़े लोगों को सम्मानित किए जाने से स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश भी सामने आया।

वहीं सुनील कुमार को मिला सम्मान यह बताता है कि कठपुतली जैसी पारंपरिक लोककलाओं को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों के प्रयासों को भी सार्वजनिक मंच पर पहचान मिल रही है।

ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को क्षेत्रीय साहित्य और लोककलाओं से जोड़ने में भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही स्थानीय संस्कृति से जुड़े कलाकारों को अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन भी मिलता है।


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